Khamoshi Shayari in Hindi


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Khamoshi Shayari / ख़ामोशी शायरी 

(1)

मेरे गुस्से पर तेरी ख़ामोशी
चुभती है कुछ इस कदर 
कि दिल तरसता है कभी-कभी
बस एक तेरे गुस्से के लिए. 

(2)

उफ़! ये सन्नाटे कितना शोर करते हैं 
ना होठों से कुछ कहते, ना कागज पे उतरते हैं 
किसने कहा दिल हल्का होता है लिखने वालों का 
कितने ही है दर्द जो बस रूह से गुजरते हैं. 

(3)

कुछ ना कहना भी तो कहना ही होता है 
हमेशा लफ्ज़ों की जरुरत नहीं होती बातों को.

(4)

बड़ी बेताब है ये मुस्कुराहट होठों पे खिलने को 
तेरी ख़ामोशी जो तोड़े वो पैगाम जरुरी है 
खयालों में नायाबी तेजी से जारी है 
बुनने को मीठे ख़्वाब, तेरे अल्फाज़ की दूरी है.

(5)

सन्नाटों ने फिर से एक आवाज़ लगाई है 
तंग दिल बस्तियों के शोर अब सहे नहीं जाते 
जहाँ मेरी खामोशियाँ सांस ले सके 
ऐसे लफ़्ज अब कहीं भी तो कहे नहीं जाते. 

(6)

इन चुप्पियों का भी अपना ही एक किस्सा है 
ना जाने कितना शोर इनका एक हिस्सा है 
यूँ ही नहीं पसर जाती यहाँ-वहाँ खामोशियाँ 
तड़पती है जब आवाज़ कोई, सन्नाटा तभी तो रिसता है. 

By Monika Jain ‘Panchi’ 

(8)

किसी ख़ामोशी का एक सफ़हा पलट कर देखो तुम
जाने कितने अल्फाज़ों के रंग हथेली पे उतर आयेंगे.

(9)

वो लफ्ज़ जो ज़बान पर आकर ठहरा था
कौन जाने उसका किरदार कितना गहरा था
फ़ासिला क्या रहा होगा लबों से जुबां का
दम दरिया में तोड़ा और पास एक सेहरा था.

By Malendra Kumar 

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