Wednesday, December 28, 2016

Essay on Violence against Women in Hindi

महिला घरेलु हिंसा पर निबंध, लेख. Essay on Violence against Women in Hindi. Status, Condition of Female in India Article, Domestic Abuse Speech, Paragraph.
Essay on Violence against Women in Hindi

नारी कैसे बच पाएगी?

(1)

आज मैं खुश नहीं हूँ। वह औरत जो भयंकर सर्दी में भी अपनी दो-तीन साल की बेटी को साथ में लेकर घर-घर काम करती है; जिसके चेहरे पर मैंने कभी शिकन या थकावट नहीं देखी; हमेशा हँसता मुस्कुराता चेहरा...आज सुबह अचानक आई और बोली मैं गाँव जा रही हूँ, मम्मी से कहो जितने दिन के भी पैसे बने हैं वे दे दें।

मैंने पूछा वापस कब आओगे? अपनी भीगी हुई आँखों को चुराती हुई बोली - एक-दो महीने बाद। मैं समझ गयी कुछ गलत हुआ है। पति ने शाम को उसे और उसकी बच्ची को बहुत पीटा था, इसलिए वह पीहर जा रही थी कभी वापस न आने की सोचकर।

पति ठीक-ठाक कमा लेता है पर एक अँधेरी कोठरी किराये पर ले रखी है जिसमें वह खाने-पीने के जरुरी सामान के अलावा और कुछ नहीं लाता। बेटी जिसे देखते ही किसी का भी प्यार उमड़ आये उसके लिए भी कुछ नहीं। शायद बाहरी औरतों से सम्बन्ध हैं उसके और आये दिन बेटी को भी पीटता रहता है।

अपने थोड़े से पैसों की कमाई से कुछ दिन पहले ही वह अपनी उस छोटी सी कोठरी को सजाने के लिए स्टील के बर्तन खरीद कर लायी थी। कितनी खुश थी उस दिन! लेकिन आज पहली बार उसकी भीगी हुई आँखें देखी। उसके चेहरे की चमक आज नदारद थी, जिसकी जगह मानों सालों की थकावट ने ले ली हो। उस स्वाभिमानी औरत के फैसले का सम्मान करती हूँ, पर कबसे उसकी वो भीगी हुई आँखें मेरे दिल और दिमाग में छाई हुई है। मन बहुत बेचैन है। (26/12/2013)

(2)

उस देश में नारी कैसे बच पाएगी जहाँ जन्म लेने से पहले ही उसे कोख में इसलिए मार दिया जाता है क्योंकि वह एक लड़की है और ये न हो पाया तो उसे कचरे के ढेर में फेंक दिया जाता है। जहाँ विवाह के बाद भी उसे इसलिए जला दिया जाता है क्योंकि वह दहेज लोभियों की भूख शांत नहीं कर पाती।

उस देश में नारी स्वतंत्रता की बातें बेमानी है जहाँ सड़क पर कई गिद्ध उस पर दृष्टि जमाए हुए हैं और मौका मिलते ही उसे नोच खाते हैं। जहाँ राजनेता कहते हैं कि जब मर्यादा का उल्लंघन होता है तो सीता हरण होता है। कोई मुझे ये बताए कि सीता जी ने अपने जीवन में कौनसी मर्यादा का उल्लंघन किया? बल्कि उन्होने तो आजीवन अपने धर्म की अनुपालना की।

उस देश में न्याय की आशा करना बेकार है जहाँ की पुलिस न्याय की गुहार लगाने वाले पीड़ित को इतनी मानसिक प्रताड़ना देती है कि वह अपने साथ हुए अन्याय को नियति मानकर चुपचाप स्वीकार कर लेता है। जहाँ साधु बने बहरूपिये दोषियों को माफ़ करने और पीड़िता को दोषी कहने का साहस रखते हैं। ताली एक हाथ से नहीं बजती ये कहने वाले आसाराम जी के कहने का तो यही तात्पर्य है कि लड़की खुद जाती है बलात्कारियों के पास और कहती है, 'मेरा बलात्कार करो'!

जिस देश में शीर्ष पर बैठे लोग इतने संवेदना शून्य हो और उनकी मानसिकता इतनी संकीर्ण और कलुषित हो चुकी हो कि वे अपराध का ख़ात्मा कैसे हो ये सोचने की बजाय मुद्दे को लड़की के कपड़ों की साइज़ में उलझा देते हो या क्षेत्रवाद की राजनीति चमकाने लगते हो ऐसे देश में नारी नहीं बच सकती...बिल्कुल भी नहीं। (08/01/2013)

By Monika Jain ‘पंछी’

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