Satvik Aahar, Sattvic Vichar


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हम जो भी आहार ग्रहण करते हैं उसका तन, मन और आत्मा पर प्रभाव पड़ता है. तन पर पड़ने वाला प्रभाव हमें शीघ्र ही नज़र आ जाता है पर मन और आत्मा पर आहार का प्रभाव धीरे- धीरे अदृश्य रूप में पड़ता है जो मन और आत्मा को स्वस्थ और अस्वस्थ बनाता है. काम, क्रोध, लोभ, मोह, जड़ता, आलष्य, प्रमाद, हिंसा, मद ये सभी मानसिक और आत्मिक व्याधियां हैं . जब हम सात्विक आहार ग्रहण करते हैं तो ये सब तामसिक प्रवृतियाँ नहीं उभरती.

लेकिन आज हमने आहार के क्षेत्र में स्वाद को सबसे ज्यादा महत्व दे दिया है. आहार का भूख से अब कोई सम्बन्ध नहीं रह गया है. बल्कि वह स्वाद पूर्ति के लिए ग्रहण किया जाता है. आज हर जगह fast food का प्रचलन है. ऐसे आहार में प्राणघातक रसायनों का उपयोग होता है, उसे अधिक समय तक टिकाये रखने के लिए जिलेटीन आदि पदार्थों का भी उपयोग होता है जो भविष्य में प्राणघातक सिद्ध होते हैं. यह तामसिक आहार है और इस सड़े-गले, बासी, विकार युक्त, अखाद्य आहार के सेवन से हमारे विचार और हमारा चरित्र भी प्रभावित होता है. कहा भी गया है : जैसा खावे अन्न, वैसा होवे मन और जैसा पीवे पानी, वैसी होवे वाणी.


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