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Poem on Teacher in Hindi


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ताउम्र मुझे तलाश रही 
एक सच्चे शिक्षक की 
और ना मिलने पर
 मैंने बना ली थी एक धारणा 
कि आसान नहीं है इस युग में 
एक अच्छा गुरु मिल पाना.

पर मैं अबोध ये कहाँ जानती थी 
कि हर रोज मैं मिल रही हूँ 
कई गुरुओं से 
जो रूबरू करवा रहें हैं मुझे 
जीवन के अनभिज्ञ पहलुओं से.

मेरी असफलताएं
क्या नहीं हैं मेरी शिक्षक 
उन्होंने ही तो मुझे दिखाई है 
मेरी वो कमियां 
जहाँ सुधार कर चढ़नी है 
मुझे सफलता की सीढियां.

ये प्रकृति 
ये तो सबसे बड़ी गुरु है 
जिसके हर कण-कण में बिखरी है 
ज्ञान की कड़ियाँ 
जिन्हें जोड़कर बनती है 
रोशनी की एक नयी दुनिया.

हमारे जीवन से जुडा हर व्यक्ति 
हमारा शिक्षक ही तो है 
क्योंकि हर कोई हमें कुछ नया 
सिखा जाता है 
एक दगाबाज भी हमें सच्चाई 
दिखा जाता है.

आज मेरी तलाश खत्म हो गयी है 
किसी एक गुरु की मुझे जरुरत नही है 
मुझे सीखना है जीवन के हर क्षण से 
मुझे पाना है ज्ञान प्रकृति के कण कण से.

Monika Jain 'पंछी' 

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