Thursday, March 14, 2013

Akelapan Poem in Hindi

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मैं फिर अकेली रह गयी

आयी जब मेरे जीवन में
घनघोर मुश्किलों की आंधी
थम सा गया मेरा जीवन
पर तुझको बढ़ना था साथी।
तू बढ़ा और मैं रिश्ते के
टूटे टुकड़े चुनती रही
मैं फिर अकेली रह गयी।

तेरे रंगीन सपने थे
मेरे गम मेरे अपने थे
हर गम में साथ निभाने के
तेरे वादे बिखरने थे।
इन झूठे वादों के सच को
मैं तलाश करती रही

मैं फिर अली रह गयी।
बिन तेरे मैं जी न पाऊं
इतनी मैं कमजोर नहीं
पर तुझको मैं भूल ही जाऊं
दिल मेरा इतना चोर नहीं।
तेरी यादों की आंधी में
अब तक मैं बहती रही
मैं फिर अकेली रह गयी।

Monika Jain 'पंछी'
(14/03/2013)

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