Saturday, June 25, 2016

Amazing Facts about Animals in Hindi

जानवरों, पशुओं के बारे में जानकारी. Amazing Facts about Animals in Hindi for Kids. Interesting Creatures Information, General Knowledge, Funny, Fun, Weird.
 
Amazing Facts about Animals

  • लकड़ी खाने के मामले में दीमक का कोई जवाब नहीं, पर मजेदार तथ्य यह है कि हर तरह की लकड़ी खा जाने की कुवत रखने वाली दीमक स्वयं इसे पचा भी नहीं सकती। इसे पचाने के लिए दीमक को दूसरे सूक्ष्म जीव के साथ पार्टनरशिप करनी पड़ती है, जो इसके साथ इसी की आँतों में बसा रहता है। इस पार्टनरशिप में दीमक का काम सिर्फ लकड़ी को चबाकर इसे निगल लेना भर होता है और आँतों में बैठे दूसरे पार्टनर, जो प्रोटोजोअंस कहलाते हैं, इस लकड़ी की लुगदी को भोजन में बदल देते हैं, जिस पर दोनों अपना जीवन निर्वाह करते हैं। 
  • पिस्सु अपनी लम्बाई के 350 गुने ऊँचाई तक बढ़ सकता है। यह ऊंचाई एक फुटबॉल के मैदान जितनी लम्बी मानी जा सकती है। 
  • शुतुरमुर्ग पर 80 साल के सर्वे के दौरान ऐसा कोई केस नहीं पाया गया जब उसने अपना सर रेत में न दफनाया हो।  
  • टाइगर्स अपना खाना शेयर करते हैं। मादा और बच्चों को पहले खाने देते हैं। जबकि लायन अपने किये हुए शिकार को खाने के लिए एक दूसरे से लड़ पड़ते हैं। लगभग 90 % मादा शेर शिकार करती हैं।  
  • घोड़ों के दांतों को गिनकर नर और मादा की पहचान की जा सकती है। अधिकतर नरों के दांत 40 जबकि मादा के दांत 36 होते हैं।  
  • सामान्यतया एक कुत्ते की आँखों की रौशनी मानव से अच्छी होती है लेकिन उतनी रंगदार नहीं। 
  • कुत्ते और बिल्लियाँ मनुष्य की तरह लेफ्ट या राइट हैंडेड होते हैं।  
  • चूहों की संख्या बहुत तीव्र गति से बढ़ती है। एक जोड़ा एक साल में लाखों संतानें पैदा कर सकते हैं। 
  • चूहों की याददाश्त बहुत अच्छी होती है। वे एक बार कोई रास्ता देख लेते हैं तो उसे दोबारा नहीं भूलते। 
  • एक चूहा 5 मंजिला इमारत से गिरने पर भी चोट नहीं खाता।  
  • एक ऊँट की तुलना में एक चूहा ज्यादा लम्बे समय तक बिना पानी के जिन्दा रह सकता है।  
  • मगरमच्छ अपनी जीभ को बाहर नहीं निकाल सकता। इसके अतिरिक्त इसका पाचक रस इतना तेज होता है कि यह एक लोहे की कील को भी पचा सकता है।  
  • अधिक गहराई तक जाने के लिए मगरमच्छ अपने पेट में पत्थर निगल लेता है। 
  • आस्ट्रेलिया में पायी जाने वाली नन्हीं डकबिल अपने गालों में विशेष थैलियों के कारण लगभग 600 कीड़ें स्टोर कर सकती है।  
  • शारीरिक तौर पर सूअरों के लिए आकाश की ओर देखना असंभव है।  
  • एक साही का दिल एक मिनट में औसतन 300 बार धड़कता है।  
  • फिलिपींस में मुर्गों की लड़ाई का एक बाज़ार है जहाँ पर 500000 मुर्गों को एक ही समय में लड़ाया जाता है।  
  • चमगादड़ों के सुनने की क्षमता बहुत ज्यादा होती है। वे एक बाल की हरकत को भी सुन सकते हैं।  
  • केंचुआ अपने वजन से दस गुना अधिक वजन खींच सकता है।  
  • दक्षिण अफ्रीका के जंगलों में जहरीली त्वचा वाले मेंढक पाए जाते हैं। आदिवासी इनके जहर को बाणों में लगाकर शिकार करते हैं, इसलिए इन्हें एरो मेंढक कहा जाता है।  
  • नीला रंग मच्छरों को किसी अन्य रंग की अपेक्षा ज्यादा आकर्षित करता है।  
  • गिलहरी का एक दांत हमेशा बढ़ता रहता है।  
  • छिपकली का दिल 1 मिनट में एक हजार बार धड़कता है।  
  • समुद्री केकड़े का दिल उसके सिर में होता है।  
  • धरती पर चींटियों का भार सारे मनुष्यों के भार के बराबर है।  
  • तितली स्वाद का पता अपने पैरों से लगाती है।  
  • साँपों की लगभग 5000 प्रजातियाँ होती है। जिनमें से 725 में विषदंत पाये जाते हैं और 250 ऐसी होती है जिनके एक ही दंश में मानव को मार देने की क्षमता होती है।    
  • बिच्छू की कोई 2000 प्रजातियाँ पायी जाती है। न्यूजीलैंड और अन्टार्कटिका को छोड़कर ये विश्व के सभी भागों में पायी जाती है।

How are these facts about animals?


Friday, June 24, 2016

Anmol Vichar in Hindi

अनमोल विचार, आदर्श वाक्य, अमूल्य वचन, बहुमूल्य कथन. Anmol Vichar in Hindi. Adarsh Vakya, Amulya Vachan, Bahumulya Kathan, Priceless, Precious, Valuable Messages.

Anmol Vichar / अनमोल विचार

  • लेखक/वक्ता के रूप में जब कदम-कदम पर शब्दों की सीमा का भान होने लगता है...और पाठक/श्रोता के रूप में जब चंद शब्द ही असीमित की झलक देने लगते हैं...तब-तब हमारी यात्रा की दिशा स्वयं की ओर होती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अपराध होने ही न देना, उसके लिए सजा देने से कहीं बेहतर है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • लगातार बीते समय के बारे में सोच-सोचकर अक्सर हम लोग अपना आने वाला भविष्य बिगाड़ बैठते हैं। ~ पर्सियस / Perseus 
  • श्रद्दालु पुरुष ही ज्ञान प्राप्त कर सकता है और ज्ञान प्राप्त होने पर ही इन्द्रियों की संयम- साधना हो सकती है। ~ गीता / Geeta 
  • पापभीरुता एक ऐसा गुण है जिससे अनेक गुणों की प्राप्ति होती है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • जितने भी संयोग सम्बन्ध है वे सब अनित्य है। ~ अज्ञात / Unknown 
  • यह सबसे बड़ा आश्चर्य है कि व्यक्ति को स्वयं का अपराध, अपराध नहीं लगता। ~ अज्ञात / Unknown 
  • जो भी तुमसे मांगता है उसे दो, जो तुम्हारा सामान ले जाएँ उनसे दुबारा मत पूछो और जैसा व्यवहार तुम उन लोगों से चाहते हो, वैसा उनके साथ करो। ~ जीसस / Jesus 
  • भला मानव स्वतंत्रता की ह्रदय से चाह रखता है। शेष लोग तो स्वछंदता प्रेमी होते हैं। ~ जॉन मिल्टन / John Milton  
  • योग्यता को छिपाने की कला जानना ही सच्ची योग्यता है। ~ फ्रेंकोइस डे ला रोशेफोकोल्ड / Francois De La Rochefoucauld 
  • मनुष्य अपने गुणों से आगे बढ़ता है न कि दूसरों की कृपा से। ~ लाला लाजपतराय / Lala Lajpat Rai 
  • मनसा, वाचा, कर्मणा किसी को दुःख न पहुंचाओंक्रोध को क्षमा से, विरोध को अनुरोध से, घृणा को दवा से और द्वेष को प्रेम से जीतो। ~ Maharshi Dayanand Saraswati / महर्षि दयानंद सरस्वती 
  • चन्द्रमा अपना प्रकाश सारे आकाश में फैलाता है, परन्तु अपना कलंक अपने ही भीतर रखता है। ~ रवीन्द्र नाथ टैगोर / Rabindranath Tagore  
  • जो एक बार विश्वासघात करे, उसका कभी विश्वास न करो। ~ पंचतंत्र / Panchtantra

Nature Quotes in Hindi

प्रकृति पर नारे, कुदरत, सृष्टि, पृथ्वी, ब्रह्माण्ड. Nature Quotes in Hindi. Prakriti Slogans, Mother Earth, Kudrat, Srishti, Universe, Cosmos, Prithvi, Brahmand.

Nature Quotes

  • मनुष्यों द्वारा सिर्फ कानून/नैतिक व्यवस्था हो सकती है न्याय नहीं। असल न्याय तो प्रकृति के हिस्से ही है और उसी के हिस्से रहेगा। एक सीमाहीन, आत्मानुशासित विश्व निसंदेह एक श्रेष्ठतम कल्पना है। यह कल्पना मुझे भी बेहद पसंद है। लेकिन एक सच यह भी है कि यह आदर्श व्यक्तिगत स्तर पर संभव हो सकता है...समूह पर लागू नहीं किया जा सकता। क्योंकि जहाँ-जहाँ लागू करने की बात आई वहां आत्म-अनुशासन रहा ही कैसे? यह तो चेतना के स्तर का विषय है, जिसे एक जैसा कोई कैसे बना सकता है? व्यक्तिगत रूप से सभी को एक जैसा अनुभूत करना निसंदेह संभव है...लेकिन इसे सभी अनुभव करे ही करे यह उद्देश्य लेकर चलना उस आदर्श विश्व के सिद्धांत का ही खंडन है। इसलिए समूह के हाथ में व्यवस्था है एक देश के रूप में, एक समाज के रूप में, कानून के रूप में... बाकी का काम हर एक व्यक्ति को अपने स्तर पर करना है - नैतिकता की बजाय अपनी चेतना को निखारने का काम, जिसमें सहयोगी निसंदेह हम सब लोग हो सकते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यहाँ लोगों की लाउड स्पीकर वाली भक्ति ने प्रकृति से पंछियों की सुरीली चहचहाहट के साथ शुरू होने वाली सुबहों को भी छीन लिया। कहीं तो, कभी तो, कुछ तो प्राकृतिक रहने दिया होता, प्रकृति के सबसे बुद्धिमान (?) प्राणी! ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रकृति के मूल तत्व से जुड़े बिना भेद समाप्त हो ही नहीं सकते। एक जगह से धुंधले होंगे तो दूसरी जगह उभर आयेंगे। बाहर की क्रांतियाँ कभी-कभी ठीक होती है, लेकिन उससे पहले जरुरत भीतरी क्रांति की है। भीतर जो बदलेगा वह स्वाभाविक और स्थायी होगा। केवल बाहर जो बदलेगा वह बस रूप बदलेगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • यहाँ एक ओर परंपरा, धर्म और संस्कृति का शोर सुनाई देता है जो मात्र दिखावा बनकर रह गये हैं, तो दूसरी ओर वेस्टर्न कल्चर हावी है, जो मात्र भ्रम लगता है। इन दोनों से इतर कोई प्रकृति की बात क्यों नहीं करता? कितना आकर्षित करती है वह! ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कहते हैं कि प्रकृति तीन गुणों से मिलकर बनी है...तम, रज और सत्व। सबमें ये गुण अलग-अलग समय में अलग-अलग मात्रा में होते हैं, जिन पर कई कारकों का प्रभाव पड़ता है और इस त्रिगुण प्रकृति को माया कहा जाता है। जो इन तीनों गुणों से ऊपर उठ जाता है (त्रिगुणातीत), वह अपनी वास्तविक प्रकृति (निर्गुण) को पा लेता है। अर्थात् अपने मूल रूप में हम सभी एक ही हैं। आंशिक ही सही कभी-कभी यह अनुभूति होती भी है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • हम जब प्रकृति के संरक्षण की बात कहते हैं तो हम अपने ही संरक्षण की बात कह रहे होते हैं। बाकी मनुष्य रहे न रहे...प्रकृति या इस पूरे ब्रह्माण्ड को रत्ती भर भी फर्क नहीं पड़ने वाला। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • प्रकृति अपनी प्रगति एवं विकास में रुकना नहीं जानती और हर अकर्मण्यता पर अपने शाप की छाप लगाती जाती है। ~ गेटे 
  • जो बसे हैं, वे उजड़ते हैं, प्रकृति के जड़ नियम से। पर किसी उजड़े हुए को फिर बसाना कब मना है? है अँधेरी रात पर दिया जलाना कब मना है? ~ हरिवंश राय बच्चन / Harivansh Rai Bachchan 
  • विवाह के मंत्र कर्त्तव्य बुद्धि दे सकते हैं, भक्ति दे सकते हैं किन्तु माधुर्य देने की शक्ति उनमें नहीं है। यह शक्ति केवल प्रकृति के दिए नियम पालन में है। ~ शरतचन्द्र चट्टोपाध्याय / Sarat Chandra Chattopadhyay
 
How are these quotes about nature?