Personality Development Tips in Hindi



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अक्सर कुछ लोग अपनी ज़िंदगी से नाख़ुश होते हैं.उन्हें अपने भाग्य, अपनी किस्मत से शिकायत रहती है जैसे “मैं जो भी चाहता हूँ मुझे कभी नहीं मिलता, मेरा भाग्य मेरा साथ कभी नहीं देता या हर कार्य में मुझे असफलता मिलती है”. ऐसे लोग निराशा से घिर जाते हैं और हमेशा उदास और तनावग्रस्त रहते हैं.

कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने आसपास के लोगों, अपने दोस्तों और अपने रिश्तों से शिकायत रहती है जैसे “सभी मुझे इग्नोर करते हैं, मेरा मजाक बनाते हैं या मुझे कोई नहीं चाहता, कोई मदद नहीं करता.” ये लोग धीरे धीरे दुनिया से कटने लगते हैं. एकाकीपन और अवसाद के शिकार भी हो सकते हैं.

कुछ व्यक्तियों के लिए खुद से जुड़ा निर्णय लेना बहुत मुश्किल होता है जैसे “मुझे कौनसा कोर्स करना चाहिए, करियर का निर्माण किस क्षेत्र में करना चाहिए, किस क्षेत्र में मुझे सफलता मिल सकती है.” ऐसे लोग अपना लक्ष्य निर्धारित नहीं कर पाते और अपने जीवन से जुड़े निर्णयों में हमेशा खुद को दौराहे पर पाते हैं. असमंझस की वज़ह से कई बार गलत निर्णय कर लेते हैं जिसका परिणाम सिर्फ पछतावा रह जाता हैं.

ऐसी सभी परेशानियों और समस्यायों से निज़ात पाने के लिए सबसे ज्यादा जरुरी है कि आप सबसे पहले अपने दोस्त बने और अपने साथ समय बितायें . अक्सर ज़िंदगी कि भाग दौड़ में हमारे पास खुद के लिए जरा भी वक्त नहीं होता. हमारे साथ जो भी होता है हम बस उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे देते हैं और ये नहीं सोचते कि ये क्यों हो रहा है?

हम सभी को चाहिए कि हम रोज कुछ समय सिर्फ अपने साथ बितायें . खुद से बाते करें. हमें क्या अच्छा लगता हैं , क्या बुरा लगता है, किन कार्यों से ख़ुशी मिलती है और किनसे नहीं….ये सोचे. अपने हर कार्य, अपने व्यवहार, अपने मूड, अपनी प्रतिक्रियाओं और अपने प्रत्युत्तर का निरीक्षण कीजिये.

आपकी प्रतिक्रियायें आपको कैसे प्रभावित करती हैं, आप दूसरो से कैसे इंटरेक्ट करते हैं, आपका वातावरण आपको कैसे प्रभावित करता है… इस पर गौर करें. दिन भर आपने क्या किया, किन लोगों से मिले, क्या बात की….इस पर भी ध्यान दीजिये.

किन लोगों का साथ आपको अच्छा लगता हैं और किनके साथ आप असहज महसूस करते है. आपकी कौनसी बात दूसरो की तारीफ पाती है और कौनसी बात आलोचना…. इसका भी निरीक्षण कीजिये.

अपने व्यवहार, अपनी भाषा, अपने रहन सहन, अपने व्यक्तित्व सभी का पूरी ईमानदारी से निरीक्षण कीजिये. अपने आलोचक बनिये और अपने प्रशंसक भी…पर पूरी ईमानदारी के साथ.

इस विश्लेषण और निरीक्षण का ये फायदा होगा की अब आप अपनी खूबियों और अपनी कमियों से अच्छे से वाकिफ़ हो जायेंगे. अपनी खूबियों को तराशिये और अपनी कमियों को दूर करने का प्रयास करिए फिर देखिये आपके व्यक्तित्व, आपकी भाषा, रहन सहन और आपके व्यवहार में कैसा निखार आता हैं. स्वतः ही आप लोगों का ध्यान बटोरने लगेंगे और उन सभी की नज़रों में खास बन जायेंगे.

जहाँ बात आपकी नौकरी या करियर से जुड़े निर्णयों की हो तो उसके लिए जरुरी हैं आप अपनी पसंद, नापसंद, अपनी स्ट्रेंथ और अपनी कमजोरियों को पहचाने. आप किस क्षेत्र में माहिर हैं, क्या करके आपको ख़ुशी मिलती हैं, आपके कौनसे कार्य की हर जगह तारीफ होती है और किस कार्य को करते समय आप पूरे आत्मविश्वास से भरे होते हैं , ये सब जानना बहुत जरुरी हैं.

जब आप खुद को पहचानने लगेंगे तो आपके लिए लक्ष्य का निर्धारण आसान हो जायेगा. आपसे जुड़े निर्णय करते समय आपको दुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा. समय की बर्बादी से भी बचेंगे और गलत निर्णयों से भी. आप अपने भाग्य के निर्माता बनेंगे. अपने रिश्तों और अपने दोस्तों का चुनाव कर पाएंगे और रिश्तों में मधुरता आएगी. सही दिशा में सही कदम उठाकर अपने सभी सपनों को साकार कर पाएंगे और जीवन के हर क्षेत्र में सफलता आपके कदम चूमेगी.

- Monika Jain 'पंछी'


2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अच्छी पोस्ट हैं. मोनिका जी .
    पढ़कर बहुत ही अच्छा लगा.

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  2. क्या लिखा है आपने, ऐसे हिंदी आर्टिकल्स की जरुरत है हमें.

    उत्तर देंहटाएं

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