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Essay on Indian Farmers in Hindi


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यह हमारे देश की विडंबना है कि देश का अन्नदाता जो दिन-रात कड़ी मेहनत करके फसल तैयार करता है, वही गरीबी की मार से परेशान होकर आत्महत्या करने को मजबूर हो जाता है। उसे अपनी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता क्योंकि अपने ऋणों का भुगतान करने, अपने परिवार का पेट पालने और भंडारण की पर्याप्त सुविधाएँ ना होने के कारण वह अपनी फसल बिचौलियों को कम दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जाता है। दूसरी और मध्यस्थ व्यापारी महंगे दामों पर अन्न बेचकर अपनी जेबें भर लेते हैं। रही सही कसर प्राकृतिक आपदाओं द्वारा पूरी कर दी जाती है। 

भारत निर्माण सेना (NGO) के अध्यक्ष चेतन सिंह जी द्वारा कृषि क्षेत्र में क्रन्तिकारी परिवर्तन लाने के लिए एक बहुत ही अच्छा सुझाव हमारे प्रधानमंत्री जी को भेजा गया है  जिसका उल्लेख मैं यहाँ करना चाहती हूँ : 

Contract Farming  : इस योजना के तहत अलग से एक सरकारी विभाग का निर्माण किया जाना चाहिए। यह विभाग गरीब किसानों की भूमि को तीन वर्ष की अवधि के लिए पट्टे (lease) पर लेगा और उसी गाँव के किसानों को इस भूमि पर संविदात्मक सरकारी नौकरी (Contractual Govt. Job) के तहत खेती करने के लिए नियुक्त करेगा । नियुक्त किसानों को छठे वेतन आयोग के तहत भुगतान किया जायेगा। इस अनुबंध का हर ३ वर्ष बाद किसान की इच्छा पर नवीनीकरण किया जा सकता है। यह सरकारी विभाग कृषि क्षेत्र के अनुभवी और प्रशिक्षित लोगों की नियुक्ति भी करेगा ताकि उनके अनुभवों का लाभ कृषि क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास के लिए किया जा सके। इसके अलावा आर्थिक अभावों के चलते जिन अतिआधुनिक तकनीकों, मशीनों, उर्वरको आदि का उपयोग गरीब किसान नहीं कर पाते उन सभी सुविधाओं का उपयोग इस सरकारी विभाग द्वारा आसानी से किया जा सकता है। 

इस सुझाव पर अमल से किसानों को पट्टे पर दी गयी भूमि के लिए हर वर्ष निश्चित राशि मिलेगी। किसानों को खेती के लिए नियुक्त करने से उन्हें पूरे वर्ष का रोजगार और अच्छी मासिक आय मिलेगी। जिन किसानों के पास स्वयं की भूमि नहीं है उन्हें भी नियुक्त किया जा सकेगा। अब किसानों को ऋण नहीं लेना पड़ेगा और ना ही प्राकृतिक आपदाओं की मार झेलनी होगी। देश का अन्नदाता जिसे पहला अधिकार है एक अच्छे सुविधायुक्त जीवन यापन का, वह अधिकार उसे मिल पायेगा और गरीबी को कम करने में भी सहायता मिलेगी. 

दूसरी ओर देश के संसाधनों का इष्टतम उपयोग हो पायेगा। शिक्षित और अशिक्षित सभी वर्गों के लिए रोजगार के अवसरों का सृजन होगा। उन्नत तकनीकों के उपयोग से वह कृषि क्षेत्र जिस पर हमारे देश की 70 % आबादी निर्भर करती है, उसका सम्पूर्ण विकास हो सकेगा। गाँवों से शहरों की ओर पलायन रुकेगा। कृषि उत्पादन बढ़ेगा जिससे GDP में कृषि क्षेत्र का योगदान बढ़ेगा। कृषि उत्पादों के मूल्य नियंत्रित रहेंगे। गाँवों का विकास होगा और आर्थिक असमानता दूर होगी। कुल मिलाकर एक विकसित राष्ट्र का स्वप्न साकार करने में मदद मिलेगी।


Here is the complete detail about the proposed plan : 




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