Thursday, July 4, 2013

Article, Essay on Corruption in Hindi

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नेतागिरी का कॉलेज

चुनावों का मौसम था। हर रोज कुर्सी के लिए खड़े होने वालों का ताँता लगा रहता था। चेहरे नये-नये होते पर वोट माँगने का तरीका सभी का एक सा था। हाथ जोड़कर कोई गली में नया हैंडपंप लगाने की कहता तो कोई नयी सड़क बनवाने का आश्वासन देता, तो कोई कुछ और...

ये सब देखकर एक दिन मुझे बचपन के स्कूल की एक बात याद आई। एक बार हमारी अध्यापिका ने सभी बच्चों से प्रश्न पूछा था, ‘आप सभी बड़े होकर क्या बनोगे?’ कुछ ने इंजीनियर कहा, कुछ ने डॉक्टर कहा, कुछ ने टीचर आदि। पर एक बच्चे ने जवाब दिया, ‘मैं बड़ा होकर नेता बनूंगा।’ उस वक्त तो सारी क्लास हंस पड़ी थी पर आज मैं सोचती हूँ कितना समझदार बच्चा था वह।

पूरी जिंदगी कंप्यूटर के सामने बैठे-बैठे आँखे अन्दर धंस जाती है पर फिर भी हमारे इंजीनियर साहब नेताजी जितना पैसा नहीं कमा पाते। CA की पढ़ाई करते-करते ही सर के आधे बाल उड़ जाते है पर कोई भी CA नेताजी से प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकता। पहले जानवरों और फिर इंसान की चीड़-फाड़ करने वाले चिकित्सक संवेदना रहित हो जाते है...मरीजों से मनमाना धन वसूलते हैं पर हमारे नेताजी से पीछे ही रह जाते हैं। क्योंकि हमारे राजनेता तो बिना कोई डिग्री लिए, बिना कोई परीक्षा पास किये चारे और कोयले जैसी चीजों से भी करोड़ों रुपये कमा लेते हैं। धन्य है हमारे नेताजी!

निराशा के कुछ भाव मेरे चहरे पर उभरे क्योंकि नेता बनने के लिए या तो हत्या, घोटाला जैसे कुछ अपराध खाते में होने चाहिए या फिर पापा-मम्मी, दादा-दादी, परदादा-परदादी आदि में से कोई नेतागिरी में होना ही चाहिए। ऐसे में हम जैसे सामान्य इंसान तो नेता बनने के बारे में सोच भी नहीं सकते क्योंकि हमारे दादा-दादी ने तो कभी स्टेज पर खड़े होकर दो पंक्तियाँ तक नहीं बोली...नेता बनना तो दूर की बात है और हत्या खून का तो नाम सुनते ही हम थर-थर कांपने लगते है ऐसे में नेता बनना हम जैसे लोगों के लिए तो दिवा स्वप्न मात्र है।

काश! नेता बनने के लिए भी एक कॉलेज होता और पाठ्यक्रम कुछ इस तरह होते :

BP - Bachelor of Politics
MP - Master of Politics.

मैं सोचने लगी...कैसा होता नेतागिरी का कॉलेज?

कोर्स के नाम तो सोच लिए पर अध्यापक कौन होते? नेतागिरी नेताजी से ज्यादा अच्छी कोई नहीं पढ़ा सकता पर हमारे नेता तो कितने भी बूढ़े हो जाये सेवानिवृत्ति का नाम तक नहीं लेते ऐसे में भावी नेताओं की क्लासेज कौन लेगा? पर तभी ख़याल आया कि हमारे नेताजी ठाले ही तो बैठे रहते हैं। उद्घाटन और रिबन काटने के अलावा करते भी क्या हैं सो एक-एक पीरियड का समय तो निकाल ही लेंगे।

टीचर्स की समस्या भी दूर हो गयी पर विषय क्या-क्या होते और क्लासेज किस-किस की होती? मैं सोचती हूँ पहली क्लास होती ‘Indian Constitute and Law’ की जिसमे भारत का संविधान, कानून, नीति निर्देशक तत्त्व, मूल अधिकार, मूल कर्त्तव्य आदि के बारे में पढ़ाया जाता। अब कोई नेताजी तो ये क्लास लेने से रहे इसके लिए तो किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ही नियुक्त करना पड़ता। इसमें कोई दो राय नहीं कि इस कक्षा में उपस्थित होने वाले छात्रों की संख्या सबसे कम होती क्योंकि सुबह-सुबह अपनी नींद ख़राब करके हमारे देश के नौनिहाल इस थ्योरी क्लास को तो अटेंड करने से रहे। वही होता जो सब कॉलेजेज में होता है। परीक्षा के दिनों में इधर-उधर से नोट्स कबाड़ लेते और पर्चे के एक दिन पहले पढ़ लेते। चलो इसी बहाने फोटोस्टेट वाले भाईसाहब की अच्छी कमाई हो जाती है।

ये तो बात हुई पहली क्लास की। अब दूसरी क्लास मेरे ख्याल से होती ‘Divide and Rule’ की जिसमें फूट डालो-राज करो के नए-नए रचनात्मक तरीके सिखाए जाते और हमारे नेताजी तो इस विषय में पारंगत है ही पर फिर भी कभी कभी कोई गेस्ट लेक्चर लेने के लिए इंग्लैंड से किसी अधिकारी को बुला लिया जाता। आखिर Divide and Rule के दम पर ही 200 साल तक उन्होंने हम पर राज किया।

अगली क्लास होती ‘Demand and Supply of Votes’ की। इस क्लास में बताया जाता कैसे जनता को उनकी मांगें पूरी करने के दिलासे देकर और आरक्षण जैसी नयी-नयी मांगें पैदा करके वोट्स पाए जा सकते हैं और अगर इससे काम न चले तो कैसे दारु, पैसे आदि की पूर्ति करके वोट्स अपनी मुट्ठी में कैद किये जा सकते हैं।

और भी कई क्लासेज हो सकती है जैसे :

How To Fight In Parliament?
When To Transfer From One Party To Another?
How To Present Effective Speech Containing Big-Big Promises?
When To Use Other Sources Like : Rath Yatra etc.

पर अब जिस क्लास के बारे में मैं बताने जा रही हूँ वो सबसे रोचक क्लास होती और मुझे पूरा विश्वास है कि इस क्लास की उपस्थिति शत % होती और सबसे ज्यादा विद्वान शिक्षक भी इसी क्लास के लिए मिलते। कोई अनुमान? चलो, मैं ही बता देती हूँ। ये क्लास होती घोटाले की क्लास! मुस्कराहट आ गयी ना सबके चहरे पर।

चारा घोटाला, कोयला घोटाला, स्पेक्ट्रम घोटाला, जमीन घोटाला...और भी घोटाले के कौन-कौन से क्षेत्र हो सकते है और किस तरह भ्रष्टाचार को बखूबी अंजाम दिया जा सकता है इस विषय पर शोध और चिंतन इस क्लास का अहम् मुद्दा रहेगा।

घोटाले की क्लास के बारे में सोच ही रही थी तभी दरवाजे की घंटी बजी। दरवाजा खोला तो देखा एक और नेताजी हाथ जोड़कर वोट मांगने आये थे।

Monika Jain 'पंछी'
(04/2012)

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