Tuesday, September 22, 2015

Poem on Humanity in Hindi

 
Poem on Humanity in Hindi. Manushyata Shayari, Human Rights Quotes, Manavta par Kavita, Insaniyat Slogans, Human Values Poetry, Humanism, Being Human Rhyme. मानवता पर कविता, मनुष्यता शायरी, इंसानियत.

जरुरत है तो बस एक इंसान की
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
गूँज रही चीखों और चीत्कारों को जो सुन पाये
टूट रहे सपनों के टुकड़ों को जो चुन पाये
अंधियारी राहों में खोयी आशाएं जो बुन पाये
ऐसे दयावान की. 
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
कदम-कदम पे सरहद की दीवारों को जो फोड़ सके
जाति, धर्म, समाज की दरारों को जो जोड़ सके
जंग लगे दिल के दरवाजों के ताले जो तोड़ सके
ऐसे ऊर्जावान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
इक प्यासे की प्यास बुझाने को जो पानी बन जाये
डूबे सपने पार लगाने को जो कश्ती बन आये
निर्बल का मान बचाने को बन रक्षक जो तन जाये
ऐसे दिल के धनवान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
नफरत, शोषण, लालच, हिंसा का तांडव जो रोक सके
आतंकवादी राहों पे चलते क़दमों को टोक सके
दहशतगर्दों की दहशत को बन लाठी जो ठोक सके
ऐसे शक्तिमान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.
 
निज़ी स्वार्थ की सीमाओं से परे जो सोच सके
खून से लथपथ मानवता के दामन को पौंछ सके
जिससे बिखरी खुशियों को भर सारी दुनिया नाच सके
ऐसे करुणानिधान की.
 
ना मजहब की ना भगवान की
जरुरत है तो बस एक इंसान की.

By Monika Jain 'पंछी'
 
How is this poem about humanity?