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Poem on Women in Hindi


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किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
सरस्वती का रूप हो तुम
लक्ष्मी का स्वरुप हो तुम 
बढ़ जाये जब अत्याचारी
दुर्गा-काली का रूप हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
खुशियों का संसार हो तुम
प्रेम का आगार हो तुम
घर आँगन को रोशन करती
सूरज की दमकार हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.
संस्कारों की जान हो तुम
स्नेह,प्यार और त्याग की
इकलौती पहचान हो तुम.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा .
कभी कोमल फूल गुलाब सी
कभी शक्ति के अवतार सी
नारी तेरे रूप अनेक
तू ईश्वर के चमत्कार सी.
किन शब्दों में दूँ परिभाषा ?
नारी तुम हो सबकी आशा.

Monika Jain 'पंछी'

13 comments:

  1. नारी पर सशक्त रचना...बेहतरीन प्रस्तुति.....

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  2. बहुत ही बढ़िया


    सादर

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  3. bahut khoob...

    naari ka bahut hi sundar chitran kiya hai aapne

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  4. jaise bin grihni ghar bhoot ka dera thik waise hi bin aurat jag soona-soona ..
    agar aurat na ho to zindgi na ho..
    nari ne hi is jag ko paida kiya aur pala-posa..
    isiliye to ishwar ko bhi matritwa bhaw se hi dekha jata hai..
    behatarin kavita!!!!!!!!!!

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  5. बहुत ही बढ़िया ..........बेहतरीन प्रस्तुति.....

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  6. आपकी कविता अच्छी लगी । मेरे नए पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा। धन्यवाद ।

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  7. sorry par ye sab purane jamane me hi acha lgta tha...

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    1. oh really to tum hi kyon nahi naye zamane ki poem dedo

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  8. Purani parampara kintu vichsraniy saval hai

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  9. बहुत अच्छी है

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