Poem on Sacrifice in Hindi


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ख़ामोश कुर्बानी

नफरत, गालियों और तानों के शोर में 
मैंने आखिर छिपा ही ली 
मोहब्बत तुझसे बेपनाह 
दबा दिया हर वो शब्द और अहसास 
जो था तुझसे मेरे इश्क का गवाह. 

इसे अपनी जीत कहूँ 
या कहूँ अपनी करारी हार 
जिसे ना हो नींद में भी 
ख़्वाबों को छूने की इजाजत 
उसे भला क्यों होता है प्यार ?

तुझे तो शायद कभी 
अहसास भी ना हो 
मेरी खामोश कुर्बानी का 
क्योंकि दिल में झांकना 
तूने कभी सीखा ही नहीं 
जो तुझे लग रहा था कड़वा
वह था बस मीठा
तीखा कभी था ही नहीं. 

तुझे नहीं बता सकती थी 
कभी भी नहीं 
कि तेरे बिन जीया नहीं जा सकता है 
तू चल देगा कभी भी कहीं ओर 
इसे नज़रंदाज़ भी तो नहीं किया जा सकता है. 

तेरे साथ प्यार हमेशा एक सजा रही 
तेरे बिना भी जीने की कोई वजह नहीं 
पर सजा से बेहतर है वजह का ना होना 
हर पल टूटने से कई बेहतर है
ताउम्र बिखरकर जीना. 

कड़वा, मीठा जो भी है, तेरी यादों का पिटारा 
उसे ही बना लूंगी मैं, अपने जीने का सहारा 
पर तेरे दिल में मैं हमेशा नफरत बनकर ही रहूंगी 
पीती रहूंगी अपनी खामोश कुर्बानी का दर्द 
पर तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी. 
तुझसे कभी कुछ भी ना कहूँगी.

By Monika Jain ‘पंछी’

It’s very difficult to give up something that is meaningful and important to you. But some relationships are bound to break, so it’s better to break them at right time, instead of making them more bitter. How is this hindi poem about sacrifice in love ? Feel free to share your views via comments.