Poem on Girl in Hindi



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माँ !
क्या हुआ जो मैं लड़की हूँ 
क्या मैं तेरा अंश नहीं 
क्यों मुझसे तेरा वंश नहीं ?

सोच के लड़की हूँ मैं माँ!
क्यों तू इतना घबराती है 
कौन सा ऐसा काम है जिसमें 
लड़की लड़कों से मात खाती है ?

मैं भी पढ़ लिखकर एक दिन 
 पैरों पे खड़ी हो जाउंगी 
नाम करुँगी तेरा रौशन 
सम्मान तेरा मैं बढ़ाऊँगी। 

तेरी जिम्मेदारी अपने 
कन्धों पर मैं उठाऊँगी 
नहीं हूँ बेटा पर तेरे 
सुख-दुःख में साथ निभाऊँगी।  

माँ !
मुझसे ही तो चलती है 
ये सृष्टि और ये दुनिया 
फिर क्यूँ मुझको कमतर समझे 
ओ मेरी प्यारी मैया !


Monika Jain 'पंछी'

10 टिप्‍पणियां:

  1. सोयी आँखों की जागृत भाषा,
    खामोश जुब़ा की भाषा अनकही हूँ मैं,
    really great combination of words

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  2. पूरी कविता ही पहेली सी लग रही है तो रचयिता की बात तो खैर ..... :)

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  3. Last lines are especially awesome!Riddlle is being solved slowlly but steadily..keep going poetic!

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  4. Bahut sundar, you reminded me of good old days. What a beautiful poem!

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  5. very nice & sweet ,,,,,,meaning full poem.......i like very much please send me all poems related with girls .

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  6. जो व्यक्ति गर्भ में
    बेटियों की हत्या करते हैं उनके
    लिए यह बात है. हमेशा याद
    रखना : अगर बेटा वारिस है, तो बेटी पारस है |
    अगर बेटा वंश है, तो बेटी अंश है |
    अगर बेटा आन है, तो बेटी शान है |
    अगर बेटा तन है, तो बेटी मन है |
    अगर बेटा मान है, तो बेटी गुमान है |
    अगर बेटा संस्कार, तो बेटी संस्कृति है |
    अगर बेटा आग है, तो बेटी बाग़ है |
    अगर बेटा दवा है, तो बेटी दुआ है |
    अगर बेटा भाग्य है, तो बेटी विधाता है |
    अगर बेटा शब्द है, तो बेटी अर्थ है |
    अगर बेटा गीत है, तो बेटी संगीत है |
    " SAVE GIRL CHILD " ,,,,,,,,,,,,,,

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  7. एक चीख रात को चीर के माँ के हिरदय तक आई
    और एक नन्ही सी आवाज़ सुन के माँ तो बहुत रोई
    माँ मुझे मत मरो, मत मरो नन्ही सी जान को
    जनम से पहेले ही मत मरो इस अनजान को

    बस माँ ही सुन सकती थी उसकी करुण पुकार
    करना तो बहुत कुछ चाहती थी पर वो थी लाचार
    आखिर वो किया कर सकती थी वो डरी सहमी थी औरत
    न तो उसमे इतनी हिम्मत थी की वोह करती बग़ावत

    तो उसने भर कर आंखों में आंसू का मोती कहा
    तेरी अच्छी किस्मत है जो तू जनम नहीं लेती
    जनम लेकर भी आखिर तू किया करेगी
    इस दुनिया में औरत का कोई सामान नहीं

    किया करेगी यहाँ आकर, जहाँ तेरे लिए कोई प्यार नहीं
    तू ही है जो सारा जीवन दोहेरी भूमिका निबह्न्येगी
    सबकी सेवा करेघी तू, पर सामान नहीं पायेगी
    अरे मेरी नन्ही जान, जनम न लेने में ही है तेरी भलाई

    और यह कह कर माँ की वेदना और गहराई
    पर बेबुस आवाज़ आई, मुझे बस एक मौका दे दो
    मुझे एक बार दुनिया में तो आने दो
    में अपना ही इन्देर्दानुस बनाउंगी

    चलो, चलो माँ एक नरक से कहीं दूर चलते है
    तुम्हे यह समझना होगा की नारी से ही वंश चलते है
    हाँ तुम ठीक कहेती हो, और माँ एक हॉस्पिटल में पहुंची
    जहाँ नीतू का जनम हुआ और जीत हुई नारी की

    समय बदला, समाज बदला बदला गयी दुनिया सारी
    समझ गया अब संसार सारा अभी नारी नहीं अबला बेचारी.

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