Saturday, April 6, 2013

Essay on Hindi, English and Hinglish Language


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कई बार Facebook पर हिंदी को roman letters में लिखने को लेकर कुछ हिंदी प्रेमियों ने मुझे टोका और सलाह दी कि मैं google transliteration या hindi fonts की help से हिंदी देवनागरी में लिख सकती हूँ . उनके अनुसार हिंदी को रोमन में लिखना या hinglish का उपयोग करना हिंदी का अपमान है. ऐसे सभी हिंदी प्रेमियों की भावनाओं का मैं सम्मान करती हूँ . मुझे खुद भी हिंदी सबसे अच्छी भाषा लगती है. पर जहाँ तक बात google transliteration की है तो वहां भी देवनागरी में लिखने के लिए सबसे पहले आपको रोमन में ही लिखना पड़ेगा. 

भारत में हम सब के जो नाम रखे जाते हैं वे सब ज्यादातर हिंदी भाषा के शब्द ही होते हैं जैसे : आकाश, रवि, अरविन्द, कुशल, आरती आदि. पर ऐसी कई जगह हैं जहाँ पर हमें अपने नाम को रोमन में लिखना पड़ता है : Aakash, Ravi, Aarti, Kaishav etc. जो हिंदी प्रेमी हिंदी को रोमन में लिखना गलत मानते है वे खुद भी अपने नाम रोमन में लिखते हैं और नाम ही क्या कई शब्द कई जगह हमें रोमन में लिखने पड़ते हैं . रही बात hinglish के उपयोग की तो इसके लिए नयी पीढ़ी को जिम्मेदार मानना बिलकुल गलत है. गलती उन लोगों की है जिन्होंने आज़ादी के समय अंग्रेजों को तो भारत से बाहर निकाल दिया पर अंग्रेजी को नहीं निकाल पाए. 

सामान्य बोलचाल की तो छोड़िये हमारे देश की पूरी शासन व्यवस्था, संविधान, न्यायपालिका सब कुछ hinglish या english भाषा के साथ ही चलायी जा रही है. Higher Education पूरी तरह english based है. ऐसे मैं रोमन और देवनागरी के उपयोग जैसी छोटी छोटी बातों को महत्त्व देना कहाँ तक उचित है ? English अब भारत में इस कदर रच बस गयी हैं कि उसे बाहर निकलना अब संभव नहीं है और Globalization के इस दौर में ऐसा करना उचित भी नहीं. अगर कुछ जरुरी है तो वह है हिंदी के अस्तित्व की रक्षा करना लेकिन हिंदी के कई ऐसे शब्द है जिन्हें आज की पीढ़ी नहीं समझती. शुद्ध हिंदी भाषा में ज्यादातर लोग रूचि नहीं लेते. क्योंकि वह समझने और बोलने में कठिन होती है. ऐसे मैं शुद्ध हिंदी भाषा के प्रयोग पर जोर दिया जायेगा तो उसके सकारात्मक परिणाम नहीं मिलने वाले हैं. Hinglish देश की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है ऐसे में अपने विचारों को लोगों तक पहुँचाने का यहीं सबसे आसान जरियां है. 

वैसे भी भाषा तो विचारों के आदान प्रदान का साधन मात्र है. इसलिए बोलने और लिखने में किस भाषा का उपयोग किया जा रहा है इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि क्या बोला और क्या लिखा जा रहा है. विचार भाषा से ज्यादा महत्वपूर्ण हैं . आपने शुद्ध हिंदी भाषा और बड़े भारी-भारी शब्दों का उपयोग करके एक बहुत अच्छा लेख लिख तो दिया पर अगर 20 से ज्यादा लोग उसे समझ न पाए तो आपके लिखने का क्या फायदा? 

समय के साथ बदलाव जरुरी है. वैसे भी हिंदी ने हर भाषा से शब्द लिए है और हिंदी राष्ट्र भाषा बनने के योग्य इसलिए भी मानी जाती है क्योंकि सभी भाषाओँ के शब्दों को इसमें आसानी से समाहित किया जा सकता है और इसी वजह से ये सभी की पसंद बन सकती है. Facebook पर रोमन में हिंदी लिखना कई लोगों की मजबूरी भी है क्योंकि technical knowledge सभी को नहीं होता और न ही सभी के पास साधन होते हैं. समय बचाने के लिए भी ऐसा करना जरुरी है और सबसे बड़ी बात भाषा को लिखने के तरीके से ज्यादा महत्वपूर्ण है अच्छे और उपयोगी विचारों का प्रसार. साधन को साध्य से ज्यादा महत्त्व देना उचित नहीं है. 



- Monika Jain 'पंछी'