Wednesday, January 23, 2013

Poem on Marriage in Hindi


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 मुझे माफ करना प्रिय !
पर साथ रहने के लिए
हमारा प्रेम में होना काफी नहीं 
हमे विवाह करना होगा
लेनी होगी आज्ञा समाज की।
हाँ उसी समाज की 
और समाजवादियों की
जहां कई बेटियाँ 
ताकि बचाया जा सके 
शादी का खर्च।
जहां कई बेटियों को
पढ़ने का समान अवसर 
नहीं दिया जाता 
क्योंकि उन्हे ब्याह कर 
पराए घर जाना है।
जहां कई बेटियाँ 
जिंदा जला दी जाती है
और कुछ बेटियाँ 
अपने सपने जला कर
जीने को विवश कर दी जाती है।
मर्जी से जीने की 
क्योंकि उसके पिता और भाइयों के 
नज़र के पहरे के साथ 
कई भेड़ियों की नज़रें भी घूमती है
और कई तो पहरेदार ही भेडियें हैं 
क्योंकि कभी भी, कहीं भी
अस्मत लूटी जा सकती है उनकी
और समाज स्वीकार कर लेगा 
उन दरिंदों को 
पर कोई दामिनी स्वीकार नहीं इन्हें 
क्योंकि विवाह शोषण के लिए होता है 
शोषितों का विवाह नहीं होता।

 By Randhir 'Bharat' Chaudhary