Monday, December 24, 2012

Poem on Corruption in Hindi


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इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी.
जिस थाली में खाना खाते, ये छेद उसी में करते है
लात गरीब के पेट पे मार, घर अपना ये भरते है.
इस देश की है बीमारी, ये धनवान भिखारी.
ले हाथ कटोरा घर घर जाते, मौसम जो चुनावों का आता
अल्लाह के नाम पे दे-दे वोट, गाना इनको बस एक ही आता.
इस देश की है बीमारी, ये मूल्यों के व्यापारी.
नीलाम देश को कर दे ये, जो इनका बस चल जाये
भारत माँ को कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाये.
इस देश की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी.
खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाये
जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाये.
इस देश की है बीमारी, देखो इनकी गद्दारी.
गाय का चारा खाते ये, कोयले की कालिख लगाते ये
धरती माँ का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये.
इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी.

Monika Jain 'पंछी' 

16 comments:

  1. gud poetry,,, keep it up n very all d best for ur bright future

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  2. very suprb poem.

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  3. wow...........such a superb poetry.

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  4. great poem as u write they r just like.........i also think what u think...............bt now nt to worry bcoz modi iz there...........:)

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  5. heart touching poem

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  6. vry gud .....keep it up

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  7. very nice poem........I love it��

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  8. superb.............................poem

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  9. You have a bright future in poetry.good luck.:-)

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  10. superb it was a very good and helpful poem

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  11. very nice i like it

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  12. na jane kab thamegi ye bimara,
    akhir kab rukegi ye bimari,
    aesa sawal khada hai bhari,
    jab khatm honge ye bhrashtachari,
    tab shayad ruegi ye bimari
    tab shayad rukegi ye bimari...........@neh@

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