Poem on Dreams in Hindi, My Desire



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शब्दों को नहीं आँखों को पढ़ना चाहती हूँ
लब्ज़ों को नहीं ख़ामोशी सुनना चाहती हूँ
हर कोई खुली क़िताब नहीं होता
मैं तो बंद क़िताबें पढ़ना चाहती हूँ.
ख़ामोश सवालों को पढ़ना चाहती हूँ
अनकहे ख़यालों को सुनना चाहती हूँ
सच होते हुए सपनों को नहीं
मैं तो अधूरे ख्वाबों को पढ़ना चाहती हूँ.
चेहरे की सच्चाई पढ़ना चाहती हूँ
बातों की गहराई सुनना चाहती हूँ
हर किसी का दिल पाक़ नहीं होता
मैं तो नापाक दिलों के इरादें पढ़ना चाहती हूँ.
दबी हुई आवाज़ सुनना चाहती हूँ
रोके गये आगाज़ सुनना चाहती हूँ
थिरकते कदमों की ताल नहीं
मैं तो तड़पते दिलों का हाल सुनना चाहती हूँ.

- Monika Jain 'पंछी' 

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