Poem on Corruption in Hindi


Poem on Corruption in Hindi, Bhrashtachar par Kavita, भ्रष्टाचार पर कविता, राजनीति पर कविता, Indian Politics Poetry, Politicians Poems, भ्रष्टाचारी शायरी, Rajneeti Shayari, Slogans

इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी.
जिस थाली में खाना खाते, ये छेद उसी में करते है
लात गरीब के पेट पे मार, घर अपना ये भरते है.
इस देश की है बीमारी, ये धनवान भिखारी.
ले हाथ कटोरा घर घर जाते, मौसम जो चुनावों का आता
अल्लाह के नाम पे दे-दे वोट, गाना इनको बस एक ही आता.
इस देश की है बीमारी, ये मूल्यों के व्यापारी.
नीलाम देश को कर दे ये, जो इनका बस चल जाये
भारत माँ को कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाये.
इस देश की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी.
खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाये
जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाये.
इस देश की है बीमारी, देखो इनकी गद्दारी.
गाय का चारा खाते ये, कोयले की कालिख लगाते ये
धरती माँ का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये.
इस देश की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी.

Monika Jain 'पंछी' 

12 टिप्‍पणियां:

  1. gud poetry,,, keep it up n very all d best for ur bright future

    उत्तर देंहटाएं
  2. wow...........such a superb poetry.

    उत्तर देंहटाएं
  3. great poem as u write they r just like.........i also think what u think...............bt now nt to worry bcoz modi iz there...........:)

    उत्तर देंहटाएं
  4. very nice poem........I love it��

    उत्तर देंहटाएं
  5. superb.............................poem

    उत्तर देंहटाएं
  6. You have a bright future in poetry.good luck.:-)

    उत्तर देंहटाएं

Due to comment moderation It will take time to publish your comments.Your reactions are my inspiration :)