Tuesday, January 22, 2013

Poem on Fear in Hindi


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कितनी अजीब बात है ना 
तुम कहते हो, तुम्हे डर लगता है 
कि क्या तुम मुझे खुश रख पाओगे.
और मैं कहती हूँ , मुझे डर लगता है 
कि क्या मैं तुम्हें खुश रख पाऊँगी .
हमारा ऐसा सोचना 
क्या दर्शाता है ?
यह कि हमें एक दुसरे पर ज्यादा भरोसा है 
या यह कि हमें खुद पर विश्वास नहीं 
यह कि हमें एक दूसरे की ज्यादा परवाह है 
या यह कि हमें अपने प्यार पर एतबार नहीं.
एक अजीब सी उलझन में हूँ 
सुना है जहाँ प्यार होता है वहाँ डर नहीं होता 
और जहाँ डर है वहाँ प्यार नहीं 
इसलिए डरती हूँ हमारे इस डर से 
कि कहीं यह हमारे प्यार पर हावी न हो जाये.

Monika Jain 'पंछी'