Story on Moral Education in Hindi


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सर्वश्रेष्ठ छात्र  
(नन्हें सम्राट में प्रकाशित)

आज स्कूल का वार्षिकोत्सव था. हर क्षेत्र में प्रतिभा दिखाने वाले बच्चों को पुरस्कारों का वितरण हो रहा था. रोहन बहुत खुश और उत्साहित नजर आ रहा था. उसे पूरा विश्वास था कि इस साल उसे ही स्कूल के बेस्ट स्टूडेंट का अवार्ड मिलेगा. उसने स्कूल टॉप किया था और बैडमिंटन में भी राज्य स्तर पर प्रथम स्थान पाया था. वह बहुत सुन्दर भी था. पर इन सब बातों पर उसे बहुत घमंड था. अपने सामने वह किसी को कुछ नहीं समझता था. सामने रखी ट्रॉफी की ओर इशारा करते हुए बार-बार दोस्तों से कह रहा था, ‘देखना, यह ट्रॉफी थोड़ी देर बाद मेरी ही बगल में होगी.’

‘पर स्कूल तो अमित ने भी टॉप किया है तो उसे भी तो अवार्ड मिल सकता है’ रोहन का एक दोस्त डरते-डरते बोला.

‘तू चुप कर. वह लंगड़ा पढ़ाई के अलावा और कर ही क्या सकता है? मैं तो खेलकूद में भी अव्वल हूँ, इसलिए इनाम तो मुझे ही मिलेगा.’ रोहन इतराते हुए बोला.

सभी पुरस्कारों के वितरण के बाद अंत में जब बेस्ट स्टूडेंट के पुरस्कार की बारी आई तो अमित के नाम की घोषणा हुई. तालियों की गड़गड़ाहट से हॉल गूँज उठा. पर रोहन के चेहरे की ख़ुशी और उत्साह नाराजगी, गुस्से और ईर्ष्या में बदल गयी. वह अपने दोस्तों से कहने लगा, ‘इस टकले प्रिंसिपल ने इस लंगड़े में जाने क्या देख लिया कि इसे बेस्ट स्टूडेंट बना दिया. जरुर तरस खाकर ही यह इनाम दिया होगा. वरना इस अवार्ड पर तो पूरी तरह से मेरा ही हक़ था.’

रोहन के चापलूस दोस्त उसकी हाँ में हाँ मिलाने लगे. पर अंशुल को रोहन की यह बात बहुत बुरी लगी.

वह बोला, ‘रोहन यह अच्छी बात नहीं है. तुम एक तरफ बेस्ट स्टूडेंट का अवार्ड चाहते हो और दूसरी तरफ किसी के लिए कैसे शब्दों का प्रयोग करना चाहिए ये भी तुम्हें नहीं पता. शारीरिक कमजोरी तो किसी में कभी भी आ सकती है. पर इसका यह आशय नहीं कि हम किसी की कमजोरी का मजाक उड़ायें, और किसी को सिर्फ उसकी शारीरिक दुर्बलता की वजह से कमतर आंके. अमित सिर्फ पढ़ाई में होशियार ही नहीं उसका आचरण भी बहुत अच्छा है. अपनी शारीरिक कमजोरी के बावजूद भी वह हमेशा सबकी मदद के लिए तैयार रहता है. पढ़ाई में कमजोर छात्रों को पढ़ाता है. छोटे, बड़े सभी का कितना आदर करता है और यही सब बातें उसे स्कूल का सर्वश्रेष्ठ छात्र बनाती है.’

‘वह ढंग से चल फिर नहीं सकता. इसलिए सबकी सहानुभूति पाने के लिए ऐसा करता है. खैर! उसे तो मैं अगले साल देख लूँगा.’ यह कहकर रोहन अपने दोस्तों के साथ घर की ओर निकल पड़ा.

गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल वापस शुरू हुए. रोहन अमित को नीचा दिखाने का कोई भी मौका नहीं छोड़ता था. उसकी हमेशा यही कोशिश रहती कि अमित पढ़ाई में ज्यादा ध्यान ना दे पाए. एक बार तो उसने अमित की कुछ नोटबुक्स भी उसके बैग से चुराकर कहीं छिपा दी. ताकि वह परेशान रहे.

वार्षिक परीक्षा में तीन महीने बचे थे. एक दिन रास्ते में रोहन की साइकिल का एक कार से एक्सीडेंट हो गया और वह लहूलुहान सड़क पर बेहोश होकर गिर पड़ा. अस्पताल में जब उसे होश आया तो पता चला उसके दोनों पांवों की हड्डियाँ टूट गयी है और दोनों में प्लास्टर बंध गया है. वह बहुत डर गया. वह माँ से पूछने लगा, ‘माँ मेरे पैर सही तो हो जायेंगे ना? मैं फिर से चल तो सकूँगा ना? और माँ मैं अपना एग्जाम तो दे पाऊंगा ना?’

माँ ने उसे भरोसा दिलाया कि सब कुछ ठीक हो जाएगा और उसे आँखें बंद कर आराम करने को कहा.

पर जैसे ही उसने अपनी आँखें बंद की उसकी आंखों के सामने स्कूल का वार्षिकोत्सव, अंशुल और अमित का चेहरा घूमने लगा. उसे अंशुल की कही हुई सब बातें याद आने लगी और वह सब हरकतें भी जो उसने अमित को परेशान करने के लिए की थी. ज्यों ही उसने आँखें खोली अपने सामने उसने अंशुल और अमित को पाया, जो उसकी तबियत पूछने के लिए वहां आये थे. उन्हें देखकर रोहन का रोना छूट गया. वह अपने किये पर बहुत शर्मिंदा था. उसने अपनी सारी गलतियाँ स्वीकार की और अमित से माफ़ी मांगी.

अमित ने उसे चुप करवाते हुए कहा, ‘तुम बिल्कुल चिंता मत करो. तुम बहुत जल्द ठीक हो जाओगे और रही स्कूल और पढ़ाई की बात तो स्कूल में अब जो भी पढ़ाया जाएगा वो मैं तुम्हें घर आकर समझा दूंगा और तुम्हें नोट्स भी दे दूंगा. तुम बस समय पर दवा लो और जल्दी से ठीक हो जाओ.’

अमित की बातों से रोहन को बहुत हिम्मत मिली और साथ ही उसे आत्मग्लानि भी हुई, ‘जिस लड़के का वह हमेशा मजाक उड़ाता रहा, परेशान करता रहा आज वही उसकी मदद के लिए सबसे पहले आया. वह सचमुच सर्वश्रेष्ठ है.’

डॉक्टर ने रोहन को दो महीने घर पर ही आराम के लिए कहा. उधर अमित स्कूल के बाद अक्सर रोहन के घर आ जाता और उसे स्कूल में पढ़ाया हुआ सब कुछ समझा देता. अमित और रोहन बहुत अच्छे दोस्त बन गए. परीक्षा तक रोहन बिल्कुल ठीक हो गया. अमित की मदद से उसने अच्छे अंकों से परीक्षा पास की.

आज फिर से वार्षिकोत्सव था. सर्वश्रेष्ठ छात्र के नाम की घोषणा होने वाली थी. हर ओर से अमित का ही नाम गूँज रहा था और जब अमित को पुरस्कार मिला तो रोहन सबसे ज्यादा खुश नज़र आ रहा था.

Monika Jain 'पंछी'

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