Friday, January 25, 2013

Poem on Education System in Hindi


Keywords : Poem on Education System in Hindi, Modern Purpose of Education in India, Adhunik Shiksha Pranali, National Education Day, Shiksha Diwas par Kavita, Poetry, Shayari, Slogans, Sms, Messages, Educating Humanity, हिंदी कविता, शिक्षा दिवस, आधुनिक शिक्षा प्रणाली, शायरी, Poems


  चाहतें
जो रोज़ अंकुरित होती रही

जीव विज्ञान पढ़कर

पंछियों की तरह 


भौतिकी,जो प्रोपेलेंट की तरह 

उकसाती रही

प्रकाश की गति प्राप्त करने को 

पर मैं उलझता रहा

जैविक रसायनिक प्रक्रियायों में

कोशिश करता रहा समझने की 

सिद्धांतों को पुन: प्रतिपादित करने की 

व्याख्यायित करता रहा सूत्रों को
और हल करता रहा गणित की 
अवकल समीकरणों को 
ज्यामिति की परिधियों ने कोशिश की
संक्षेपित करने की, मेरा आकाश
त्रिकोणमिती ने बाँट डाला
मेरी सुबहों और शामों को
और लगा रहा सत्यापित करने में 
अनमने सम्बन्धों को
कि धकेल दिया गया मैं 
मानवों द्वारा प्रचारित 
छद्म प्रौद्योगिकी की दुनिया में
मेरा साहित्य रोता है
शिक्षित होना था मुझे 
संसाधन नहीं बनना था 
अगर यही है इंसानियत
तो छोड़ दो मेरे लिए कुछ जंगल के टुकड़े 
मुझे जीविका के लिए
इन्सान नहीं बनना था

Randhir 'Bharat' Chaudhary