Poem on Politics in Hindi


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राजनीति की रैली
हो गयी कितनी मैली
सत्ता हथियाने की सबकी
हो गयी एक ही शैली.
जातिवाद को देकर आग
आरक्षण का गाकर राग
वोट-वोट करते ये नेता
मानवता पर हैं एक दाग.
चालो से भरमाते हमको
नारो में उलझाते हमको
योजनाओं के कागज रंग कर
वादो से बहलाते हमको.
रंग बदलने में हैं निपुण
रंगबाजी है इनका गुण
बस, देश लूटते ये नेता
पाप को भी कहते हैं पुण्य.
फूट डाल कर करते राज
फिर भी कहते खुद को अच्छा
कहाँ गयी है इनकी लाज?

Monika Jain 'पंछी' 

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