Tuesday, December 25, 2012

Poem on Sky in Hindi


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मेरे मन के आकाश में.....
कभी बरसते है बादल दु:खो के
तो कभी टिमटिमाते है तारे ख़ुशी के.
कभी दूर-दूर तक घना कोहरा छा जाता है
तो कभी हर तरफ बस उजेरा नज़र आता है.
कभी उड़ते हैं तम्मनाओं के परिंदे पंख फैलाकर
तो कभी छा जाती है काली घटाएँ अचानक आकर.
कभी पूर्णिमा का चाँद जगमगाने लगता है
तो कभी अमावस का अंधेरा छाने लगता है.
कभी इंद्रधनुषी रंग गाने लगते है
तो कभी सुर ये सारे वीराने लगते हैं.
कभी सांझ की हवा सुहानी बहती है 
तो कभी आँधी और तूफान की कहानी कहती है.
आकाश समाया हैं मन में 
नित रोज बदलता अपने रंग.
कभी सवेरा बन ये खिलता 
कभी रात को लाता संग. 

Monika Jain 'पंछी'