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Poem on Terrorism in Hindi


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हाँ मैं मिलना चाहती हूँ एक आतंकवादी से 
और पूछना चाहती हूँ कुछ सवाल 
क्यों हैं तुम्हे खून से इतना प्यार 
क्यों करते हो तुम लाशों का व्यापार 
क्या चीखो से भरे शहर 
नहीं करते तुम पर कोई असर 
क्या खून से लथपथ लाशे 
तुम्हारे लिए है बस खेल तमाशे 
बूढ़े बाप से उसका जवान बेटा छीन 
कैसे आती है तुम्हे चैन की नींद 
क्या माँ का सूना आँचल 
नहीं करता तुम्हे घायल 
लोगों को जिंदा जला कर 
बुझा देते हो उनके सपने 
मौत बांटते हो जब तुम 
क्या याद नहीं आते तुम्हें अपने 
खत्म नहीं हुए हैं मेरे सवाल 
पूछूंगी तुमसे मिलकर 
खौफ नहीं है मुझे तुझसे 
बल्कि तरस आता है तुझ पर


Monika Jain 'पंछी'


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