Poem on Birds in Hindi


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मैं जब छोटी गुड़िया थी
अंगना में आती चिड़िया थी.
चुग्गा चुगने जब वो आती
उसे देखकर मैं मुस्काती.
फुदक-फुदक वह गाना गाती
मैं उसको वह मुझे नचाती.
अब जब मैं हो गयी सयानी
क्यों नहीं आती चिड़िया रानी?
सूना हो गया अंगना आज
ना देती चिड़िया आवाज़.
कहाँ गयी हो चिड़िया रानी 
चुग लो दाना, पी लो पानी.
चिड़िया के रैन बसेरों को
मानव ने काटा पेड़ों को.
घर ना छीनो चिड़िया का
बचपन ना छीनो गुड़िया का.
फिर से तुम कुछ पेड़ लगा दो
मेरी चिड़िया मुझको ला दो.

Monika Jain 'पंछी' 

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