Poem on Butterfly in Hindi


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कल घर में एक तितली आई
उसे देखकर मैं मुस्काई.
मैंने बोला तितली रानी
शरबत लोगी या फिर पानी
वो बोली कोई फूल खिला दो
मुस्कान मेरे चेहरे पर ला दो.
फूलों का मैं गमला लायी
जिसे देख तितली हर्षायी.
मैंने पूछा तितली से
इतने रंग लायी हो कैसे
मुझको भी उड़ना सिखलादो
रंग मुझे भी कुछ दिलवादो.
तितली मेरे पास में आई
कलम पे मेरी वो मंडराई.
कलम तुम्हारी उड़ान भरेगी
इस जग का हर रंग लिखेगी
पंख और रंग दोनों है इसमें
तभी तो मुझको लिखा है इसने.
बात मेरी जब समझ में आई
कलम पे मेरी मैं इतराई. 

Monika Jain 'पंछी' 

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