Monday, February 6, 2017

Life Thoughts in Hindi

ज़िन्दगी पर विचार, जीवन सुविचार. Philosophy Based Life Thoughts in Hindi. Attitude Status, Comments, Quotes of The Day, Proverbs, Lines, Slogans, Sms, Messages.
Life Thoughts in Hindi
Life Thoughts
  • सिर्फ अधूरी इच्छाएं (अच्छी-बुरी) ही जन्म लेती है। प्रेम तो सदैव अजन्मा और अमर होता है। अपने अहंकार को खाद-पानी देते हम किसी दूसरे अहंकार से नफरत कर सकते हैं, लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि वह दूसरा अहंकार भी हमारी ही किसी अतीत की इच्छा का जन्म है। जिस क्षण हम अखंडित होंगे तभी हमें पता चलेगा कि दूसरा तो कोई होता ही नहीं। हर कदम पर हमारा सामना सिर्फ खुद से ही है। इसलिए समानुभूति के उस स्तर तक पहुँचने के लिए अक्सर मैं ’हम’ या ‘मैं’ शैली में लिखती हूँ। अहंकार के शमन के लिए 'मैं' को 'हम' और 'हम' को 'मैं' बना लेना एक अच्छा तरीका है और दोनों में ही यह जरुरी नहीं कि बात मेरे ही सन्दर्भ में हो। उस समय मन में यह ख़याल नहीं होता कि मूल मुद्दे पर ध्यान नहीं दिया जाएगा बल्कि व्यक्तिगत आंकलन किये जायेंगे, निष्कर्ष निकाले जायेंगे, पूर्वाग्रह पाले जायेंगे। लेकिन समानुभूति से बाहर निकलते ही पता चलता है कि हमारा खंड-खंड जीवन इसी के लिए अभिशप्त है। जितने ज्यादा हम खंडित उतने ही हमारे निष्कर्ष। जब-जब हमारा मन खंडित नहीं होगा, संस्कारों के प्रभाव में नहीं होगा...तब-तब वह सिर्फ प्रेम के बारे में ही सोचेगा। बल्कि सोचेगा क्या ‘प्रेम’ ही होगा। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (03/02/2017) 
  • हमने सदा लहरों को जीवन समझा और गहरे सागर को भूल गए। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (20/01/2017) 
  • जीते जी कोई पूछता तक नहीं...मरने के बाद भगवान बना देते हैं लोग। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (20/01/2016)  
  • मनुष्य जीवन की सार्थकता इसी में है कि हम मनुष्य होने के भाव से ऊपर उठ सकें। उससे पहले स्त्री स्त्री होने के भाव से और पुरुष पुरुष होने के भाव से...लेकिन यहाँ तो अभी तक कपड़ा पुराण ही चल रहा है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (05/01/2017) 
  • जीजिविषा को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है। इसे एक प्रेरणास्पद गुण की तरह देखा जाता है। लेकिन जब भी मैं सोचती हूँ कि मेरी जीवेषणा न जाने कितनी मृत्युओं पर खड़ी है तो इस शब्द का आकर्षण एकदम छू हो जाता है। देखा जाए तो यह जीवेषणा सबको मारकर भी खुद को नहीं बचा सकती। पर इसका मतलब यह नहीं कि मैं मृत्यु-एषणा का समर्थन कर रही हूँ। सूक्ष्म रूप में मृत्यु-एषणा सिर्फ वहीं हो सकती है जहाँ सशर्त जीवेषणा है - शर्तें पूरी नहीं हुई इसलिए हमें नहीं जीना।
    यह जानते हुए कि एक समष्टि दृष्टिकोण से पृथ्वी पर जीवन का कोई उद्देश्य नहीं है...यह एक चक्र के सिवा और कुछ भी नहीं...जीने की जद्दोजहद और प्रतिस्पर्धा को इतना अधिक महत्व देना एक भ्रम में जीना लगता है। जीवन एक खेल से ज्यादा कुछ भी तो नहीं। काश! हम इसे बस एक खेल की तरह खेलना सीख पाते। पूर्ण सजगता और भागीदारी से शामिल होते हुए भी अनछुए और गंभीरता से मुक्त। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (22/06/2016)  
  • हर मृत्यु एक सन्देश है और यह सन्देश है जीवन का। जो मृत्यु को स्वीकार करके चल सकता है वास्तव में वही तो जी सकता है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (16/12/2016)  
  • अब तो जीना सीख लें हम, कब तक कभी इसके और कभी उसके लिए मरते रहेंगे। एक दिन तो वैसे ही मरना है। ~ Monika Jain ‘पंछी’ (16/12/2016)  
  • वैसे तो जीवन जैसे-तैसे बीत जाता है, पर वास्तविक जीवन तो उनका है जो किसी मकसद के लिए जीते हैं। ~ शेख सादी / Sheikh Saadi  
  • जिसे उचित-अनुचित का विचार है, वही वास्तव में जीवित है, पर जो योग्य-अयोग्य का विचार नहीं रखता, उसकी गणना तो मृतकों में ही की जाएगी। ~ Saint Thiruvalluvar / तिरुवल्लुवर  
  • आपको यह चुनने का अवसर नहीं मिलेगा कि आप कब और कैसे मरेंगे, आप केवल इतना ही निर्णय कर सकते हैं कि आप किस प्रकार से ज़िन्दगी जीने जा रहे हैं। ~ वाल्तेयर / Voltaire
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