Thursday, July 28, 2016

Broad Mindedness Quotes in Hindi

व्यापक विस्तृत सोच, संकीर्ण मानसिकता. Broad Mindedness Quotes in Hindi. Open Close Minded Quotations, Comprehensive Mind Thinking Sms, Narrow Mentality Messages.
Broad Mindedness Quotes in Hindi
Broad Mindedness Quotes

  • जब लिख रही होती हूँ तब अक्सर 'मैं' और 'तुम' सब मिक्स हो रहे होते हैं। याद नहीं रहता कौन मैं है और कौन तुम...पर जब पाठक उन्हें अलग-अलग करके देखने लगते हैं (जो स्वाभाविक है शायद), तब कभी-कभी असहज हो जाती हूँ। पर एक लेखक के लिए इस असहजता से मुक्ति जरुरी है। 
  • प्रकट हो या अप्रकट यह जातीय मानसिकता हर दूसरे व्यक्ति में पायी जाती है जिसके पीछे विलुप्त हो जाते हैं इंसान को इंसान बनाने वाले गुण।  
  • ख़ुशी होती है जब संकीर्णता कम होती दिखती है। पर कभी-कभी इस ख़ुशी पर तेज तमाचा भी पड़ता है, जब पता चलता है कि संकीर्णता खत्म नहीं हो रही, बस उसने आधुनिकता और दिखावे का नया लबादा ओढ़ लिया है। गहराई में जाने पर आधुनिक-खुले विचारों का खोखलापन कहीं-कहीं साफ़ नज़र आ जाता है। बहुत जरुरी है, इस खोखलेपन का भरा जाना।  
  • कई लोग गर्व से कहते है कि वे विस्तृत सोच वाले हैं, पर एक कटु सत्य यह है कि इन ज्यादातर विस्तृत सोच वाले लोगों के दिमाग में विस्तृत सोच की संकीर्ण परिभाषा होती है।  
  • मेरी भाषा-तुम्हारी भाषा, मेरा धर्म-तुम्हारा धर्म, मेरी जाति-तुम्हारी जाति, मेरा देश-तुम्हारा देश.....यह सब संकीर्ण विचारों की पहचान है। विस्तृत सोच वाले व्यक्ति सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को अपना घर मानते है। 
  • काश! संकीर्णता आस्तिकता या नास्तिकता की मोहताज होती। साधुओं के वेश में छिपे असाधुओं के पाखंडों की चर्चा बहुत की है, आगे किसी और दिन फिर कर लेंगे। आज बस आपकी बात करते हैं। आप बस इतना बताईये कि किसी भी साधु-सन्यासी (जिससे आप परिचित तक नहीं) की किसी स्त्री की ओर देखते हुए...या कुछ अन्य जेस्चर दिखाते हुए और उनकी खिल्ली उड़ाते शब्दों के साथ पिक्स शेयर करते हुए आप किस मानसिकता का परिचय दे रहे होते हैं?
    एक पिक्चर मात्र ( जिसमें कोई जेस्चर क्लिक करते समय अनजाने में किसी भी वजह से बन सकता है। जिसे आप अपनी मर्जी से कहीं भी प्रोजेक्ट कर देते हैं। ) से आप किसी के भी चरित्र का सम्पूर्ण बखान कर सकते हैं? और क्या किसी की साधुता या ब्रह्मचर्य की परिभाषा आप इससे करते हैं कि वह किसी स्त्री को देख भी नहीं सकता...छू भी नहीं सकता...बात भी नहीं कर सकता?
  • श्रेणियां मात्र सुविधा के लिए होती है...लेकिन जो लोग खुद को श्रेणियों में घनघोर रूप से विभाजित करते लगते हैं, वे सभी बस अपने ही प्रतिबिम्बों के विरुद्ध खड़े होने लगते हैं।  
  • अहंकार इतने सूक्ष्म छिद्रों से हमारे भीतर प्रवेश कर जाता है कि हमें खुद पता नहीं चलता। यहाँ तक कि अहंकार न होने का अहंकार भी निर्मित हो सकता है। कभी-कभी हमें पता भी होता है पर हम इग्नोर कर जाते हैं। वस्तुत: हमारे होने का कारण अहंकार ही है। हाँ, जहाँ भी जरा सा अतिरेक होता है, यह दूसरों को स्पष्ट नज़र आने लगता है। लेकिन मिथ्यादृष्टि से सम्यकदृष्टि की इस यात्रा में इतने असंख्य स्थान हैं कि हम अहंकारी-निरहंकारी, सज्जन-दुर्जन, अच्छा-बुरा जैसे वर्गों में विभाजन कुछ समझने-समझाने की दृष्टि से तो कर सकते हैं (क्योंकि भाषा के पास और कोई तरीका नहीं) लेकिन किसी के बारे में निष्कर्ष बनाने की इस दृष्टि से हमें जितना संभव हो बचना चाहिए।
 
By Monika Jain 'पंछी'


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