Friday, September 20, 2013

Thoughts of the Day in Hindi


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  • मैं तुझसे आकाश, प्रकाश, मन, प्राण किसी की भिक्षा नहीं मांगता. केवल यही चाहता हूँ कि मुझे प्रतिदिन लालसाओं से बचने योग्य बना दे, यही मेरे लिए तेरा महादान होगा ~ रवीन्द्र नाथ टैगोर 
  • सुख देने वाली चीजे पहले भी थी और अब भी हैं. फर्क यह है कि जो व्यक्ति सुखों का मूल्य पहले चुकाते हैं और उनके मजे बाद में लेते हैं, उन्हें स्वाद अधिक मिलता है. जिन्हें आराम आसानी से मिल जाता है, उनके लिए आराम ही मौत है ~ रामधारी सिंह 'दिनकर' 
  • शिक्षा का मूल उद्देश्य मस्तिष्क को ज्ञान से भरना नहीं, अपितु जन्मजात सुप्त दैवीय शक्ति को विकसित करके छात्र को आध्यात्मिक पूर्णता की ओर अग्रसर कराना है तथा छात्र को संकीर्ण सीमा से निकालकर उसे मानवतावादी बनाना है ~ योगीराज अरविन्द 
  • यदि हम चाहते हैं कि हमें कोई चस्का लगे, जो प्रत्येक दशा में हमारा सहारा हो और जो जीवन में हमें आनंद और प्रसन्नता प्रदान करें, उसकी बुराइयों से हमें बचाएं, हमें चाहिए कि हम पढ़ने का चस्का लगायें ~ आचार्य रामचंद्र शुक्ल 
  • मनुष्य की जिस प्रकार की भावना होती है या जिस तरह के कार्य वह करता है, उसी प्रकार की सिद्धि उसे प्राप्त होती है ~ सुभाष चन्द्र बोस 
  • हरेक अपनी व्यक्तिगत इकाई को सत्य सिद्ध करने का भ्रमपूर्ण प्रयास करता है. उसे इस भ्रम का ज्ञान अवश्य रहता है, क्योंकि हिंसा की भावना उत्पन्न होने से मनुष्य को कभी आनंद प्राप्त नहीं होता ~ अमृत लाल नागर 
  • निस्संदेह, यह आवश्यक है कि पहले अध्यापक स्वयं समझना आरम्भ करे. उसे निरंतर चौकन्ना रहना चाहिए तथा स्वयं अपने विचारों और भावनाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए. जागरूकता से प्रज्ञा आती है ~ जे. कृष्णमूर्ति 
  • किसी अन्यायपूर्ण पद्दति को चुपचाप सहन करने का अर्थ होता है, उस पद्दति के साथ सहयोग करना. इस तरह दमित व्यक्ति भी उतना ही बुरा बन जाता है जितना कि दमन करने वाला. बुराई के साथ सहयोग करने की हमारी उतनी ही जिम्मेदारी है, जितनी अच्छाई के साथ सहयोग करने की ~ मार्टिन लूथर किंग