Saturday, February 13, 2016

Love Story in Hindi

Love Story in Hindi. Painful Adhuri Prem Kahani, True, First, Sad, Emotional, Lovers, Dard, Breakup Article, Heart Touching, Broken Trust, One Sided, Valentine Day, Lost Heart. अधूरी प्रेम कहानी.
 
मैं सीख रही हूँ फिर से प्यार बाँटना

उदासी के इस लम्बे दौर में मैंने बना लिए हैं मुस्कुराहटों के कुछ ठिकाने. यूँ तो न जाने कितनी कहानियाँ है इन उदासियों का हिस्सा जिसमें एक कहानी तुम्हारी भी तो है. पर इन कहानियों से चुराकर थोड़े से आंसू मैं बना लेती हूँ हर रोज कुछ मोती और टांग आती हूँ इन्हें उन ठिकानों पर जहाँ इसी तरह जमा की है हर रोज मैंने कुछ मुस्कुराहटें. इस तरह उदासी का हिस्सा होकर भी तुम चमक आते हो कभी-कभी मोतियों सी मुस्कान बनकर...पर फिर भी दिल कहता है कि काश! तुमने मेरी मुस्कुराहटों को चुना होता...उन मुस्कुराहटों को जिनके लिए न चुराने पड़ते मुझे अपने ही आंसू.
 
अपने जीवन के सबसे खुबसूरत और मीठे शब्द मैंने तुम्हारे ही तो नाम किये थे और कभी न सोचा था कि तुम्हारे मन में मेरे लिए इतनी कड़वाहट, इतनी घृणा और इतनी नफरत भर आएगी. अपना अटूट विश्वास मैंने तुम्हें ही तो सौंपा था पर नहीं जानती थी कि तुम्हारे लिए उसका मूल्य दो कोड़ी भी नहीं रहेगा. तुम्हें पाने का कभी इरादा न था लेकिन तुम्हें खो देने के डर में जो गलतियाँ हुई और जो नहीं हुई उनका पूर्ण स्वीकार भी तुम्हारी क्षमा नहीं पा सका. जाते-जाते जो शब्द बाण तुमने छोड़े उनसे बहुत कुछ मर चुका था मेरे भीतर. पर मैं नहीं जानती वह कौनसी भावना होती है जो तुमसे लगातार मिले अपमान, तिरस्कार और व्यंग्य बाणों के बावजूद भी खत्म होने का नाम नहीं लेती. शायद तुमसे कुछ पलों के लिए मिला स्नेह उन सारी उपेक्षाओं पर भारी है जो अब तक जारी है. शायद कुछ लम्हों की मित्रता किसी कसक या द्वेष को मन में ठहरने ही नहीं देती. शायद मेरे प्रति तुम्हारे एक छोटे से अन्तराल के आकर्षण की गुणवत्ता हर उस विकर्षण को हरा देती है जो तुम्हारे अन्याय और पक्षपात को देखकर उपजता है. यूँ तो न जाने कितने लोगों से तारीफें बटोरी है पर तुम्हारे स्नेह से सिक्त प्रेरणात्मक शब्दों की गूँज आज भी तुम्हारी घृणा से उपजे शब्दों पर हावी है. और तुम्हारी नाराजगी देखकर लगता है जैसे सृष्टि का कण-कण मुझसे रूठा है. कुछ ही दिनों की पहचान...पर जैसे सालों का रिश्ता कोई टूटा है.
 
कितना कुछ था जो तुमसे कहना था...कितने सारे डिस्कशंस जो अधूरे छूट गए ...कितना कुछ नया जो उछल कूद कर तुम्हें बताना था. तुम्हारी अनवरत चलती रिसर्च्स, जिनके बारे में कितना कुछ जानना था...सब अधुरा रह गया. अधूरे रह गए वे सुर भी जो सिर्फ तुम्हारी वजह से फिर जागे थे. अधूरी रह गयी न जाने कितनी कवितायेँ जो सिर्फ तुम पर रची जानी थी. अधूरी रह गयी एक कहानी भी, जिसमें बस मुस्कुराहटों को होना था. अब बचा है तो कोरा सन्नाटा...जिसमें सिसकियाँ लेता है वह विश्वास जो तुम मुझ पर ना कर सके, वह भरोसा जो मैंने कभी तोड़ना सीखा ही नहीं और वह दर्द जो सीख रहा है मुस्कुराहटों की आड़ में छिप जाना.
 
सबका भरोसा पाने वाली मैं... नहीं पा सकी एक तुम्हारा ही विश्वास. और देखो न...तुम्हारा भरोसा पाने की जद्दोजहद में जाने कहाँ छूट गया है मेरा ही विश्वास. क्यों हमारे बीच किसी के भ्रम के बीज बोने की कोशिश को तुमने सफल होने दिया? क्यों तुमने किसी और की आँखों से मुझे पढ़ा. बस एक बार...सिर्फ एक बार...मेरी आँखों को पढ़ा होता तो तुम्हें नजर आती वह भावना जो सारी दुनिया की नजरों से तुम्हारी हिफाजत कर सकती थी. तुम्हे अहसास भी नहीं कि सारी दुनिया की ईर्ष्या से बचने की कवायद में तुम उससे ही ईर्ष्या कर बैठे जिसके होठों पर सदा तुम्हारे लिए दुवाएं बसती है. निराशा और झुंझलाहट में अपने जीवन की सारी समस्यायों का ठीकरा तुमने उसके सर फोड़ दिया जो तुम्हारे लिए सकारात्मक ऊर्जा बनना चाहती थी. छोटी-छोटी सी गलतियों को तुमने इतना गंभीर अपराध सिद्ध कर दिया कि अब जरुरत से ज्यादा सजा पाने के बावजूद भी मैं अपराध बोध से मुक्त नहीं हो पाती.
 
जानती हूँ प्रेम के उच्चतम तल को मैं नहीं छू पायी इसलिए ये सारी शिकायतें हैं, ये सारे प्रश्न है. पर हर रोज तुम याद आते हो और मैं खुद को भूल जाती हूँ...हर रोज तुम्हारी बातें दोहराती हैं और मैं ख़ामोश हो जाती हूँ...तुम सिखा रहे हो अपेक्षाओं के पर काटना...और मैं सीख रही हूँ फिर से प्यार बाँटना. लम्हा-लम्हा दर्ज हो रहा है तुम्हारा मौन मन के किसी कोने में...और एक दिन शायद यही सिखाएगा मुझे सही मायनों में प्रेम. वह प्रेम जो सारी अपेक्षाओं, सारी शिकायतों और सारे दर्द से परे हो. वह प्रेम जो सारे बंधनों से परे हो. वह प्रेम जो सिर्फ और सिर्फ मुक्त करता है, वह प्रेम जो समय की सीमाओं से परे हो.

By Monika Jain ‘पंछी’