Wednesday, April 3, 2013

Love Proposal Poem in Hindi


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By Randhir 'Bharat' Chaudhary

हाँ कल्पित है, मेरी प्रेम कहानियाँ 
हाँ ठीक मेरी नाम की तरह, ‘भारत’
पर तुम्हें ऐतराज क्यों हैं ?
क्यों नहीं स्वीकार पाते तुम... सत्य 
हमारी मुस्कुराहटों का 
पंछियों के करलव करते स्वरों का 
नदी-झरनों की करकल पदचाप का 
पहाड़ों की वादियों में गूँजते अनुनाद का 
कैसे नकार सकते हो तुम कोशिशों को 
मीठे दरियाओं का, जो उड़ेल रही है 
अपना बूंद-बूंद, करवाहट लिए विशाल सागर में 
परवानो की आहुति, नहीं देखते तुम 
जो शमा की चाहत में, झुलसा लेता है अपना जिस्म 
क्यों नहीं भाते तुम्हें, हिमालय के तेजोमय शिखर 
लहलहाते गेहूँ के साथ, सरसों के फूलों से आच्छादित 
धरती की मादकता, आकर्षित नहीं करती तुम्हें 
ऊँघते-अलसाए जंगल… क्या बाध्य नहीं करती तुम्हें 
कुछ देर ठहर कर, झांक सको अपने अंदर 
उलझनों से परे एक ऐसे संसार की रचना में 
जहां सिर्फ हमतुम हैं, और प्रेम है...