Thursday, August 25, 2016

Poem on Krishna in Hindi

कृष्ण पर कविता, कृष्णा शायरी. Poem on Shri Krishna in Hindi for Kids. Lord Kanhaiya Shayari, Kanha Bhakti Kavita, Lines, Poetry, Rhymes, Slogans, Status.
 
Poem on Krishna in Hindi

हे कृष्णा!

हे कृष्णा!
तुमने कहा था न
जब-जब भी बढ़ेगा अन्याय और अधर्म
तब-तब लोगे तुम इस धरा पर जन्म!

आज अधर्म ने अपना जाल बिछा दिया है
और धर्म का नामो निशां मिटा दिया है
अन्याय सर चढ़ कर बोल रहा है
न्याय तो बस सूली पर डोल रहा है।

हे कृष्णा!
क्या तुम्हें नहीं सुनाई दे रही
दीन दुखियों की दर्द से भरी चीत्कारें
क्या तुम्हें नहीं दिखाई दे रही
हर तरफ खड़ी नफरत की दीवारें

अपने उस वादें को पूरा करने
एक बार आओ तो सही
निराश हृदयों में आशा की ज्योत
जलाओं तो सही।
भगवान मानकर पूजते हैं लोग तुम्हें
उनकी श्रद्धा को यूँ
झुठलाओं तो नहीं।

By Monika Jain 'पंछी'

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Wednesday, August 24, 2016

Poem on Janmashtami in Hindi

कृष्ण जन्माष्टमी कविता. Poem on Happy Shri Krishna Janmashtami Festival in Hindi for Kids. Kanha par Kavita, Gokulashtami Shayari Lines, Sms, Quotes, Messages. 
Poem on Janmashtami in Hindi

मेरे ये नैन बस तुम्हे ढूंढ़ रहे हैं

हे कृष्णा!
सुना है आज तुम्हारा जन्मदिवस है
उल्लासमय हो रहा सारा जनमानस है।

खुश हूँ मैं ये जानकर कि लोग आज भी
महानायकों को पूजते हैं
महापुरुषों की जय जयकार के नारे
इस धरा पर आज भी गूंजते है।

पर दिल के एक कोने में न जाने क्यों
कुछ खटक रहा है
ख़ुशी के इस अवसर पर भी
मन जाने क्यूँ भटक रहा है।

शायद तलाश रही हूँ मैं तुम्हे
हर आते-जाते इंसान में
जो दिन रात करते हैं तुम्हारी पूजा
उनके चरित्र और ईमान में

तुम्हें तलाशते ये दो नैन
कुछ कहना चाह रहे हैं
बाहर से जो लगते हैं कृष्ण
भीतर से कंस क्यों नजर आ रहे हैं।

आराध्य को अगरबत्ती दिखाना ही
अब धर्म बन गया है
पूजा जा रहा है जिसे उसके विचारों का
कोई अर्थ नहीं रहा है।

हे कृष्णा!
हर गली, हर चौराहे आज कंस घूम रहे हैं
आताताइयों के बुलंद हौंसले गगन चूम रहे है
लोग मग्न है जन्माष्टमी उत्सव मनाने में
पर बैचेन मेरे ये नैन बस तुम्हे ढूंढ़ रहे हैं।

By Monika Jain 'पंछी'

 
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Sunday, August 21, 2016

Anmol Vachan in Hindi

अनमोल वचन, अमूल्य विचार, सुविचार कथन. Anmol Vachan in Hindi. Amulya Vichar, Baatein, Suvichar Kathan, Amrit Vani Lines, Gyan Shabd Quotes, Words, Status, Sms.

Anmol Vachan
 
  • किसी भी शब्द, व्यक्ति, समूह, जाति, धर्म...से हम इतनी पहचान क्यों बनाये कि सत्य का सामना न कर सकें या उसे स्वीकार न कर सकें। क्योंकि एक सत्य यह भी है कि ये सारी की सारी पहचान उधार की है जो हमें बाहर से मिली है। हमारा खुद का इसमें कुछ भी नहीं है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जैसे-जैसे हम सापेक्षता को समझेंगे हम जानेंगे कि पूर्ण रूप से सही और गलत जैसा कुछ भी नहीं होता। तब बस एक ही चीज की जरुरत होती है – जागरूकता की कि इस समय क्या करना थोड़ा अधिक सही रहेगा और क्या करना थोड़ा कम गलत। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • भेदों को मिटाने का तरीका कहीं भेदों को मजबूत करने वाला न हो...ख़याल रहे। ~ Monika Jain ‘पंछी 
  • जितनी भी धार्मिक कट्टरता है वह 'भक्ति' और 'भक्ति के अभ्यास' का अंतर है। यह अंतर है सहज और कृत्रिम का। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • चेतना ही सबसे अधिक द्वंदों का सामना करती है। जड़ता तो बस एक प्रवाह में बह जाती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • ज्ञान बाँटा जा सकता है...ग्रहणशीलता नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • सामान्यत: दुनिया में ऐसी कोई चीज नहीं होती जिसका अपवाद नहीं होता। इसलिए व्यर्थ की बहस करने से बेहतर है, अपवादों को हमेशा समाहित माना जाये। हर बार लिखना जरुरी नहीं न 'अपवादों को छोड़कर!' ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • शब्दों, वाक्यों, घटनाओं, संदेशों, शिक्षाओं, जीवन, मृत्यु, हर चीज के जब सही और गहरे अर्थ समझ में आने लगते हैं तो व्यक्ति खुद-ब-खुद ही बदलने लगता है। बाकी लोग बस इन्हें सतही तौर पर पकड़े हुए दूसरों को बदलने की कोशिश में लगे रहते है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • बाहर नैतिकता बचा सकते हो, कानून बचा सकते हो, व्यवस्था बचा सकते हो और संप्रदाय भी। लेकिन धर्म एक ऐसी चीज है जिसे बस भीतर ही बचाया जा सकता है...और कोई तरीका नहीं। पर हाँ, जब यह भीतर बचने लगता है तब बाहर स्वत: ही प्रतिबिंबित होने लगता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’  
  • विश्वास प्रेम के सदृश है, यह विवश नहीं किया जा सकता। जैसे बलपूर्वक प्रेम करना घृणा उत्पन्न करता है, वैसे ही धार्मिक विचारों में विवश करना अविश्वास पैदा करता है। ~ ऑर्थर शोपेनहावर / Arthur Schopenhauer  
  • संत के पास दिल और दिमाग से खाली होकर जाएँ, विनम्र बनकर जाएँ ताकि उनसे कुछ पा सके। ~ अज्ञात / Unknown  
  • परमार्थ का मार्ग व्यवहार से होकर जाता है। इसलिए व्यवहार को शास्त्र मर्यादा के अनुसार बनाओ। ~ ब्रह्मानंद सरस्वती / Brahmananda Saraswati  
  • जिस प्रकार बादल समुद्र का खारा पानी पीकर भी मीठा जल ही बरसाता है उसी प्रकार सज्जन किसी की कटु वाणी सुनकर भी सदा मधुर वाणी ही बोलता है। ~ अज्ञात / Unknown  
  • जो व्यक्ति आदतन अनिर्णय से ग्रस्त रहता है, उससे ज्यादा दयनीय कोई है ही नहीं। ~ विलियम जेम्स /William James  
  • प्रतिभा भगवान का दिया उपहार है। आप इसके साथ क्या करते हैं, वह भगवान को लौटाने वाला उपहार होगा। ~ लियो बुशकेजिलिया / Leo Buscaglia  
  • एक झूठ हजार सच्चाइयों को नष्ट कर देता है। ~ घाना की कहावत
 
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