Sunday, February 3, 2013

Poem on Change in Hindi


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 कुछ मैं बदलूं कुछ वो बदलेगा
 यूँ ही तो सारा जहाँ बदलेगा 
 अँधेरी स्याह कितनी हो रात 
 सुबह यह आसमाँ बदलेगा 
 शर्त यह की राह में थकना नहीं
 हो के मायूस कहीं रुकना नहीं
 कुछ ख़ुशी के फिर तराने भी होंगे 
 सब्र करो यह बोझिल समां बदलेगा 
 मुश्किलें भी सताएंगी खिलाफत भी होगी
 फूल चुनोगे तो कांटो की सियासत भी होगी 
 बदलनी पड़े तो राह बदल लेंगे
 मंजिल मिलेगी बस कारवां बदलेगा.. 
 चैन--अमन की बातें भी होंगी 
 सुकून से भरी रातें भी होंगी 
 लड़ कर भी जाना पड़े तो जायेंगे 
 ये हौसला ये ज़ज्बा कहाँ बदलेगा 

By Suchhit Kapoor 'सुचित'