Wednesday, March 11, 2015

Sad Poem in Hindi


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अश्कों से मैं रो न सकी

दर्द ए दिल का हाल
ज़ुबा से बयां मैं कर न सकी
दिल में बहुत रोई 
पर अश्कों से मैं रो न सकी.

भीगा है मन मेरा
पर सूनी है ये निगाहें 
सिसक सिसकती रूह मेरी
कुछ भी ना कह पाए.

इस गम को ज़ज्ब किया मैंने
पर लफ्ज़ों से कुछ कह न सकी
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी.

ख़्वाब ना जाने कितने 
मिट्टी में मिलकर चूर हुए 
ख़ुशियों के दरवाजे सारे 
रूठ के यूँ मगरूर हुए.

टूटा ख़्वाब चुभा था मगर 
आह भर ना सकी 
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी.

अपना मैंने जिसे भी माना 
बन गया वह बेगाना
वादों के महल हैं बिखरे पड़े 
बस सीखा ना किसी ने निभाना.

वादों से यादें जख्मी हुई 
उफ़ कर ना सकी 
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी.

मुस्कुराते होठों में भी 
गम का एक साया है
ख़ामोश ज़ुबा का दर्द
क्या कोई समझ पाया है?

कोई सुन ले मेरी ख़ामोशी
पर शब्दों से मैं कह न सकी
दिल में बहुत रोई
पर अश्कों से मैं रो न सकी.

By Monika Jain 'पंछी'

Smiles are not always the symbol of happiness or joy. Sometimes Its just a trick to hide the immense pain of a broken heart. Tears are dried but deep inside someone is very sad and his heart is crying loud without making any noise. The above poem is just a try to reflect the pain of such hearts. In reality words can’t describe these painful silent screams. Its the limit of a language that cannot communicate the extreme emotions of a person.