Thursday, January 12, 2017

Small Story in Hindi with Moral

व्यक्तित्व पर कहानी, दान की महिमा कथा, मनुष्यता, मानवता, चरित्र. Small Story in Hindi with Moral for Kids. Donation, Personality, Character, Humanity Tales.
Small Story in Hindi with Moral
(1)

दान की महिमा

वैशाख महीने की भीषण गर्मी में एक बार महाकवि कालिदास किसी कार्यवश भयानक जंगल में पहुँचे। उन्होंने वहां एक रुग्ण व्यक्ति को देखा। वह फटेहाल था। वह चल रहा था किन्तु भूमि इतनी तपी हुई थी कि उससे चला नहीं जा रहा था। मुंह से आह निकल रही थी। इसे देखकर महाकवि पसीज गए। उसे उठाकर एक वृक्ष के नीचे रख दिया और अपने पदत्राण भी उसे दे दिए और वे औषधि लाने चल पड़े। वे कुछ चले ही थे कि एक महावत हाथी लेकर आ रहा था। महाकवि को देखकर उसने उन्हें हाथी पर बिठा लिया। राजा भोज ने कालिदास को हाथी पर आरूढ़ देखा तो पूछा- हाथी पर कैसे बैठे हो? कवि ने कहा - ‘जो व्यक्ति नहीं देते, उनकी संपत्ति नष्ट हो जाती है’।


Source : स्वाध्याय सन्देश

(2)

व्यक्तित्व

जब विवेकानंद जी विश्व शिकागो धर्म सम्मलेन में भाग लेने के लिए शिकागो (अमेरिका) गए तो उनके साफे और भगवा वेशभूषा को देखकर एक महिला ने खिल्ली उड़ाई और पूछा - यह क्या है? स्वामी जी हाजिर जवाब थे। उन्होंने तुरंत कहा, ‘मैडम! यह आपका देश है जहाँ दर्जी व्यक्तित्व का निर्माण करता है पर हमारे देश में चरित्र व्यक्तित्व का निर्माण करता है।’


Source : Unknown

(3)

मनुष्यता का रिश्ता

रूस में सड़क के किनारे एक मेजर खड़े-खड़े शराब पी रहा था। तभी वहां एक आदमी आया जो अपने कपड़ों से ग्रामीण लग रहा था। उसने मेजर से किसी स्थान का पता पूछा। मेजर के अहंकार को ठेस लगी। उसने सोचा, ‘एक साधारण से आदमी की हिम्मत कैसे हुई कि उससे बात करे।’

मेजर कुछ बोला नहीं, बस उंगली के इशारे से उस जगह का पता बता दिया। पर वह व्यक्ति वहीँ का वहीँ खड़ा रहा। इससे मेजर को गुस्सा आ गया। वह बोला, ‘अब जाते क्यों नहीं?’

व्यक्ति ने कहा, ‘जा रहा हूँ। बस ये जानना चाहता था कि आप किस पद पर कार्यरत हैं?’

मेजर अहंकार से हँसते हुए बोला, ‘तुम खुद ही अनुमान लगाओ।’

ग्रामीण व्यक्ति ने कहा, ‘आप जरुर केप्टन होंगे?’ मेजर ने ना में सिर हिलाया। ‘तो आप लेफ्टिनेंट होंगे?’ ग्रामीण ने कहा। मेजर ने फिर से इनकार में सिर हिलाया। ग्रामीण बोला, ‘तब तो आप मेजर होंगे?’ मेजर ने खुश होकर कहा, ‘हाँ, तुमने सही पहचाना।’

ग्रामीण व्यक्ति ने मेजर को सलाम किया तो मेजर को संतोष हुआ। ग्रामीण व्यक्ति बोला, ‘आप बता सकते हैं कि मैं कौन हूँ?’

मेजर ने उसे हिकारत भरी नजर से देखते हुए कहा, ‘तुम गाँव के चोकीदार वगैरह होंगे।’ ग्रामीण ने ना में सर हिलाया। मेजर ने पूछा ‘सिपाही?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे ऊपर।’ मेजर ने आश्चर्य से पूछा ‘कैप्टन?’ ग्रामीण ने कहा, ‘उससे भी ऊपर।’ इस तरह बात जनरल तक पहुँच गयी। ग्रामीण ने कहा, ‘मैं जनरल से भी ऊपर यहाँ का राजा हूँ।’

मेजर का नशा टूटा। उसने राजा को सलाम किया।

राजा ने कहा, ‘मेजर बनकर तुम यह भूल गए कि सबसे पहले तुम एक मनुष्य हो। मैं भी एक मनुष्य हूँ। कोई चाहे किसी भी पद पर कार्यरत हो पर मनुष्यता का रिश्ता सबसे बड़ा है।’

मेजर को अपने व्यवहार पर पछतावा हुआ। उसने राजा से माफ़ी मांगी।


Source : Unknown

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