Sunday, June 30, 2013

Poem on India in Hindi


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चीर कर अँधेरा अब उजालों में कदम बढ़ाना है
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना है। 

रोशन हो हर घर का आँगन 
कहीं न छाए मायूसी 
हर बच्चे बूढ़े के होठों पे 
छाए सच्ची ख़ुशी 

रोती आँखों के आंसू को भी अब मुस्काना है 
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना है। 

शिक्षित हो हर भारतवासी 
बेकारी बन न पाये फांसी 
भूखमरी और लाचारी से 
न छाए चहरों पे उदासी 

सोने की चिडियां हमको फिर से कहलाना है 
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना है। 

सत्ता के गलियारों में 
भ्रष्टाचार का हो विनाश 
सरहदों को पार कर 
आतंकवाद न आये पास 

दहशत गर्दों को भी अब शांतिदूत बनाना है 
कर रात को विदा अब नया सवेरा लाना है। 

Monika Jain 'पंछी'