Wednesday, April 2, 2014

Short Story in Hindi with Moral


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(1)

विवेक से करें श्रम का उपयोग 

एक आदमी को सिंचाई के लिए एक कुएं की आवश्यकता थी. एक जानकार व्यक्ति ने उसे बताया कि इसके लिए साठ हाथ की खुदाई करनी होगी. जिसे कुएं की आवश्यकता थी उसने दस-दस हाथ के छह गड्डे खोद डाले लेकिन पानी कहीं नहीं दिखा. 

वह व्यक्ति उस जानकार आदमी के पास गया और उसे समस्या बताई. जानकार आदमी ने पूछा, ‘क्या तुमने साठ हाथ की खुदाई कर ली ? ‘ 

व्यक्ति ने कहा, ‘हाँ कर ली.’ 

जानकार आदमी को आश्चर्य हुआ. वह खुद उस स्थान को देखने गया जहाँ खुदाई की गयी थी. दस-दस हाथ की गहराई के छह गड्डे खुदे हुए देखकर उसे खुदाई करने वाले की अज्ञानता समझते देर ना लगी. 

उसने खुदाई करने वाले से कहा, ‘ ऐसे छह क्या छह हजार गड्डे भी खोद दोगे तब भी पानी मिलना संभव नहीं है. जो ऊर्जा तुमने छह गड्डे खोदने में लगाई अगर वह एक कुआँ खोदने में लगाई होती तो पानी कभी का मिल चुका होता. अब एक काम करो. इनमें से किसी भी एक गड्डे को पचास हाथ और खोद दो फिर पानी मिल जाएगा.’

व्यक्ति ने वैसा ही किया और सचमुच पानी निकल आया. 

Moral : शक्ति और श्रम का उपयोग अपने विवेक से करें. विवेक से रहित श्रम के सार्थक परिणाम नहीं मिलते. 

(2)

सम्मान के अधिकारी 

एक बार एक गुरु अपने शिष्य के साथ कहीं जा रहे थे. एक व्यक्ति ने उन्हें सामने आता देख अभिवादन किया. गुरु ने शिष्य से कहा, ‘ इस व्यक्ति ने मेरे चरित्र, अनुभव और मेरी वयोवृद्धता से प्रभावित होकर मेरा अभिवादन किया है.’ 

शिष्य ने कहा, ‘ नहीं, आप भ्रम में हैं, छलावे में हैं. इस व्यक्ति ने युवावस्था में भी मेरे ऐसे चरित्र और जीवन को देखकर मुझे वंदन किया है.’ 

दोनों में बहस छिड़ गयी. गुरु कहे कि मेरा सम्मान किया है और शिष्य कहे कि मेरा. उन्होंने इसका एक हल निकाला और निर्णय लिया कि हम उस व्यक्ति से ही चल कर पूछ लेते हैं कि उसने किसे नमन किया है. 

दोनों उस व्यक्ति के पास गए और पूछा कि तुमने हम दोनों में से किसे वंदन किया था. व्यक्ति बहुत आश्चर्यचकित हुआ और कुछ सोचने लगा. कुछ देर सोचकर वह बोला, ‘ जो सम्मान पाने पर घमंड नहीं करते और सम्मान ना मिलने पर हीन भावना भी नहीं लाते मैंने उन्हीं को नमस्कार किया है.’

Note : The above short hindi moral stories are not my own creation. I read it somewhere and sharing it here.