Wednesday, December 4, 2013

Poem on Dreams in Hindi


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Hindi Poem : Dreams / Wishes

देख रही हूँ कबसे 
तुम्हारे जीवन में आई 
इस नयी सुबह के सूरज को. 

माँगना चाहती हूँ उससे 
मेरे हिस्से की रौशनी भी 
तुम्हारे लिए. 

और लौट जाना चाहती हूँ 
फिर से उन गुमनाम अंधेरों में 
जहाँ से एक दिन लाये थे तुम मुझे 
सपनों की धूप से खिलखिलाते सवेरों में.

ताकि कल जब मैं ना रहूँ 
तब भी मेरे हिस्से की धूप
चहकती रहे तुम्हारे आँगन में 
और तुम्हारे सपने 
बनकर मेरी चाहत 
पलते रहे तुम्हारे जीवन में.

तुम्हे अच्छा लगे या लगे बुरा 
पर इसमें भी मेरा ही स्वार्थ है 
तेरा मेरा ना सही
पर हमारे हिस्सों की
धूप का तो साथ है.

हाँ जानती हूँ कई शिकायते हैं तुम्हें 
ना जाने कब से 
और नहीं चाहते हो तुम अपने लिए 
कोई भी दुआ अब मुझसे.

पर एक दिन मिलकर 
बताना चाहूंगी तुम्हें 
कि मैंने ऐसा क्यूँ किया ?
क्यूँ बार-बार खुद को 
और तुम्हे बेवजह दर्द देकर
अपने से दूर किया.

क्यूँ बढ़ ना पायी उन रास्तों पर 
जिन पर चलने की हमारी चाहत थी 
क्यूँ बदल डाली वो राहें 
जिन पर खिलखिलाती सी 
तेरी और मेरी मुस्कुराहाट थी.

तब तक के लिए सीख लूंगी
तुम्हारी नफरत और शिकायतों 
के साथ जीना 
तुम्हें क्या पता 
कितना अच्छे से आता हैं मुझे 
जिंदगी का दर्द पीना. 

खेर! कल के सूरज के साथ 
मैं नहीं रहूंगी तुम्हारे जीवन में 
हाँ! मेरी दुआएं शामिल होंगी 
तुम्हारी राहें रौशन करने वाली 
हर एक किरण में.

बस चाहती हूँ तुम्हारा जीवन 
सफलता का पर्याय बन जाए 
और तुम्हारी उम्मीदों का आसमां
तुम्हें बुलंद ऊंचाइयों पर ले जाए. 

प्यार की तुम्हारे जीवन में 
कुछ ऐसी बारिश हो 
बन जाए वह तुम्हारी 
जिसे पाने की 
तुमने की ख्वाइश हो. 

उठ रहे होंगे ना जाने 
कितने सवाल 
तुम्हारे भी जहन में 
हाँ नहीं समझ पाओगे तुम 
क्या चल रहा है मेरे मन में. 

गर समझना चाहो तो बस 
इतना ही समझ लो 
अब ऐसे ही सपने बुनती है
 तुम्हारी ये मिष्ठी
और ऐसे ही उड़ता है 
उसके मन का पंछी.

Monika Jain ‘पंछी’

How is this poem on dreams, wishes, desires and sunshine ? 

Thursday, November 28, 2013

Poem on Sadness in Hindi


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Hindi Poem : Sadness / Sad

अक्सर लोग पूछते हैं 
कहाँ से लाती हो इतना दर्द 
जो छलकता है
तुम्हारी कविताओं में 
बनकर बेदर्द. 
मैं बस मुस्कुरा देती हूँ 
और इस मुस्कराहट के पीछे 
ना जाने क्या-क्या छिपा लेती हूँ. 
क्योंकि अब बस कोरे काग़ज ही 
मेरे दर्द और अकेलेपन के साथी हैं 
आंसुओं से भीगी ना जाने कितनी राते 
मैंने बस इन कोरे पन्नों से ही तो बांटी हैं. 
और सच कहूँ तो 
इनसे अच्छा और सच्चा साथी
कोई और हो नहीं सकता. 
देहाकर्षण और स्वार्थ से लिपटे चेहरों में 
मेरे ह्रदय के प्रेम कलश को छूने वाला 
कोई ह्रदय हो नहीं सकता. 

एक बहुत बड़ा गुण होता है भावुकता 
पर आज के परिप्रेक्ष्य में यह 
लगता है जैसे हो मुर्खता.
पर मेरा युवा मन, युवा सपने और 
उसमें छिपा ढेर सारा शाश्वत प्रेम
यह सब कहाँ समझता था.
वह तो हर पल, हर लम्हा 
सनातन प्रेम के सपने बुनता था.

अत्यंत संवेदनशील और 
करुण सपनों में जीने वाली मैं 
यह कहाँ जानती थी कि
जब होगा ज़िन्दगी की हकीकत से सामना 
तो मेरे ह्रदय की कोमल भावनाएं 
एक दिन मर जायेगी.
मेरे स्नेह का स्त्रोत सूख जाएगा 
और खुद अपने हाथों ही मैं 
अपने सपनों की चिता जलाऊंगी.

मैंने बना ली है 
अपने ह्रदय के चारो ओर 
एक अभेद दीवार
जिसे पार करने की कोशिश 
अब है बिल्कुल बेकार.
क्योंकि मेरा निर्लिप्त मन 
अब किसी को इजाज़त नहीं देता 
दीवार के उस पार झाँकने की
जहाँ एक बंद दरवाजा हैं 
जिसमें रखी है मेरे आहत मन की 
टूटी-फूटी किरचें 
जो वक्त बेवक्त चुभती रहती है.

Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poem on deep sadness, broken heart and resulted detachment and insensitivity ?

Friday, November 22, 2013

Poem on Politicians in Hindi


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Poem : Indian Politicians / Neta 

दुनिया के सारे अभिनेता 
नेताओं के आगे फेल हो जाते हैं 
हीरो की फिल्म पिटी तो वे फ्लॉप 
पर हमारे नेताजी फ्लॉप होकर भी 
हिट हो जाते हैं. 

चुनावों का दौर आते ही 
बरसाती मेढंको की तरह सब टर्राने लगते हैं
पांच साल बैठ कर मलाई खाने के लालच में 
सब अपना रेडियो बजाने लगते हैं.

जैसे हर शादी बारात में 
बहारो फूल बरसाओं जैसे गाने 
सुनाई देते हैं
वैसे ही चुनावों के मौसम में 
‘हमारा नेता कैसा हो’ जैसे नारे 
कानो पर पड़ते हैं. 

नेताओं का अपनी मंडली के साथ आना 
नारे लगाना, माला पहनाना और तालियाँ बजाना 
मुस्कुराकर ढेर सारे फोटो खिंचवाना
चुनावों तक बस यहीं तमाशा है
उसके बाद दम तोड़ती नज़र आती 
हर उम्मीद और आशा है. 

नेताओं के लच्छेदार भाषण से 
डूबती अर्थव्यवस्था भी 
तरक्की करती नज़र आती है 
उनकी आँखों से देखें तो 
सूखी बंझर जमीन भी 
हरी-भरी नज़र आती है. 

जनता की सेवा ही धर्म है मेरा 
ये कुछ रटे रटाये डॉयलॉग जो 
नेताजी चुनावों के मौसम में 
बार-बार दोहराते हैं. 
दो चार महीने सेवक बनने का दिखावा 
फिर पूरे पांच साल हमें इशारों पर नचाते हैं. 

बिकाऊ मीडिया भी शैतानों को 
सबसे शरीफ़ और सेवाभावी 
बनाकर पेश करता है.
जनता के विश्वास के साथ धोखा और
अपराधियों के सपनों को कैश करता है. 

पक्ष-विपक्ष के एक दूसरे पर 
मढ़े आरोपों में 
जनता उलझ कर रह जाती है 
दोनों के हित सध जाते हैं और 
राजनीति की रोटियां सिक जाती है.

एक धर्म की बुराइयाँ सुन 
दुसरे धर्मावलम्बी पट जाते हैं 
और नेताओं के नाटक को सच मान 
हम आपस में बंट जाते हैं.

मेरे देश के नौजवानों 
प्रचार से प्रभावित ना होकर 
व्यक्ति के चरित्र और कार्यों को आधार बनाओं.
झूठे वादों के पर्चे बांटने वालों को नहीं 
सच्चाई की शपथ लेने वालों को विजेता बनाओं. 

Monika Jain ‘पंछी’

How is this hindi poem on politicians, politics and election ?

Wednesday, November 20, 2013

Rochak Jankari in Hindi


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Rochak Jankari in Hindi

Rochak Jankari in Hindi / Tathya / Khabar

  • ओमाहा नेब्रास्का में अगर चर्च में रहते हुए डकार या छींक ली जाती है तो इसे अपराध माना जाता है. 
  • अफ्रीका में एक ग्रास पायी जाती है जिसे 'एलिफेंट ग्रास' कहा जाता है. इसका नाम हाथी के नाम से रखा गया है क्योंकि यह बहुत लम्बी होती है. इसकी लम्बाई 4.5 मीटर होती है जिसकी तुलना हाथी की लम्बाई से की जाती है. 
  • सबसे लम्बे पंख वाला पक्षी होता है अल्बाट्रोस. ये पंख 12 फुट ऊंचे होते हैं. 
  • न्यूजर्सी में किसी की हत्या करते समय बुलेट प्रूफ जैकेट पहनने की मनाही है. 
  • ऑक्सफोर्ड ने 'एलिस इन वंडरलैंड' लिखने वाले लूईस कैरोल के उपन्यासों से 21 शब्द अपनी डिक्शनरी में काम में लिए हैं. 
  • पैंग्विन, औस्ट्रिच और किवी ऐसे पक्षी हैं जो उड़ नहीं पाते. 
  • अलास्का में किसी भालू को नींद से जगाकर उसकी फोटो लेना सख्त मना है. 
  • मियामी में अगर कोई किसी जानवर की नक़ल करता है तो इसे कानूनन अपराध माना जाता है. 
  • वाशिंगटन के बेलिंगघम में नृत्य के समय महिला द्वारा तीन कदम पीछे लेना गैरकानूनी माना जाता है. 
  • कैलिफ़ोर्निया में महिलाएं हाउसकोट पहनकर गाड़ी नहीं चला सकती. 
  • मिशिगन में मार्ग में चलते हुए अगर कीचड़ से भरा कोई गड्डा आ जाता है तो महिलाओं को अपनी स्कर्ट 6 इंच से ज्यादा ऊपर करने की अनुमति नहीं होती. 
  • इदाहो में किसी भी पुरुष द्वारा अपनी प्रेमिका को 50 पौंड से ज्यादा भारी कैंडी बॉक्स देने की अनुमति नहीं है. 
  • स्वीडन में अपार्टमेंट में रहने वाला आदमी रात 10 बजे के पश्चात् टॉयलेट में फ्लश नहीं कर सकता. 
  • अलबामा में रेलवे ट्रैक पर नमक रखने की स्थिति में सजाये मौत तक दी जा सकती है. 
  • बायोमिंग में जून के माह में खरगोश की फोटो लेने की अनुमति नहीं है. 
  • टेक्सास में तार मोड़ने वाले औजार जैसे प्लास आदि रखना अपराध माना जाता है. 
  • कोलंबिया में गॉसिप करते पाए जाने पर अपराधी को 90000 डॉलर तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है. 
  • कैलिफ़ोर्निया के पैसिफिक ग्रोव में तितली को छेड़ने पर सजा भी हो सकती है. 
  • केटुंकी में साल में एक बार नहाना कानूनन आवश्यक है. 
  • स्टेट ऑफ़ अरकंसास में अगर राज्य के नाम गलत उच्चारित करना सख्त मना है. 
  • कंसास में नंगे हाथों से मछली पकड़ना कानूनन अपराध माना जाता है. 
  • यू एस के टेक्सास में अगर कोई किसी की गाय पर चित्रकारी करता है तो उसे सजा भी हो सकती है. 
  • स्वीडन में अगर कोई सील को नाक पर गेंद का संतुलन बनाने की ट्रेनिंग देते हुए पकड़ा जाए तो उसे सजा हो सकती है. 
  • फीनलैंड में अगर कोई व्यक्ति ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करते पकड़ा जाता है तो उसकी आय के अनुपात में उसका जुर्माना तय किया जाता है. 
  • जॉर्जिया के अटलांटा में जिराफ को बिजली या टेलीफोन के खम्भे से नहीं बाँधा जा सकता है. इसे कानूनन अपराध माना जाता है. 
  • न्यूयार्क में ग्रीन पॉइंट रेस्तरां में खाने के दौरान बातचीत करना मना है. अगर कोई व्यक्ति बातें कर यहाँ का नियम तोड़ता है तो उसे बाहर जाना पड़ता है. लोगों को यह बहुत पसंद है और इसे वे मैडिटेशन केंद्र की तरह देखते हैं. यह रेस्तरां भारत में बौद्ध भिक्षुओं के भोजन के समय बात ना करने से प्रेरित है. 

Tuesday, November 19, 2013

Poem on Indian Army Soldiers in Hindi


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Poem : Indian Army / Soldiers

खून जमाती ठण्ड में भी, सीना ताने खड़े हुए 
बदन जलाती गर्मी में भी सीमाओं पर अड़े हुए
बाँध शहादत का सहरा, मृत्यु से ब्याह रचाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं. 

बर्फीली वायु हो चाहे, तूफानों ने दी हो चुनौती 
चाहे दुश्मन के खेमे से गोली की बौछारें होती 
चाहे हो कैसी भी विपदा, पर ये ना घबराते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं. 

माँ, पत्नी, बच्चों से दूर, राष्ट्र धर्म में रमे हुए 
दिल में कितना दर्द ये पाले पर सीमा पर डंटे हुए 
अपनी जान गंवाकर भी दुश्मन को धूल चटाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं. 

धरती माँ के सच्चे बेटे, सर पर कफ़न बाँध कर बैठे 
नींद नहीं उनकी आँखों में ताकि हम सब चैन से लेटे
देश की रक्षा के खातिर वे वीरगति को पाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं. 

कुर्बानी वीरों की जीवन कितनो को दे जाती है 
उनके रक्त से सिंचित धरती धन्य धन्य हो जाती है. 
मौत भी क्या मारेगी उनको, जो मरकर भी जी जाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं.

देख तिरंगा इन वीरों को गर्वित हो लहराता है 
भारत माँ का मस्तक भी शान से यूँ इठलाता है
जब-जब सीना ताने ये जीत का बिगुल बजाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं.

इन्हें जन्म देने वाली कोख के अहसानमंद 
पत्नी और परिवार के बलिदान को शत-शत नमन 
इस अतुल्य त्याग का हम मिलकर गीत गाते हैं 
देश के वीर सिपाही देखो ! माँ का कर्ज चुकाते हैं. 

Monika Jain ‘पंछी’ 

The above hindi poem is dedicated to Indian army, all the soldiers and martyrs. How is it ?

Friday, November 15, 2013

Poem on Farmers in Hindi



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Hindi Poem : Farmers : किसान

मिट्टी से सोना उपजाता 
कहलाता जो अन्न का दाता 
धूप, ठंड हो चाहे बारिश 
जिसको कोई रोक ना पाता.

बादल जिसकी किस्मत लिखता 
आढ़तिया है जिसको ठगता 
फिर भी सबका पेट वो भरता
कड़ी धूप नित मेहनत करता. 

चाहे बरसाता रवि अनल 
चाहे जलता हो भूतल 
टप-टप बहता रहे पसीना 
पर चलता वह अविरल. 

चाहे हो अच्छी कभी फसल 
उसको लाभ ना मिलता 
पर ना जाने किस आशा में 
हर रोज धूप में जलता.

कभी बाढ़ और कभी अकाल 
आते हैं उसे सताने 
पर किस्मत का मारा वह 
बस मेहनत करना जाने. 

कर्ज में पैदा होता है 
और कर्ज में ही मर जाता है 
माँ धरती का सच्चा बेटा 
कितने दुःख सह जाता है.

सबको जीवन देने वाले 
के घर में भी अन्न के लाले 
यह विडंबना कैसी है 
अब तू ही बता, ओ ऊपर वाले! 

Monika Jain ‘पंछी’ 

Indian economy is agriculture economy. So farmers play the important role in our country. He works hard in his fields whole the day without caring of summer, winter, rain etc. His life is full of difficulties and problems. It is said ‘He is born in debt, lives in debt and dies in debt.’ His crops are on the mercy of rain. Sometimes flood and sometimes drought destroy all his hard work. For the overall development of our nation the economic development of farmers and agriculture is very much needed. When farmers will prosper our country will prosper. So It is the duty of our government to give utmost attention to the problems of our farmers. 

The above hindi poem tells us about the struggling life of farmers. 


Thursday, November 7, 2013

Prerak Prasang of Mahatma Gandhi in Hindi


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(1) 

एक बार गांधीजी एक विद्यालय में गए. उस समय वे केवल लंगोटी ही पहनते थे. विद्यालय का एक बच्चा उनसे कुछ पूछना चाहता था. लेकिन उनके टीचर ने उसे चुप करवा दिया. गांधी जी ने यह देख लिया. वे उस विद्यार्थी के पास पहुंचे और पूछा, ‘तुम कुछ कहना चाहते हो ? ‘ बालक ने कहा, ‘हाँ ! आपने कुर्ता क्यों नहीं पहन रखा है ? मैं अपनी माँ से कहूँगा कि वह आपके लिए कुरता सिल दें. आप पहनोगे ना ?’ 

गांधी जी ने कहा, ‘ मैं जरुर पहनूंगा लेकिन मैं अकेला नहीं हूँ. ‘ बालक ने कहा, ‘ तब तो मैं दो कुर्ते सिलवा दूंगा. ‘ बापू बोले, ‘ मेरे चालीस करोड़ भाई-बहन हैं. क्या तुम्हारी माँ इतने कुर्ते सिल सकती है ?’ 

उस समय हमारे देश की जनसँख्या चालीस करोड़ थी. बापू बच्चे की पीठ थपथपाकर आगे बढ़ गए. 

(2) 

एक बार गांधीजी आश्रम में सूत काट रहे थे. अचानक एक जरुरी काम आ जाने की वजह से उन्हें जाना पड़ा. उन्होंने अपने एक सहयोगी से कहा, ‘ सूत के तारों को गिनकर एक तरफ रख देना और प्रार्थना से पहले मुझे संख्या बता देना. ‘ सहयोगी ने हाँ कह दिया. आश्रम में शाम को सभी अपने काते हुए सूतों की संख्या बताते थे. 

सहयोगी ने उनका काम नहीं किया और जब गांधी जी का नाम पुकारा गया तो वे सूतों की संख्या नहीं बता पाए. गांधी जी बहुत गंभीर हो गए. उन्होंने कहा, ‘ आज मैंने अपना कार्य किसी और के भरोसे छोड़ दिया. मैं मोह में था. मुझे लगा वे मेरा काम कर देंगे. मुझे अपना कार्य स्वयं ही करना चाहिए था. मैं अब कभी ऐसी गलती नहीं करूँगा. 

(3)

जब गाँधी जी छोटे थे तब एक बार उन्होंने अपने भाई का सोना चुरा लिया था. लेकिन उनके इस कार्य का उनके बाल मन पर इतना बोझ पड़ा कि वे विचलित हो गए. उन्होंने अपने पिता को एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने सारी सच्चाई स्वीकार कर ली. पिताजी ने जब पत्र पढ़ा तो वे बहुत नाराज हुए पर गाँधी जी के सत्य को स्वीकार करने के साहस के कारण पिता ने उन्हें माफ़ कर दिया. गांधीजी का कहना था कि अगर आपसे कोई अपराध या गलती हो भी गयी है तो उसे स्वीकार कर लें. सत्य स्वीकार करने से कोई छोटा नहीं होता बल्कि यह उसका बड़प्पन होता है. 

(4) 

गांधीजी का नाम मोहनदास था और उनकी माँ पुतलीबाई उन्हें प्यार से मोनिया कहकर बुलाती थी. मोहन अपनी माँ से बहुत प्यार करता था और उनकी हर बात ध्यान से सुनता था. उनके घर में एक कुंआ था. कुएं के चारों ओर पेड़-पौधे लगे थे. बच्चों को कुएं की वजह से पेड़ों पर चढ़ने की मनाही थी. लेकिन मोहन फिर भी पेड़ पर चढ़ जाता था. एक दिन मोहन के बड़े भाई ने मोहन को कुएं के पास वाले पेड़ पर चढ़ा हुआ देख लिया. उन्होंने मोहन को पेड़ से उतरने को कहा पर मोहन नहीं उतरा. भाई ने गुस्से में मोहन को चांटा मार दिया. 

रोता हुआ मोहन माँ के पास गया और बोला, ‘ माँ बड़े भैया ने मुझे चांटा मारा. आप भैया को डांट लगाओ.’

माँ काम में व्यस्त थी. मोहन माँ से बार- बार भैया के मारने की बात कहता रहा. माँ ने परेशान होकर कहा, ‘ उसने तुझे मारा है न ? जा तू भी उसे मार दे. मुझे अभी तंग मत कर मोनिया. ‘ 

आंसू पोंछते हुए मोहन ने कहा, ‘ माँ यह तुम क्या कह रही हो. तुम तो हमेशा कहती हो कि बड़ों का आदर करना चाहिए. तो मैं भैया पर हाथ कैसे उठा सकता हूँ ? हां तुम भैया से बड़ी हो इसलिए तुम भैया को समझा सकती हो कि वे मुझे ना मारे.’ 

मोहन की बात सुनकर माँ को अपनी भूल का अहसास हो गया. काम छोड़कर उन्होंने अपने बेटे मोहन को गले से लगा लिया. उनकी आँखों में ख़ुशी के आंसू थे. वे बोली, ‘ तू मेरा राजा बेटा है, मोनिया. आज तूने मुझे मेरी भूल बता दी. हमेशा सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलना मेरे लाल.’ 

(5) 

जब कराडी गाँव में नमक सत्याग्रह पहुंचा तो सुबह-सुबह गाँव वालों ने एक जुलूस निकाला. सबसे आगे स्त्रियाँ थी जिनके हाथ में राष्ट्रीय ध्वज था. बाजे भी बज रहे थे. लोगों के हाथों में फल-फूल और पैसे भी थे. 

लोगों ने आकर गांधीजी को प्रणाम किया और सारे उपहार उनके चरणों में रख दिए. गांधीजी ने पूछा , ‘ तुम लोग बाजे क्यों बजा रहे हो ? ‘ 

लोगों ने कहा, ‘हमारे गाँव में पीने के पानी का अकाल रहता है पर आपके आने से इस बार कुओं में पानी आ गया है. इसलिए हम लोग बाजे बजा रहे हैं.’ 

गांधीजी अपनी मुद्रा कठोर करते हुए बोले, ‘ मेरे आने और पानी का क्या सम्बन्ध है ? ईश्वर पर मेरा अधिकार नहीं है. उसके लिए जो मूल्य आपकी वाणी का है वहीँ मेरी वाणी का भी है. अगर किसी डाल पर कौआ बैठे, और डाल टूट जाए तो तुम कहोगे कि कौवे की वजह से डाल टूट गयी. कुओं में पानी आने के कई कारण हो सकते हैं. उस सत्य को जानो.’

How are these Prerak Prasang and Incidents of Mahatma Gandhi 's  Life ?

Wednesday, October 30, 2013

Lal Bahadur Shastri Stories in Hindi


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Lal Bahadur Shastri : Life Incidents and Stories / Prerak Prasang

(1) सस्ती साड़ियाँ 

एक बार लाल बहादुर शास्त्री जी एक कपड़े की दूकान पर साड़ियाँ खरीदने गए. शास्त्री जी को देखकर दुकानदार बहुत खुश हुआ. उसने शास्त्री जी का बहुत आदर सत्कार किया. शास्त्री जी ने दूकान के मालिक से कहा, ‘ मैं जल्दी में हूँ. मुझे चार-पांच साड़ियाँ चाहिए.’ 

दूकान का मालिक शास्त्री जी को महंगे-महंगे दामों की एक से बढ़कर एक साड़ियाँ दिखाने लगा. शास्त्री जी ने कहा, ‘ भाई, मुझे इतनी कीमती साड़ियाँ नहीं चाहिए. कम दाम वाली साड़ियाँ दिखाओं.’ 

इस पर मालिक बोला, ‘ हमारा तो सौभाग्य है कि आप हमारी दूकान पर पधारे. आप सब कुछ अपना ही समझिये. दाम की तो कोई बात है ही नहीं. ‘ शास्त्री जी उनका आशय समझ गए. 

शास्त्री जी ने कहा, ‘ मैं तो कीमत देकर ही कुछ भी खरीदूंगा. तुम मेरी बात पर ध्यान दो और मुझे कम दाम वाली साड़ियाँ ही दिखाओ और सबके दाम भी बताते जाओ.’ 

तब मैनेजर ने थोड़ी सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. पर शास्त्री जी बोले, ‘ ये साड़ियाँ भी मेरे लिए महँगी है. इससे भी कम कीमत की साड़ियाँ दिखाओ. ‘ 

दूकान के मालिक को इतने कम दाम की साड़ियाँ दिखाने में संकोच हो रहा था. शास्त्री जी यह भांप गए. वे बोले, ‘ दूकान में जो सबसे कम कीमत की साड़ियाँ हैं, वही साड़ियाँ मुझे बताओ. ‘ 

अंततः मैनेजर ने उनकी इच्छानुसार सबसे सस्ती साड़ियाँ दिखाना शुरू किया. शास्त्री जी ने उनमें से कुछ साड़ियाँ चुनी और उनकी कीमत चुका कर चले गए. शास्त्री जी के जाने के पश्चात् वहां उपस्थित सभी कर्मचारी और ग्राहक उनकी सादगी की चर्चा करते हुए उनके प्रति श्रद्धा से भर उठे. 

(2) पक्षपात न किया जाए 

जब शास्त्री जी गृह मंत्री थे वे इलाहबाद में रहते थे. ऐसे समय जब नेता सरकारी सुविधाएँ प्राप्त करने के लिए मारामारी करते हैं, यह हैरान करने वाली बात थी कि लाल बहादुर शास्त्री जी किराये के मकान में रहते थे. इस कारण उन्हें ‘बिना मकान का गृहमंत्री’ कहा जाता था. 

एक बार मकान मालिक को मकान की आवश्यकता थी. इसलिए उन्होंने अपना निवास स्थान खाली कर दिया. किराये पर दूसरा मकान लेने के लिए उन्होंने आवेदन पत्र भरा. बहुत समय बीत गया पर शास्त्री जी को मकान नहीं मिला. उनके एक मित्र ने अधिकारीयों से पता लगवाया. अधिकारीयों ने जानकारी दी कि 176 आवेदकों के नाम शास्त्री जी से पहले अंकित है और शास्त्री जी का कड़ा आदेश है कि उनका आवेदन पत्र जिस क्रम में दर्ज है उसी क्रम में उन्हें मकान आवंटित किया जाए. उनके पद को देखते हुए किसी भी तरह का पक्षपात ना किया जाए. 

How are these short hindi stories and incidents ( prerak prasang ) of Lal Bahadur Shastri Ji ‘s life ? 


Tuesday, October 29, 2013

Mahatma Gandhi Stories in Hindi



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Mahatma Gandhi Life Incidents and Stories

(1) छूत-अछूत

गांधी जी के पिता का ट्रांसफर जब पोरबंदर से राजकोट हुआ था तब राजकोट में उनके पड़ोस में उका नाम का एक सफाई कर्मी काम करता था. गांधीजी उका को बहुत पसंद करते थे. एक बार किसी अवसर पर गांधीजी को मिठाई वितरण का कार्य सौंपा गया था. गांधीजी मिठाई लेकर सबसे पहले उका के पास गए. उका गांधीजी से दूर होते हुए बोला, ‘मैं अछूत हूँ. मुझे मत छुईये.’ गाँधी जी ने उका का हाथ पकड़ा और यह कहकर मिठाई थमा दी, ‘अछूत कोई नहीं होता, हम सब इंसान हैं. ‘ 

माँ पुतली बाई को जब इस बारे में मालूम पड़ा तो उन्होंने गांधीजी को डांट लगायी और कहा, ‘जाओ नहा कर आओ. तुम्हे नहीं पता उका अछूत है.’ गांधीजी ने कहा, ‘ माँ साफ़ सफाई करना कोई बुरा कार्य तो नहीं है. मैंने तो सुना है कि भगवान् श्री राम ने भी गुह नामक अछूत को गले लगाया था और रामायण को तो हमारे धर्म में भी माना जाता है. मैं तो बस समाज से छूत-अछूत जैसी बुरी धारणाओं को हटाना चाहता हूँ. 

(2) पैसे का महत्त्व 

गाँधी जी जब अफ्रीका में थे तब उनके पास उनका परपोता आया हुआ था. गांधीजी ने एक नयी पेंसिल अपने परपोते को दी. लिखते-लिखते जब पेंसिल छोटी हो गयी तो बच्चे ने सोचा कि अगर मैं इस पेंसिल को फ़ेंक दूँ तो मुझे नयी पेंसिल मिल जायेगी. ऐसा सोचकर उसने पास ही की झाड़ियों में वह पेंसिल फ़ेंक दी. 

उसने गांधीजी से नयी पेंसिल मांगी. गांधीजी ने उसे पुरानी पेंसिल लाने को कहा. बच्चे ने कई बहाने बनाये पर आखिरकार उसे झाड़ियों से ढूंढ कर वह पेंसिल लानी पड़ी. पेंसिल देखकर गांधीजी ने कहा, ‘अभी भी यह पेंसिल किसी ना किसी के काम आ सकती है.’ बच्चा समझ गया और उसने उसी पेंसिल से लिखना शुरू कर दिया. 

गांधीजी जानते थे कि देश में ऐसे कई परिवार हैं जिन्हें दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता. पढ़ना - लिखना तो बहुत दूर की बात थी. इसलिए गांधीजी पैसे का महत्त्व बहुत अच्छे से जानते और समझते थे. 

(3) चोर भी तो भूखा है 

गांधीजी के आश्रम में एक बार एक चोर आ गया था. आश्रम के निवासियों ने उसे एक कोठरी में बंद कर दिया. सुबह जब गांधीजी नाश्ता करने बैठे तब चोर को उनके सामने लाया गया. गांधीजी ने आश्रम वासियों से पूछा , इसे नाश्ता करवाया या नहीं ? पहले इसे नाश्ता करवाओ फिर मेरे पास लाओ. ‘ एक व्यक्ति ने आश्चर्य से पूछा , ‘ चोर को नाश्ता ? ‘ 

गांधीजी ने कहा, ‘ चोर से पहले ये भी एक इंसान है और इसे भी भूख लगी होगी.’ 

(4) कर्तव्य 

गांधीजी एक बार रेल में यात्रा कर रहे थे. पास ही में बैठे एक व्यक्ति ने डिब्बे में ही थूंक दिया. गांधीजी को यह अच्छा नहीं लगा पर वे चुप रहे. उन्होंने कुछ कागज के टुकड़े उठाये और गंदगी को साफ़ कर दिया. उस व्यक्ति ने सोचा कि यह मुझे नीचा दिखाना चाहता है इसलिए उसने फिर से थूंक दिया. गांधीजी ने भी वापस साफ़ कर दिया. यह सिलसिला लगातार चलता रहा. जब स्टेशन आ गया तो लोगों की भीड़ गांधीजी की जय जयकार करते हुए उनके डिब्बे की तरफ बढ़ी. थूंकने वाले आदमी को जब पता चला कि जो व्यक्ति थूंक को साफ़ कर रहा था वह गांधीजी है और लोग उनकी जयकार कर रहे हैं तो उसे बहुत पछतावा हुआ. उसने गांधीजी के पैरों में गिरकर माफ़ी मांगी. गांधीजी ने उससे कहा, ‘मैंने तो बस अपने कर्तव्य का निर्वहन किया है. अगर कभी तुम्हारे सामने भी ऐसी स्थिति आये तो तुम भी अपने कर्तव्य को याद रखना. ‘ 

How are these short hindi stories and incidents ( prerak prasang ) of mahatma gandhi's life ? 

Friday, October 25, 2013

Success Story in Hindi


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एक समय की बात है. लन्दन की एक बस्ती में एक अनाथ बालक रहता था. वह अखबार बेचा करता था और उससे ही अपना गुजारा करता था. कुछ समय पश्चात् उसे जिल्दसाज की एक दूकान पर जिल्द चढ़ाने का काम मिला. उस बालक की पढ़ने में बहुत रूचि थी. जब भी वह पुस्तकों पर जिल्द चढ़ाता था तो जिल्द चढ़ाते-चढ़ाते कुछ महत्वपूर्ण बातें और जानकारियां पढ़ लिया करता था. एक बार जिल्द चढ़ाते समय उसकी नजर विद्युत सम्बन्धी एक लेख पर पड़ी. 

वह लेख पढ़ने लगा. उसे लेख बहुत अच्छा लगा. उसने एक दिन के लिए दूकान के मालिक से वह पुस्तक अपने साथ ले जाने की अनुमति मांग ली और रात भर जाग कर वह लेख और पूरी पुस्तक पढ़ डाली. पुस्तक से वह बहुत प्रभावित हुआ. उसके मन में भी प्रयोग करने की जिज्ञासा जागी. इसके लिए वह विद्युत सम्बन्धी छोटी मोटी वस्तुएं इधर-उधर से जुटाने लगा ताकि अध्ययन और परीक्षण कर सके. बालक की यह रूचि देखकर एक ग्राहक उससे बहुत प्रभावित हुआ. उस ग्राहक को भी विज्ञान में बहुत दिलचस्पी थी. वह एक दिन उस बालक को भोतिक शास्त्र के एक प्रसिद्द विद्वान डेवी का भाषण सुनाने ले गया. बालक ने डेवी की सभी बातों को बहुत गौर से सुना और उन्हें नोट कर लिया. इसके बाद बालक ने भाषण की समीक्षा की और कुछ परामर्श लिखकर डेवी के पास भेज दिए. 

डेवी को बालक के दिए परामर्श बहुत अच्छे लगे. उन्होंने बालक को अपने पास बुला लिया और उसे यन्त्र व्यवस्थित करने का कार्य सौंप दिया. बालक उनके सहयोगी की भूमिका भी निभाता और उनके बाकी कार्य भी करता. दिन भर वह काम में व्यस्त रहता और रात्रि में पढ़ाई करता. कितना भी कार्य हो और कितनी भी थकान हो पर उसके चेहरे पर एक शिकन तक ना आती. वह भोतिकी और विशेष रूप से विद्युत के क्षेत्र में बहुत कुछ करना चाहता था. 

अपने कड़े परिश्रम और लगन के बल पर उसने अपना सपना पूरा किया. वह एक महान वैज्ञानिक बना जिसे हम माइकल फैराडे के नाम से जानते हैं.

The above real hindi story tell us how an orphan and poor boy became a successful scientist Michael Faraday with his determination, will power and hard work. This true story is quite inspirational for students to know the secret of success. With the strong will power, determination and hard work we can achieve anything in our life. 



Information About Elephant in Hindi


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  • हाथी जमीन पर रहने वाला सबसे बड़ा स्तनपायी प्राणी है.
  • मुख्य रूप से हाथी एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के बड़े बड़े मैदानों में पाए जाते हैं. 
  • हाथी की तीन प्रजातियाँ होती है. उनमें से केवल दो प्रजातियाँ ही जीवित हैं : ऍलिफ़स तथा लॉक्सोडॉण्टा तथा तीसरी प्रजाति मॅमथस विलुप्त हो चुकी है. 
  • हाथी की त्वचा स्लेटी रंग की होती है. जिस पर झुर्रियां पायी जाती है. एक व्यस्क हाथी की त्वचा की मोटाई 3 सेंटीमीटर तक होती है. आश्चर्य की बात यह है कि यह त्वचा बेहद कोमल होती है और मक्खी, मच्छर, कीड़े, मकोड़े आदि इसे आसानी से भेद सकते हैं. कुछ हाथी सफ़ेद रंग के भी होते हैं जिन्हें एल्बिनो कहा जाता है. इन हाथियों को पवित्र माना जाता है और इनसे कोई काम नहीं लिया जाता. 
  • सभी प्रजातियों में हाथी दांत पाए जाते हैं जिनकी सहायता से हाथी सख्त, खनिज युक्त मिट्टी को खाने से पहले तोड़ता है. हाथी में लगभग 28 दांत होते हैं जिनमें से दो छेदक दांत लम्बे होकर उसके मुंह से बाहर की तरफ निकले होते हैं. जीवन पर्यंत ये बढ़ते रहते हैं. पेड़ों की झाड़ियों को उखाड़ने और अन्य हाथियों से लड़ाई करने में ये दांत काम आते हैं. 
  • हाथी के पैर मोटे स्तंभों या खम्बों की तरह होते हैं. खड़े रहने के लिए इन्हें बहुत ही कम शक्ति की आवश्यकता होती है. हाथी खड़े-खड़े ही आराम करते हैं. ये अपने कानों के द्वारा ऊष्मा का विकिरण करते हैं.
  • हाथी का सबसे विशेष अंग उसकी सूंड होती है. यह हाथी के नाक और उसके ऊपरी होठ का ट्यूब जैसी आकृति में विस्तार है. सूंड की लम्बाई 10 फीट तक हो सकती है. ऊपर से नीचे की ओर सूंड की चौड़ाई कम होती जाती है और आखिर में छोटा सा छिद्र रह जाता है. हाथी की सूंड नमक, कैल्शियम और डेन्टाइन से बनी होती है. शरीर को ठंडा रखने के लिए हाथी अपनी सूंड की मदद से ही कीचड़ और मिट्टी अपने शरीर पर डालता है. जब हाथी सतर्क होता है तो अपनी सूंड से चिंगाड़ने की आवाज़ निकालता है. हाथी की सूंड उसके हाथ की तरह उपयोग में आती है. इसकी सहायता से यह एक सिक्के जैसी छोटी वस्तु से लेकर 600 पौंड ( 272 kg ) वजन तक के लकड़ी के गट्ठर भी आसानी से उठा लेता है. गंध और श्वास के लिए भी सूंड ही काम आती है. 
  • हाथी मुख्य रूप से घास, पेड़ों की छाल और पत्तियां खाता है. हाथी 160 - 350 पौंड अर्थात 72 से 158 किलोग्राम भोजन रोज लेता है. घास और शाखाओं से पत्तियां तोड़ने में हाथी अपनी सूंड का उपयोग करता है और सूंड की मदद से ही भोजन मुंह में डालता है. पानी पीने के लिए हाथी पहले सूंड में पानी भरता है फिर इसे फुहार के द्वारा मुंह में छोड़ता है.
  • हाथी एक सामाजिक प्राणी है और हाथी समूह में रहते हैं. झुण्ड में ज्यादातर मादाएं होती है और बुजुर्ग तथा प्रभावशाली मादा ही समूह का नेतृत्व करती है. नर हाथी जब तक लैंगिक रूप से प्रोढ़ नहीं होता वह भी इसी समूह का हिस्सा होता है. लैंगिक रूप से प्रोढ़ हो जाने पर उसे समूह से निकाल दिया जाता है. झुण्ड की सभी मादा हाथी बहुत एकता से रहती है और एक दूसरे की सुरक्षा भी करती हैं. जब ये भोजन और पानी की खोज में निकलती है तो झुण्ड के सदस्यों से संपर्क में रहने के लिए एक कम डेसिबल की आवाज़ जिसे मनुष्य के कान नहीं सुन सकते का प्रयोग करती हैं. 
  • नर हाथी वनों में अकेले ही घूमते हैं या फिर अन्य नर हाथियों के साथ समूह बना लेते हैं. 
  • मादा हाथी को गाय कहा जाता है. नर हाथियों को बैल कहा जाता है.
  • हाथी का गर्भकाल जमीनी जीवों में सबसे लम्बा 22 महीनों का होता है. अधिकांशतः बच्चे वर्षा ऋतुके अंतिम दिनों में पैदा होते हैं. हाथी के बच्चों को बछड़ा/बछड़ी कहा जाता है और जन्म के समय उनका वजन 200 पौंड ( 90 किलोग्राम ) होता है. इसकी ऊंचाई 1 मीटर तक होती है. नर चौदह से पंद्रह वर्ष की आयु में यौन परिपक्वता पा लेते हैं और मादा 15-16 वर्ष की आयु में पहले बच्चे को जन्म देती है. 
  • हाथी कुशाग्र बुद्धि होते हैं. इनकी दृष्टि कमजोर होती है. श्रवण शक्ति अच्छी और घ्राण शक्ति बहुत अच्छी होती है. पानी की गंध को यह 4.5 किलोमीटर की दूरी से ही सूंघ सकता है. हाथी रोजाना 70 से ज्यादा तरह की ध्वनियां तथा 160 दृश्य व स्पर्शनीय संकेतों का उपयोग करता है. 
  • जब हाथी गुस्से या डर में होता है तो थोड़ी दूरी तक वह 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ता है. लम्बी दूरी की यात्रा के समय हाथियों का झुण्ड 16 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चलता है. 
  • हाथी को पानी बहुत पसंद होता है. इन्हें अक्सर नदियों और तालाबों में नहाते हुए देखा जा सकता है. हाथी अच्छे तैराक भी होते हैं. ये नियमित रूप से नहाते हैं.
  • हाथी की औसत आयु 70 वर्ष होती है.
  • हाथी एक संकट ग्रस्त प्रजाति है. पर्यावास के विनाश और मनुष्य द्वारा शोषण के कारण हाथी विलुप्प्त प्राय है. हाथी दांतों की वजह से इनका अवैध शिकार किया जाता है.

Did you like these interesting and amazing informations and facts about elephants.


Wednesday, October 23, 2013

Positive Thinking Story in Hindi


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सोच का असर 


एक बार एक गाँव की सीमा पर एक घोड़े पर सवार यात्री पहुंचा. वहां खेत में काम कर रहे किसान को देखकर उसने पूछा, ‘भाई, यह गाँव कैसा है ? मुझे बहुत दूर तक जाना है इसलिए कुछ दिनों के लिए मैं यहाँ रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान ने यात्री से पूछा, ‘ आप यहाँ से पहले जहाँ से आये हैं वह जगह कैसी थी ? ‘ 

यात्री ने उत्तर दिया, ‘ इससे पहले मैं एक गाँव में ही था. वहां के लोग बड़े ही झगड़ालू थे. बात-बात में लड़ना उनकी आदत थी. इसलिए मैं वहां ज्यादा समय के लिए नहीं रुक सका. ‘ 

किसान ने कहा , ‘मेरी सलाह है आपको कि आप यहाँ भी ना रुके क्योंकि यहाँ के लोग तो और भी ज्यादा बुरे हैं. ‘ यात्री यह सुनकर तुरंत वहां से चला गया. उसके जाने के कुछ समय पश्चात एक और यात्री वहां आया. उसने भी किसान से यही पूछा , ‘यह गाँव कैसा है ? क्या मैं यहाँ रुक सकता हूँ ? ‘ किसान ने उससे भी यही पूछा कि आप जिस जगह से आये हैं वह जगह कैसी थी ? यात्री ने कहा , ‘वह गाँव और वहां के लोग बहुत अच्छे थे. अगर मुझे आगे ना जाना होता तो मैं वहीं रुक जाता. मुझे दूर तक जाना है इसलिए बीच में रुकना चाहता हूँ. ‘ किसान तुरंत बोला, ‘ मित्र आपका इस गाँव में स्वागत है. यहाँ के लोग और भी ज्यादा अच्छे हैं. आप यहाँ रुक सकते हैं. ‘ 

पास ही के खेत में एक और किसान काम कर रहा था. उसने पहले किसान से पूछा, ‘भाई, तुमने पहले यात्री को तो गाँव के लोगों का बर्ताव बुरा बताया और दुसरे को अच्छा. ऐसा क्यों ? पहले किसान ने उत्तर दिया, ‘ भाई, पहला यात्री नफरत लेकर आया था इसलिए वह जहाँ भी जाएगा नफरत ही फैलाएगा. दूसरा अपने साथ प्रेम लेकर आया था इसलिए जहाँ भी जाएगा और रहेगा हमेशा प्रेम ही देगा. अगर पहला यात्री यहाँ रुकता तो उसका हमारे गाँव पर बुरा प्रभाव पड़ता इसलिए मैं नहीं चाहता था कि वह यहाँ रुके. 

दूसरा किसान पहले की बात से सहमत हो अपने काम में लग गया. 

The above hindi story tell us the importance of positive thinking and positive attitude in our life. When we start taking everything in a positive way, then we start having positive results. The people having positive attitude are loved and respected by everyone. Because wherever they go they spread love, peace and happiness. On the other hand the people with negative thinking always spread hate and envy. Its always good to keep yourself away from such people.

Note : The above story is not my own creation. 

Tuesday, October 22, 2013

Poem on Moon in Hindi


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मेरा चाँद 

ऐ चाँद ! 
क्या मेरा एक काम करोगे ?
वो जो दूर चला गया है मुझसे 
क्या उसकी एक झलक मुझे ला दोगे ? 

देखो ना ! कितने साल हो गए हैं 
उसे देखे हुए, उससे मिले हुए 
एक अरसा हो गया 
उससे लड़े और झगड़े हुए. 

आज मुझे उससे जुड़ी हर बात 
बहुत याद आ रही है 
सबके पास होगा अपना चाँद 
और मेरे हिस्से आई बस ये तन्हाई है. 

तुम तो गवाह हो ना 
हर उस रात के 
जब हाथों में डाले हाथ 
अँधेरी सुनसान राहों पर 
हम बेख़ौफ़ निकलते थे 
रास्ते हो जाते थे कितने छोटे 
जब प्यार के दो मुसाफिर 
हर कदम साथ-साथ चलते थे. 

वह एक दम शांत था 
बिल्कुल तुम्हारे जैसा 
इसलिए लड़ाई का बहाना 
हमेशा मुझे ही ढूंढना होता था. 
और लड़ने-झगड़ने के बाद 
बच्चों की तरह मेरा ही रोना छूटता था. 

बस वो भीगे पल और उसका प्यार भरा स्पर्श 
बयां करना चाहूँ तो भी नहीं कर सकती 
प्यार बस किया जा सकता है महसूस 
इससे ज्यादा कुछ और मैं कह भी नहीं सकती.

याद करने लगी जो सारी बातें 
और कर दी बयां जो सारी मुलाकाते 
तो सच आज फिर से रों पडूँगी 
मचल रहा है कब से जो यादों का तूफ़ान 
बन कर झरना आज मैं बिखर ही पडूँगी. 

पढ़ेगा जब वो मेरी तड़प 
जानती हूँ आँखें उसकी भी भीग जायेगी 
और उसकी आँखों में जो आये आंसू 
तो सच मेरी जान ही निकल जायेगी.

ऐ चाँद बस तुम इतना कर दो 
या तो मेरा चाँद ले आओ 
या फिर आज मेरे लिए अमावस कर दो 
क्यूंकि आज की रात जो तुम्हे देखा 
तो अपना दर्द छिपा नहीं पाउंगी 
गर ना आया मेरा चाँद 
तो सच आज मैं टूट ही जाउंगी. 

Monika Jain ‘पंछी’ 

How is this poem on Moon of Karva Chauth, Love, Separation and Memories ?

Friday, October 18, 2013

Poem on Mind in Hindi


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जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

निमिष मात्र में
जग का कोना नापनेवाला 
द्रुतिगत मन.

गगन भेदकर
अंतरिक्ष में 
स्वछंद विचरने वाला मन.

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

भूतल की गहरायी तक जा 
सहज पैठनेवाला मन.

चपला सा चंचल 
फिर भी 
जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

प्रश्नों का उत्तर देनें में 
तत्पर अरु उत्साही मन.

किंतु आज के प्रश्नों पर 
क्यूँ चुप्पी साधे बैठा मन ?

शायद बहुतेरे प्रश्नों की 
लाज बचाता चुप्पी मन.

जाने क्यूँ गुमसुम है मन ?

By Satyanarayan Singh 


Sometimes our mind becomes very sad, gloomy and serious without any reason. When we try to find the reason, we don’t get any answer. The mind which runs very fast, which is free to roam everywhere in the universe, which is very deep, eager and keen to solve the problems, sometimes becomes completely silent. It may happen when the situation around us are not in our control or we don’t have the answers of the questions arising in our mind like what is the reason of our existence on this earth ? Whats the aim of our life ? etc. 

This beautiful and deep hindi poem ‘जाने क्यूँ गुमसुम है मन’ is written by ‘Satyanarayan ji Singh’ which is near to everyone’s heart. We all face this situation in our life many times. The last five lines of this poetry are very relevant to todays scenario of our country. Today's brutal crimes are beyond our thinking and imagination and sometimes we feel completely helpless and wordless and our mind becomes completely blocked. What you think about this poem ? Feel free to tell us via comments.

Saturday, October 12, 2013

Veer Ras Kavita in Hindi


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हलचल की आस में जीवित हूँ

इन उन्मादों से डरा नहीं
सन्नाटों पे विचलित हूँ
चुभती है शांति कानो में
हलचल की आस में जीवित हूँ.

है श्वासों में हुंकार भरा 
कुतूहल रगों का पानी है
संगीत है बस सैलाबों में
विध्वंसों में लिप्त वाणी है.

लाचारी की बीमारी को
इस बेबस दुनियादारी को
शांति के क्रियाकलापों को
वरदानो को अभिशापों को.

पंखो में दबा के उड़ता हूँ
राखों में बिखर फिर जुड़ता हूँ.

है बैर नहीं अभिमान नहीं
है भूत भविष्य का ज्ञान नहीं
क्रांति की हिलोरे है मस्तक में
ये जीव मेरी पहचान नहीं.

शीलता भाए लाशों को
रक्त में बैचेन गर्मी है
मर्यादा सावंग सी लगती है
फितरत मे अपने बेशर्मी है.

प्रतिहिंसा की है प्यास नहीं
बस नव सृजन पर अर्पित हूँ
चुभती है शांति कानों में
हलचल की आस में जीवित हूँ.

Lavkesh Kumar Singh 

With time we have forgotten the wounds given by the britishers at the time of slavery. But what about the wounds that we are getting even after so many years of independence. Poverty, corruption, biased legal system, unemployment, black money, black marketing, corrupt political system, inappropriate education, inflation, increasing crime rate and many more problems exist in our country and increasing on a rapid pace. Its not the time to sit calm. Its the time of revolution. Only the revolutionary deeds can free us from all these problems. 

These revolutionary poems written by ‘Lavkesh Kumar Singh’ are quite inspirational to light the flame of revolution (kranti). The Veer Ras Kavita ‘हलचल की आस में जीवित हूँ’ reminds me of our freedom fighters and the poem ‘ दोष किसका है ?’ reflects that we are equally responsible for whatever we are facing. If we will strive hard we can achieve anything in this world.