Monday, February 11, 2013

Poem on Animals in Hindi


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ये जानवर बेहतर है
हम इंसानों से
नहीं करते ये शिकार
अपनी ही जाति के प्राणियों का 
अन्य जीवों पर वार के पीछे भी
होता है मकसद बस सुरक्षा
और पेट की भूख मिटाने का
पर हम मानव भरे हैं 
ईर्ष्या, लालच, द्वेष और स्वार्थ से 
जलते हैं हम अपनों के ही विकास से 
प्रकृति से जुडे ये जीव 
जीते हैं संयमित जीवन 
जितनी हो पेट की भूख 
उतना ही करते हैं भोजन 
पर पैसे का भूखा मानव 
खोंप देता हैं खंजर 
अपने ही भाइयों के सीने में 
जहर भरा है इसके 
खून और पसीने में 
मर गयी है हमारी संवेदना 
खुद को जानवर कहकर 
हम कर रहे हैं जानवरों का अपमान 

Monika Jain 'पंछी'