Wednesday, April 3, 2013

Poem on Nature in Hindi


Short Poem on Beauty of Nature in Hindi Language, Inspiration from Nature Poetry, Shayari, Prakriti par Kavita, Prerna, Prernadayak, Prernadayi Kavita, प्रकृति पर हिंदी कविता, शायरी, प्रेरणा, प्रेरणादायक, प्रेरणादायी, प्रेरणात्मक कविता, सकारात्मक सोच, Positive Thinking, Sakaratmak Soch, Sms, Messages, Slogans

खयालों के समंदर में खोयी सोचती हूँ कभी-कभी 
क्यों रौशनी हर रात अंधेरे में समा जाती है ?
क्यों ओस की बूंदे भाप बनकर उड़ जाती है ?
जब लौटना ही है किनारों पे आकर
तो क्यों लहरे बार-बार थपेड़े खाती है?

सवालों के ज़वाब कुछ यूं भी मिलते हैं कभी-कभी

जो न होता अँधेरा तो रौशनी को कौन सराहता ?
जो न उड़ती ओस तो उसकी सुन्दरता कौन निहारता ?
जो न लौट कर आती लहरे किनारों पे फिर से
तो तूफानों में फँसा नाविक हौंसला कहाँ से पाता ?

Monika Jain 'पंछी'