Wednesday, August 21, 2013

Short Poems in Hindi



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गैरों के हाथों छूटे तो 
अपनों ने ग़ुलाम बना लिया
आज़ादी को तो बस एक 
भ्रम का नाम बना दिया
क्यों मनाये हर वर्ष 
आज़ादी का उत्सव
जब आज़ादी को ही कुछ लोगों ने 
ग़ुलाम बना दिया.

कल्पना के वायवी पंख लगाकर 
दूर सेर कर आई हूँ
अब कुछ ऐसी शक्ति दो 
ये पंख कभी न खो पाए
पलकों के नीचे जीवन के 
सपने संजोती आई हूँ
पर खुली आँखों में भी 
सपने कभी न सो पाए. 

 Monika Jain 'पंछी'