Friday, August 23, 2013

Poem on Girl in Hindi



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माँ !
क्या हुआ जो मैं लड़की हूँ 
क्या मैं तेरा अंश नहीं 
क्यों मुझसे तेरा वंश नहीं ?

सोच के लड़की हूँ मैं माँ!
क्यों तू इतना घबराती है 
कौन सा ऐसा काम है जिसमें 
लड़की लड़कों से मात खाती है ?

मैं भी पढ़ लिखकर एक दिन 
 पैरों पे खड़ी हो जाउंगी 
नाम करुँगी तेरा रौशन 
सम्मान तेरा मैं बढ़ाऊँगी। 

तेरी जिम्मेदारी अपने 
कन्धों पर मैं उठाऊँगी 
नहीं हूँ बेटा पर तेरे 
सुख-दुःख में साथ निभाऊँगी।  

माँ !
मुझसे ही तो चलती है 
ये सृष्टि और ये दुनिया 
फिर क्यूँ मुझको कमतर समझे 
ओ मेरी प्यारी मैया !


Monika Jain 'पंछी'