Short Poems in Hindi



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गैरों के हाथों छूटे तो 
अपनों ने ग़ुलाम बना लिया
आज़ादी को तो बस एक 
भ्रम का नाम बना दिया
क्यों मनाये हर वर्ष 
आज़ादी का उत्सव
जब आज़ादी को ही कुछ लोगों ने 
ग़ुलाम बना दिया.

कल्पना के वायवी पंख लगाकर 
दूर सेर कर आई हूँ
अब कुछ ऐसी शक्ति दो 
ये पंख कभी न खो पाए
पलकों के नीचे जीवन के 
सपने संजोती आई हूँ
पर खुली आँखों में भी 
सपने कभी न सो पाए. 

 Monika Jain 'पंछी'


12 comments:

  1. sorry humare PC me speakers allowed nahi hai yahan office me....padhne me achhi lagi.

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  2. i wish ur dreams comes true live happy life

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  3. nice poem...but voice is not real,it's like a child voice.

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    1. voice is not real means ??? its my own voice and ya my voice is like a child.

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  4. सपने तो अपने होते हैं।

    बहुत अच्छी कविता।

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  5. खुली आँखों में भी सपने कभी न सो पाए
    बहुत खूब

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  6. कल्पना के पंख अपने हैं. खुली आँखें के सपने भी अपने हैं. सृजन की ऊँची उड़ान के लिए शुभकामनाएँ. आपकी आवाज़ में सुनी कविता बहुत अच्छी लगी. बहुत ख़ूब.

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  7. अब कुछ ऐसी शक्ति दो ये पंख कभी न खो पाए. पलकों के नीचे जीवन के सपने संजोती आई हूँ पर खुली आँखों में भी सपने कभी न सो पाए. positive thinking.

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  8. सुन्दर रचना ... पंख संजो के रखना तो सपने भी पूरे हो सकेंगे ...

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