Wednesday, August 5, 2015

Parrot Story in Hindi


Story of Parrot in Hindi for Kids, Children. Mithu, Tota, Tote ki Kahani. Animals and Birds Cruelty. Animal Bird Abuse Tales, Parrots Short Moral Stories, Kahaniya, Kathayen. तोता, तोते की कहानी.
 
मुझे अच्छी लगती है उनकी आज़ादी 

मुझे पशु-पक्षियों को हाथ में पकड़कर घुमाना या उन्हें पिंजरे में रखकर दिल बहलाना जरा भी नहीं पसंद. पर हाँ, मुझे अच्छा लगता है आकाश में ऊंचाइयों पर उड़ते हुए पंछियों को देखना. मुझे अच्छा लगता है जब अचानक कोई भेड़ या बकरियों का झुण्ड घर के बाहर से गुजरता है और उनमें से कुछ शरारती मेमने फुदककर कतार से बाहर निकल इधर-उधर दौड़ने लगते हैं. मुझे अच्छा लगता है जब छत पर सुबह रखा दाना और पानी अगली सुबह तक अनजाने दोस्तों द्वारा पूरा फिनिश कर दिया जाता है. मुझे अच्छा लगता है घर की सीढ़ियों पर बैठकर कुत्ते या उसके पिल्ले को रोटी के छोटे-छोटे टुकड़े करके खिलाना. कई बार जब रोटी एक हो और कैंडिडेट्स ज्यादा तो छुपके से सभी को इक्वल-इक्वल शेयर करके खिला देना मुझे अच्छा लगता है. तितलियों, तोते या किसी भी पक्षी को पकड़ने के इरादे से आये विलेन को देखकर उन्हें फुर्र से उड़ा देना मुझे अच्छा लगता है. मुझे अच्छी लगती है उनकी आज़ादी. बहुत अच्छी.
 
पर कुछ लोगों को जाने क्यों यह अच्छा नहीं लगता. बात कुछ सालों पहले की है. एक तोता शायद कहीं से किसी पिंजरे से उड़कर हमारे घर पर आ गया था. उसके थोड़े से कटे हुए पंखों और उसके हावभाव से यही लग रहा था कि वह एक पालतू तोता है. बिना किसी जान पहचान के भी खाना खाते समय थाली पर या मुझ पर आकर बैठ जाता. उसे तो डर नहीं लग रहा था पर उसके इतने अपनेपन से मैं डर जाती थी :p हालाँकि निश्चिंत थी कि जैसे आया है वैसे ही चला जाएगा. पर एक दिन 2-3 घंटे के लिए बाहर क्या गयी, कुछ बच्चों को उस तोते की भनक लग गयी और मेरी अनुपस्थिति में वे उसे पकड़ने को आ गए. वह उड़कर भाग गया तो पूरे 2 घंटे उन बच्चों ने उसे पकड़ने के लिए एक पेड़ से दूसरे पेड़, दूसरे से तीसरे पर दौड़ाया, उस पर पत्थर फेंके सो अलग. उड़ने में वह शायद बहुत ज्यादा माहिर नहीं था इसलिए उनके पकड़ में आ गया और सामने रहने वाले पड़ोसी के बच्चों ने उसे पिंजरे में डाल दिया.
 
मेरे घर आने तक यह सब काण्ड हो चुका था. जब मुझे यह सब पता चला तो बहुत दुःख हुआ और बहुत गुस्सा भी आया. पता नहीं मैंने सही किया या नहीं, पर मैंने उस बच्चे से पिंजरे में पकड़ा तोता अपने घर पर दिखाने को लाने को कहा और उसे उस तोते को पिंजरे से बाहर निकालकर वही छोड़कर जाने के लिए मजबूर कर दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि पड़ोसी का मुंह हमेशा के लिए फूल गया. उस पर उनका तर्क कि बच्चों ने 2 घंटे तक इतनी मेहनत की इसे पकड़ने की. पर इससे भी बुरी जो चीज हुई वह थी उस तोते के दिमाग में भयंकर वाले डर का बैठ जाना जो बच्चों ने उसके पीछे पड़-पड़कर, पत्थर फेंक-फेंक कर उसके दिल और दिमाग में बैठा दिया था. उस दिन के बाद तोता बस कमरे में एक जगह बैठ गया और कभी अपनी जगह से हिला तक नहीं. कुछ खाने को दिया जाता तो नहीं खाता. किसी की भी आहट होती या पड़ोस के वही बच्चे उसे देखने के लिए कभी आ जाते तो वह बहुत बुरी तरह से सहम जाता. 1-2 दिन ऐसे ही निकल गए.
 
मैंने बहुत कोशिश की उसे सहज माहौल देने की पर फिर वह तोता मैंने कभी नहीं देखा जो बिना किसी डर के खाने की थाली में आ बैठता था, जो पूरे दिन घर में इधर से उधर उड़ता फिरता था. हाँ आखिरी दिन वह कमरे से बाहर खुले चोक में आया था पर फिर पता नहीं कब वह उड़ कर घर से बाहर चला गया. जिन्दा रहा होगा या नहीं यह तो नहीं पता लेकिन मुझे यही लगता है कि किसी के मनोरंजन के लिए कैदी बनने से कई बेहतर होगी उसके लिए उसकी आज़ादी वाली मौत.
 
By Monika Jain ‘पंछी’