Poem on Autumn Season in Hindi


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ऋतुएं बदलती रही 
कई बसंत आकर चले गए 
पर मेरे जीवन में आया पतजड़ 
ज्यों का त्यों बना रहा 
मैंने सुना था कई बार 
सुख या दुःख कुछ भी 
स्थायी नहीं होते 
मौसम बदलते हैं
कभी एक से नहीं रहते 
पर ना जाने कब से 
मैंने मौसम को बदलते नहीं देखा 
इस पतजड़ के बाद आया एक भी सावन 
इन सूनी आँखों ने नहीं देखा 
पर खत्म नहीं होगा मेरा इंतजार कभी 
नहीं टूटेगी जीने की आस कभी 
बसंत और सावन आये ना आये 
पर पतजड़ में भी होगी कलियों की बहार कभी


Monika Jain 'पंछी'


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