Saturday, April 4, 2015

Swami Vivekananda Quotes in Hindi


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Swami Vivekananda Quotes

  • जिस तरह से विभिन्न स्त्रोतों से उत्पन्न धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं. उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग, चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक जाता है.
  • अगर आप ईश्वर को अपने भीतर और दूसरे जीवों में नहीं देख पाते, तो आप ईश्वर को कहीं नहीं पा सकते हैं.
  • आदर्श, अनुशासन, मर्यादा, परिश्रम, ईमानदारी तथा उच्च मानवीय मूल्यों के बिना किसी का जीवन महान नहीं बन सकता.
  • पढ़ने के लिए जरुरी है, एकाग्रता और एकाग्रता के लिए जरुरी है ध्यान. ध्यान से ही हम इन्द्रियों पर संयम रखकर एकाग्रता प्राप्त कर सकते हैं.
  • यदि उपनिषदों से बम की तरह आने वाला और बम गोले की तरह अज्ञान के समूह पर बरसने वाला कोई शब्द है तो वह है 'निर्भयता'.
  • प्रसन्नता अनमोल खजाना है. छोटी छोटी बातों पर उसे लुटने न दें.
  • हमें इसकी क्या चिंता कि मुहम्मद अच्छे थे या बुद्ध? क्या इससे मेरी अच्छाई या बुराई में परिवर्तन हो सकता है? आओ हम लोग अपने लिए और अपनी जिम्मेदारी पर अच्छे बने.
  • आज्ञा देने की क्षमता प्राप्त करने से पहले प्रत्येक व्यक्ति को आज्ञा पालन करना सीखना चाहिए.
  • हमारी उन्नति का एकमात्र उपाय यह है कि हम पहले वह कर्तव्य करें जो हमारे हाथ में है और इस प्रकार धीरे-धीरे शक्ति संचय करते हुए क्रमशः हम सर्वोच्च अवस्था को प्राप्त कर सकते हैं.
  • तुम्हारे ऊपर जो प्रकाश है, उसे पाने का एक ही साधन है - तुम अपने भीतर का आध्यात्मिक दीप जलाओ, पाप और अपवित्रता स्वयं नष्ट हो जायेगी. तुम अपनी आत्मा के उदात्त रूप का ही चिंतन करो.
  • जब तक लोग एक ही प्रकार के ध्येय का अनुभव नहीं करेंगे, तब तक वे एकसूत्र से आबद्ध नहीं हो सकते. जब तक ध्येय एक न हो, तब तक सभा, समिति और वक्तृता से साधारण लोगों को एक नहीं किया जा सकता.
  • हम भले ही अपने पुराने सड़े घाव को स्वर्ण के वस्त्र से ढक रखने की चेष्टा करें, एक दिन ऐसा आएगा जब वह स्वर्ण वस्त्र खिसक पड़ेगा और वह घाव अत्यंत वीभत्स रूप में आँखों के सामने प्रकट हो जाएगा.
  • भय ही पतन और पाप का निश्चित कारण है.
  • स्त्रियों की स्थिति में सुधार न होने तक विश्व के कल्याण का कोई भी मार्ग नहीं है.
  • जगत को जिस वस्तु की आवश्यकता होती है, वह है चरित्र. संसार को ऐसे लोग चाहिए जिनका जीवन स्वार्थहीन ज्वलंत प्रेम का उदाहरण है. वह प्रेम एक-एक शब्द को वज्र के समान प्रतिभाशाली बना देगा.
  • पहले हर अच्छी बात का मजाक बनता है, फिर उसका विरोध होता है और फिर उसे स्वीकार कर लिया जाता है.
  • कामनाएं समुद्र की भांति अतृप्त है. पूर्ति का प्रयास करने पर उनका कोलाहल और बढ़ता है.
  • सुख बाहर से मिलने की वस्तु नहीं, हमारे भीतर ही है. लेकिन अहंकार छोड़े बिना उसकी प्राप्ति नहीं होने वाली.
  • मैं भविष्य नहीं देखता, न ही जानने की चिंता करता हूँ. पर एक दृश्य मैं अपने मनः चक्षुओं से स्पष्ट देख रहा हूँ, यह प्राचीन मातृभूमि एक बार पुनः जाग गयी है और अपने सिंहासन पर आसीन है, पहले से कहीं अधिक गौरव से प्रदीप्त. 

स्वामी विवेकानंद / Swami Vivekananda

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