Saturday, August 29, 2015

Telepathy-Intuition in Hindi

Telepathy Communication in Hindi. Develop Intuition, Intuitive Skills, Psychic Telepathic Power, Meditation Thoughts Reading, Nonviolence, Subconscious Mind Message Transmission. टेलिपैथी अंतर्ज्ञान.

टेलिपैथी और अंतर्ज्ञान पर मेरे अनुभव 

अहिंसा, सजगता और ध्यान के रास्ते पर जब कोई आगे बढ़ता है तो जीवन के कई रहस्य प्रकट होने लगते हैं. उसी में से एक रहस्य है कि विचार भी हमारे नहीं होते, और किसी चीज की मालकियत की बात तो छोड़ ही दें. वास्तिवकता यही है कि विचार भी हमारी प्रॉपर्टी नहीं. महावीर के अनुसार विचारों पर अपना हक़ जमाना भी हिंसा का एक अत्यंत सूक्ष्म रूप है. हालाँकि अहिंसा के इस स्तर तक पहुँच पाना दिन में तारे देखने जैसा है. आज के प्रोफेशनल युग मे यह संभव भी नहीं. लेकिन बीते दिनों जब से नोटिस करना शुरू किया है जो विचित्र अनुभव हुए हैं उनके बारे में आप सभी को बताना चाहती हूँ.
 
परसों एक ख़याल दिमाग में आया. सोचा इस पर कोई बड़ी पोस्ट लिखकर फिर सीधे ब्लॉग पर ही डालूंगी इसलिए फेसबुक पर कुछ लिखना निरस्त कर दिया. पर अगले दो दिन देखा कि कई लोगों ने उसी विचार से सम्बन्धित पोस्ट डाली है, जबकि वह कोई करंट अफेयर भी नहीं. फिर कुछ देर बाद एक किताब लेकर पढ़ने बैठी तो उसमें भी आगे पढ़ते-पढ़ते उसी से सम्बन्धित विचार पढ़ने में आये. और सबसे ताज्जुब की बात कि अनजाने में मैं खुद 2-3 साल से उस विचार को फॉलो कर रही हूँ. उस विचार पर तो बाद में लिखूंगी. लेकिन यहाँ यह बताना जरुरी है कि ऐसा इत्तेफाक सिर्फ एक बार नहीं बल्कि आजकल कई बार होता है. कई बार तो ज्यों की त्यों पक्तियां जो कुछ देर पहले सोची हो किसी और की पोस्ट में या बातचीत में निकल आती है.
 
इसके अलावा एक और जो विचित्र घटना मेरे साथ होती है. फेसबुक पर कई बार जब किसी की पोस्ट या कमेंट पढ़ रही होती हूँ, तो मेरा पढ़ना कम्पलीट करने से पहले ही उसी व्यक्ति का लाइक, कमेंट या कभी-कभी मेसेज भी इनबॉक्स में आ जाता है. ऐसा भी एक या दो बार नहीं, जाने कितनी बार हुआ है.

एक दिन सुबह छत पर खड़ी थी. मम्मा सड़क पर मोर्निंग वाक कर रही थी. तभी मेरे दिमाग में जाने क्यों ख़याल आया कि पड़ोस वाली आंटी मम्मा को अभी रास्ते में मिल सकती है और कुछ ही देर बाद ऐसा हुआ भी.

ऐसे कई तरह के अनुभव कई बार होते हैं, जिनमें से सब याद भी नहीं रहे और सबको शब्द दे पाना संभव भी नहीं. पर हम सब लोगों के जीवन में ये सब अवचेतन मन के द्वारा संचालित होते हैं. जो वास्तव में निपुणता हासिल कर लेते हैं वे चेतन अवस्था में भी ऐसे कम्युनिकेशन या पूर्वाभास कर सकते हैं.
 
वैज्ञानिक भी टेलीपैथी से जुड़ी कई सारी रिसर्च कर रहे हैं और आने वाले समय में संभव है किसी के भी दिमाग में कोई भी विचार आरोपित किया जा सकता है. लेकिन यहाँ यह देखना जरुरी है कि खुद महावीर ने ‘धारणा’ शब्द के माध्यम से इस बारे में यह कहा है कि कभी भी कोई बुरा विचार अपने मन में मत रखो क्योंकि आप कुछ बुरा करे ना करे लेकिन आपके आसपास कोई भी व्यक्ति आपके उस बुरे विचार को पकड़ सकता है और वह बुरा काम कर सकता है.
 
जानवरों में यह टेलीपैथी और अंतर्ज्ञान और भी ज्यादा विकसित होता है क्योंकि वे प्रकृति के निकट होते हैं. उनका जीवन सरल और कृत्रिमता से दूर होता है. उनकी हिंसा भी सिर्फ अपनी आत्मसुरक्षा और खाने तक सीमित होती है लेकिन हम मानवों का जीवन तो हर पल हिंसा ही हिंसा से भरा है फिर चाहे वह मन से हो, वचन से या कर्मों से.
 
निष्कर्ष सिर्फ इतना ही है कि जितना हम प्रकृति, सरलता, अहिंसा, मानवीयता, सजगता, ध्यान आदि से दूर रहेंगे हम जीवन के रहस्यों से उतने ही अनभिज्ञ रहेंगे. आत्मा-परमात्मा की बातें बेमानी नहीं है. बस जरुरी है इनके नाम पर व्यापार करने वाले लोगों से दूर रहने की. और वास्तविक धर्म सिर्फ और सिर्फ भीतर से जुड़ा है. बाहर की सारी चीजें कर्म या कांड हैं.