Saturday, April 15, 2017

Life Thoughts in Hindi

ज़िन्दगी पर विचार, जीवन सुविचार. Philosophy Based Life Thoughts in Hindi. Attitude Status, Comments, Quotes of The Day, Proverbs, Lines, Slogans, Sms, Messages.


Life Thoughts
  • 13/04/2017 - जीवन को जितना समझती हूँ, मृत्यु भी उतनी ही समझ आ जाती है। आश्चर्य! कि इस टकराव को हम जीना कहते हैं। जीना तो उस दिन ही होगा जब कोई टकराव रहेगा ही नहीं और जीवन होगा नदी की अविरल धारा सा। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 22/02/2017 - जब आप किसी वस्तु, व्यक्ति या किसी से भी से रूबरू होते हैं और अक्सर ही आपके विचार इस दिशा में हो कि इससे क्या फायदा हो सकता है, या यह क्या काम आ सकता है, या इसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं, या प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी तरह की कोई उम्मीद या अपेक्षा रहती है तो यह बहुत अधिक व्यापारी मस्तिष्क को इंगित करता है। इतनी सौदागिरी जीवन से बहुत दूर ले जाती है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 16/12/2016 - अब तो जीना सीख लें हम, कब तक कभी इसके और कभी उसके लिए मरते रहेंगे। एक दिन तो वैसे ही मरना है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 16/12/2016 - हर मृत्यु एक सन्देश है और यह सन्देश है जीवन का। जो मृत्यु को स्वीकार करके चल सकता है वास्तव में वही तो जी सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 05/01/2017 - मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम मनुष्य होने के भाव से ऊपर उठ सकें। उससे पहले स्त्री स्त्री होने के भाव से और पुरुष पुरुष होने के भाव से...लेकिन यहाँ तो अभी तक कपड़ा पुराण ही चल रहा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 20/01/2016 - जीते जी कोई पूछता तक नहीं...मरने के बाद भगवान बना देते हैं लोग। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 20/01/2017 - हमने सदा लहरों को जीवन समझा और गहरे सागर को भूल गए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ 
  • 07/10/2016 - मरने से पहले...जी लेना चाहिए। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • जीवन हमारे लिए क्या लेकर आएगा...यह भले ही हम तय न कर सकें, लेकिन उसका स्वागत हम कैसे करेंगे यह तय करना हमारे हाथ में है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • असंतुष्टि और सुस्मृति भूत की, संचय और भय भविष्य के, वर्तमान कहीं नदारद है। जो वर्तमान में जीना आ जाता तो सही मायनों में जीना आ जाता। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कभी-कभी जीने के लिए अपने भीतर बहुत कुछ मारना होता है। क्यों ऐसे गुनाहों की सजा भी मिलती है जो हमने किये ही नहीं होते? ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 20/07/2015 - दुनिया नहीं जीने देती। अगर संघर्षों, मुश्किलों, ग़मों, तकलीफों, दर्द और तन्हाईयों के विशाल सागर से घिरे होते हुए भी आपको मुस्कुराना, चहकना और खिलखिलाना आ जाता है, तो बहुत सम्भावना है कि आपकी तकलीफों को नाटक करार दे दिया जाएगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 15/03/2015 - ज़िन्दगी तो बार-बार आवाज़ देती है - यह तुम्हारे लिए नहीं है, नहीं है, नहीं है...बिल्कुल भी नहीं है। पर हम बाहरी दुनिया के शोर में ज़िन्दगी की आवाज़ को अनसुना कर बैठते हैं। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 05/06/2016 - जीवन का उद्देश्य ही यह जान लेना है कि जीवन का कोई उद्देश्य नहीं, वह सिर्फ जीवन है। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 15/06/2016 - ज़िन्दगी की दाल में मीठे नीम सी वह...अलग होना उसकी नियति थी। ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • 17/06/2016 - जरा सी दुनिया और जीवन के प्रति आसक्ति बढ़ी नहीं कि एक तमाचा इंतजार कर रहा होता है...और फिर? फिर क्या...मोह भंग! ~ Monika Jain ‘पंछी’
  • कभी-कभी जिंदगी में सबसे आसान सवाल ही जवाब देने में सबसे मुश्किल लगने लगते हैं. ~ Monika Jain ‘पंछी’
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