Wednesday, October 7, 2015

Poem on Poverty in Hindi

 
Poem on Poverty a Curse in Hindi. Garib par Kavita, Garibi Shayari, Poor People Slogans, Hunger Quotes, Stomach Poetry, Starvation Rhymes, Pet ki Bhookh Lines, Sms. गरीब पर कविता, गरीबी शायरी, भूख.
 
पेट भर सकने का सपना
 
निकलता है घर से पेट भर सकने की चाह में वह 
अनिश्चितता के मकड़जाल में बुनता रहता है सपना वह.
 
कभी सपना उसका पार पा जाता है
और पेट भर सकने जितना वो कमा पाता है
कभी भूखे पेट ही संग उसके 
उसका सपना भी सो जाता है.
 
हर बार उसके दिल में जगायी उम्मीदें 
नेता के भाषण, वादों, जीत और कुछ भी न बदलने के चक्र में
दम तोड़ती नज़र आती है
पदलोलुपता, महत्वाकांक्षा और भ्रष्टाचार के शासन तले
लात हर बार उसके पेट पर ही मारी जाती है.
 
नहीं समझ पाता वो
बढती महंगाई में भी, शेयरों के भाव क्यों गिरते हैं?
उसके जीवन में जब कुछ भी नहीं बदलता
तो हर रोज ये नेता क्यों बदलते हैं?
 
आटे, दाल, आलू, प्याज के भावों पे नज़र डाल
कोसता है अपने भाग्य को वह मिट्टी का लाल.
 
सूरज की किरणे जब सकपकाती सी 
घुस आती है कोठरी में उसकी
तो निकल पड़ता है फिर से वह
उसी अनिश्चितता की राह में
पेट भर सकने का सपना लिए.

By Monika Jain 'पंछी'

How is this poem about poverty?