Wednesday, December 14, 2016

Poem on Sky in Hindi

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Poem on Sky in Hindi

मन आकाश

मन के आकाश में -

कभी बरसते हैं बादल दु:खो के
तो कभी टिमटिमाते हैं तारे ख़ुशी के।

कभी दूर-दूर तक घना कोहरा छा जाता है
तो कभी हर तरफ बस उजेरा नज़र आता है।

कभी उड़ते हैं तम्मनाओं के परिंदे पंख फैलाकर
तो कभी छा जाती है काली घटाएँ अचानक आकर।

कभी पूर्णिमा का चाँद जगमगाने लगता है
तो कभी अमावस का अंधेरा छाने लगता है।

कभी इंद्रधनुषी रंग गाने लगते हैं
तो कभी सुर ये सारे वीराने लगते हैं।

कभी सांझ की हवा सुहानी बहती है
तो कभी आँधी और तूफान की कहानी कहती है।

आकाश समाया है मन में
नित रोज बदलता अपने रंग
कभी सवेरा बन ये खिलता
कभी रात को लाता संग।

By Monika Jain 'पंछी'

To read the english version of this poem about correlation between mind and sky click here.