Promise Day Poem in Hindi


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क्यों कुछ लोग….

कईयों के हिस्से आयी 
टूटे वादों की किरचों को देख
सोचती हूँ -

क्यों कुछ लोग बिन सोचे समझे 
अक्सर वादों पर वादे कर जाते हैं 
कैसे किसी के जीवन और सपनों को 
इतना हलके से ले पाते हैं.

वे क्यों नहीं समझ पाते,
हर एक वादे से जुड़ती है 
कुछ मासूम उम्मीदें 
ना जाने कितने ख़्वाब सजाती है 
हर रात ये मीठी नींदे.

पर इन नींदों को क्या पता, 
एक दिन ये कुछ ऐसे उड़ जानी है
इनकी बनायी ख़्वाबों की दुनिया 
मिट्टी के घरोंदों सी 
बस मिट्टी में मिल जानी है. 

तो क्यों कुछ लोग बिना सोचे समझे 
अक्सर वादों पर वादे कर जाते हैं 
कैसे किसी की सारी दुनिया 
फ़कत उदासी से भर जाते हैं.

वे क्यों नहीं समझ पाते,
टूटे वादों की किरचों से 
आती है विश्वास के दर्पण पर
ना जाने कितनी खरोंचें  
जिसका टूटा हो दिल, 
वो फिर से प्यार करने की 
भला कैसे सोचे ? 

By Monika Jain ‘पंछी’ 

People eager to make promises are often irresponsible. They are careless to think that a broken promise can break a person too. Dreams and expectations attached with a promise are fully shattered when a promise turns into a fake bubble. One should not make any empty promise that he/she is not going to keep. One should also expect less from others and trust more in himself/herself. And the most important thing, promises should not be made, they should only be fulfilled. 

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