Thursday, December 1, 2016

Poem on Books in Hindi

किताब पर कविता, पुस्तक शायरी. Poem on Books are Our Best Friends in Hindi for Kids. Importance of Kitab, Pustak Kavita, World Book Day Poetry, Nursery Rhymes.
Poem on Books in Hindi
मैं किताब

दुःख की संगी
सुख की साथी
सब प्रश्नों का
हल मैं लाती।

अकेलेपन में
साथ निभाती
सबसे अच्छी
दोस्त कहलाती।

बन गीता मैं
धर्म सिखाती
रामायण बन
सत्य दिखाती।

सरस्वती का
वर बन जाती
जब भी कोई
समस्या आती।

दीपक बन मैं
राह दिखाती
अज्ञान तिमिर को
दूर भगाती।

पढ़ता मुझ को
जो भलीभांति
उन सबका मैं
ज्ञान बढ़ाती।

By Monika Jain ‘पंछी’

To read the english version of this poem about books click here.

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Wednesday, November 30, 2016

Thoughtful Quotes in Hindi

विचारणीय बातें, विचारशील उद्धरण, विचार. Thoughtful Quotes in Hindi. Thoughts of the Day, Thought Provoking Status, Sms, Messages, Sayings, Lines, Words.
Thoughtful Quotes in Hindi
Thoughtful Quotes
  • बात आज की नहीं है, सदियों से यही हो रहा है। स्त्री का मुंह बंद करवाना हो, उससे बदला लेना हो, उसके प्रति अपनी नफ़रत उगलनी हो...तथाकथित पुरुषों के पास कुछ गिने-चुने तरीके होते हैं : उसका बलात्कार कर दो, उसे बदनाम करने की धमकी दे दो या उसके चरित्र की बखिया उधेड़ डालो। लेकिन प्यारे तथाकथित पुरुषों! Who the hell you are to define our character? तुम्हारा दिया चरित्र प्रमाण पत्र अपने पास रखो और कागज़ पर बनाया हो तो रद्दी में बेचकर थोड़े छुट्टे इकट्ठे कर लो। इससे ज्यादा तो कोई कीमत नहीं ही है उसकी। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • दुनिया में सबके अपने-अपने युग हैं। कहीं किसी कोने में कोई नरभक्षी बना बैठा है तो कहीं कोई ऐसा भी है जिसका जीवन किसी के भी भक्षण का मोहताज ही नहीं। किसी के आठों प्रहर सावद्य भाषा के प्रयोग में गुजरते हैं तो कोई निरवद्य भाषा की अंतिम परिणीती मौन तक पहुँच चुका है। कोई मन में न जाने कितनी नृशंस हत्यायों की योजनाएँ बनाता है तो कोई कहीं मन से ही मुक्त हो चुका है। दुनिया में सबके अपने-अपने युग हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • अंधसमर्थक या अंधविरोधी भक्त नहीं होते। भक्ति तो जागरूकता के एक विशेष स्तर पर घटित होती है। प्रेम का चरम है भक्ति। इसमें समर्थन या विरोध के लिए कोई स्थान है ही कहाँ? यह तो पूर्ण स्वीकार की अवस्था है। विरलों को मयस्सर है भक्त होना तो। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • जो बस विकल्प तलाशते हैं, वे प्रेम क्या कर पायेंगे? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • कुत्ते, गधे, गिरगिट...नाहक बदनाम हुए। तुम्हारी वासना, बर्बरता और महत्वकांक्षाओं की बलि चढ़े जानवरों की जमात में तो 'मनुष्य' शब्द गाली की तरह इस्तेमाल होना चाहिए। नहीं क्या? ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • पुरानी कंडीशनिंग से बाहर निकलना जितना जरुरी है, उतना ही जरुरी है नयी कंडीशनिंग से बचे रहना। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • आयाम बदलते ही सारे मायने बदल जाते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अभयदान से बड़ा दान और क्या हो सकता है? इसमें हम वहीँ देते हैं जो हमारा है या यूँ कहें कि जो खुद हम हैं। बाकी के सारे दान में हम वह देते हैं जो हमारा होता ही नहीं। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • अजीब इत्तेफाक है न...जो अपने धर्म, अल्लाह/ईश्वर और संप्रदाय के प्रति जितना कट्टर है, उसके मुंह से उतने ही ज्यादा फूल बरसते हैं। इनकी जुबान से निकले शब्द पढ़कर तो इनका अल्लाह/ईश्वर भी शर्म से पानी-पानी हो जाता होगा। जिनका धर्म उन्हें बोलने की तहजीब तक न सिखा पाया, उनसे और कोई उम्मीद बेमानी है। हाँ, ये अपने ही धर्म के सबसे बड़े दुश्मन जरुर है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • मृत्यु नहीं, मृत्यु का कारण शहीद बनाता है। ~ नेपोलियन बोनापार्ट / Napoleon Bonaparte 
  • जो व्यक्ति अपने बारे में नहीं सोचता, वह दरअसल सोचता ही नहीं है।~ ऑस्कर वाइल्ड / Oscar Wilde 
  • ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हम फ़ेंक देते यदि हमें इस बात की चिंता नहीं होती कि कोई और उन्हें उठा लेगा। ~ ऑस्कर वाइल्ड / Oscar Wilde 
  • हो सकता है मैं आपके विचारों से सहमत न हो पाऊं पर विचार प्रकट करने के आपके अधिकारों की रक्षा करूँगा। ~ वाल्तेयर / Voltaire 
  • किसी निर्दोष को दण्डित करने से बेहतर है, एक दोषी को बख्श देने का जोखिम उठाना। ~ वाल्तेयर / Voltaire 
  • औसत शिक्षक कहते हैं। अच्छे शिक्षक बताते हैं। बेहतरीन शिक्षक व्याख्यापित करते हैं। ~ William Arthur Ward / विलियम आर्थर वार्ड

Tuesday, November 29, 2016

Poem on Corruption in Hindi

भ्रष्टाचार पर कविता, भ्रष्टाचारी. Poem on Corruption in Hindi for Kids. Bhrashtachar Kavita, Corrupt Politicians Poetry, Politics Shayari, Slogans, Lines. 
 Poem on Corruption in Hindi
भ्रष्टाचारी

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी -
जिस थाली में खाना खाते, ये छेद उसी में करते है
लात गरीब के पेट पे मार, घर अपना ये भरते है।

इस देश की है बीमारी, ये धनवान भिखारी -
ले हाथ कटोरा घर घर जाते, मौसम जो चुनावों का आता
अल्लाह के नाम पे दे-दे वोट, गाना इनको बस एक ही आता।

इस देश की है बीमारी, ये मूल्यों के व्यापारी -
नीलाम देश को कर दे ये, जो इनका बस चल जाये
भारत माँ को कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाये।

इस देश की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी -
खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाये
जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाये।

इस देश की है बीमारी, देखो इनकी गद्दारी -
गाय का चारा खाते ये, कोयले की कालिख लगाते ये
धरती माँ का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये।

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी।

By Monika Jain 'पंछी'

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