Sunday, December 30, 2012

Pyar ki Kavita in Hindi


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मैंने कहा था ना 
ना करना ऐसे वादें 
जो निभा ना सको।
ना कहना ऐसी बातें 
जो सिर्फ बाते बनकर रह जाये।
स्थायी ना रह सके। 
हर रोज तो कहती थी तुम्हे
क्योंकि डरती हूँ मैं खुद से 
नहीं समझा पाती खुद को 
जब मेरा भरोसा टूटता है।
नहीं बहला पाती खुद को 
जब कुछ अपना छूटता है।
मेरे इनकार को बदल ही दिया 
तुमने इकरार में
और अपनी प्यार भरी बातों से 
कैद कर लिया मुझे अपने प्यार में। 
पर अब तुम्हारी बदलती feelings 
कैसे मैं भी अपना लूँ ?
ये कैसे खुद को समझा लूँ ?
तुम कहते हो practical बनो 
पर तुम्हारे हाथों की मैं कोई गुड़िया तो नहीं 
जब चाहो बदल जाऊं वो जादू की पुड़िया तो नहीं।
मेरी आज़ाद सोच से प्यार था ना तुम्हे 
अब तुम्हारी सोच में कैद हो जाऊं मैं वो चिड़िया तो नहीं। 
मैंने कहा था ना कई बार 
प्यार मेरे लिए कोई मजाक नहीं है 
प्यार मेरे लिए बस प्यार ही है। 

Monika Jain 'पंछी'