Sunday, April 13, 2014

Story on Determination in Hindi


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(1)

प्रतिक्रिया 

एक व्यक्ति ने नया-नया ही संन्यास लिया था. वह अपने गाँव के बाहर एक तालाब के किनारे रहता था. एक दिन वह सिरहाने पर ईंट लगाकर आराम कर रहा था. तभी कुछ औरतें तालाब पर पानी भरने के लिए आई. एक स्त्री ने संन्यासी को देखकर कहा, ‘ संन्यासी हुआ तो क्या, अभी भी सिरहाना लगाने का मोह है.’ 

संन्यासी ने जब यह सुना तो ईंट हटाकर रख दी और अपने हाथ का ही सिरहाना बनाकर लेट गया. तभी दूसरी स्त्री ने कहा, ‘ ये संन्यासी कितना आलसी है. पास में ईंट रखी है तो भी उसका उपयोग नहीं कर रहा और ऐसे ही सो गया.’ 

संन्यासी ने जब यह सुना तो उसने फिर से ईंट सिरहाने लगा ली. 

तब स्त्रियों ने कहा, ‘यह संन्यासी कितना कमजोर है. इसकी संकल्प शक्ति कितनी क्षीण है. हमारे कहने से ईंट लगाता है और हमारे कहने से ईंट निकालता है. यह संन्यासी कैसे बनेगा.’

Courtesy : Swadhyay Sandesh 

(2)

दृढ़ संकल्प 

एक बार अमरकंका के राजा पद्मनाभ ने द्रौपदी का अपहरण कर लिया था. श्री कृष्ण ने पांडवों से युद्ध करने को कहा. पांडव पराक्रमी व शक्तिशाली थे. पर पांडवों ने सोचा, ‘ आज ऐसा भयंकर युद्ध होगा कि या तो हम जीवित रहेंगे या फिर यह पद्मनाभ.’ 

युद्ध हुआ और उसमें पद्मनाभ जीत गया. पांडवों की हार हुई क्योंकि उनकी संकल्प शक्ति शिथिल थी. 

श्री कृष्ण आगे आये और संकल्प लेकर बोले, ‘ अम्हे न पउमनाहे’ अर्थात ‘ मैं रहूँगा, यह पद्मनाभ नहीं रहेगा.’

फिर से युद्ध हुआ और पद्मनाभ हार गया. 

यह दृढ़ संकल्प की शक्ति थी जिसने श्री कृष्ण को विजय दिलाई. दृढ़ संकल्पित व्यक्ति सफलता के रास्ते में आने वाली हर मुसीबत का डंट कर सामना करता है और विजय को प्राप्त करता है. यह संकल्प शक्ति ही सफलता का आधार है. 

Note : The above stories on determination are not my own creations. I read it somewhere and sharing it here. Did you like the story on determination ?