Monday, July 15, 2013

Mere Sapno Ka Bharat Poem in Hindi


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जहाँ ना भ्रष्टाचार का वास
जहाँ ना महंगाई का निवास
जहाँ ना हिंसा की हो आस
जहाँ ना आतंकवाद हो पास

सपनो का ये भारत मेरा सच में होता, काश!

जातिवाद ना ले अंगड़ाई
धर्म-धर्म की ना हो लड़ाई
भिड़ते जहाँ ना भाई-भाई
ना हिंसा ना त्राहि - त्राहि

सपनो के भारत में मेरे ऐसी सुबह थी आई।

मानवता है जहाँ का धर्म
करते सभी जहाँ सत्कर्म
समझे एक दूजे का मर्म
जहाँ ना होता कोई अधर्म

काश! मेरे भारत में होता ऐसा मानव धर्म।

जीवन मूल्य जहाँ ना गिरते
गिरगिट जहाँ ना नेता बनते
ऊँच नीच के दाव ना चलते
कदम मिलाकर सब जन चलते

पलकों में मेरी भारत के ऐसे ख़्वाब है पलते।

Monika Jain 'पंछी'