Saturday, March 30, 2013

Essay on Media in Hindi, Spreading Superstitions


Keywords : Essay on Role of Media in Spreading Superstitions, Superstition,  Article, Speech, Write Up, Paragraph, Nibandh, Lekh, हिंदी निबन्ध, लेख, मीडिया और अन्धविश्वास, ज्योतिष, तंत्र, मंत्र, Anuched, Astrology

लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ मीडिया को समाज में जागरूकता फ़ैलाने, अन्धविश्वास और कुरीतियों का खात्मा करने और साक्षरता का प्रचार प्रसार करने की भूमिका के रूप में देखा जाता है लेकिन वर्तमान समय में मीडिया अपनी इस भूमिका का कितना निर्वहन कर रहा है ये हम सब जानते हैं। 
कोई भी टीवी चैनल चला लें डरावना सा रूप धारण किये हुए बाबा दर्शकों को शनि, राहु, केतु, गृह दोष, मंगल दोष और ना जाने कैसे-कैसे दोषों से डराते हुए और लौकेट, धन लक्ष्मी वर्षा यन्त्र, लक्ष्मी कुबेर यन्त्र, इच्छापूर्ति कछुआ, लाल किताब, गणपति पेंडेंट, नज़र रक्षा कवच आदि की दूकान लगाकर बैठे मिल जायेंगे जो कोड़ियों  के दाम की चीजों को महंगे दामों पर बेच कर अपनी जेबें भर रहें हैं। इसके अलावा फ़ोन और एस एम एस के जरिये समस्याओं का समाधान बताने के बहाने मोटी-मोटी कॉल दरें चार्ज की जा रही है। 
आज हर आम आदमी किसी ना किसी समस्या से जूझ रहा है। बस इसी बात का फायदा उठाकर अन्धविश्वास की अपनी दूकान चलाने के लिए मीडिया का सहारा लिया जा रहा है क्योंकि मीडिया ही एक ऐसा माध्यम है जिसके जरिये कोई भी बात सीधे-सीधे लाखों करोड़ों लोगों तक पहुंचाई जा सकती है और मीडिया के जरिये किसी भी बात को दिमाग में अच्छे से बैठाया भी जा सकता है। 
पत्र-पत्रिकाएं भी ऐसे विज्ञापनों को धड़ल्ले से छाप रही है। मुझे समझ नहीं आता कि प्यार में असफल व्यक्ति को कोई ज्योतिष या तांत्रिक उसका प्यार कैसे दिला सकता है ? निसंतान दंपत्ति को अगर ऐसे बाबा या तांत्रिक के उपाय अपनाने पर ही संतान मिल जाती है तो फिर मेडिकल की पढ़ाई की क्या जरुरत है ? अगर कोई यन्त्र खरीदकर कोई रातों रात अमीर बन सकता है तो फिर सुबह से रात तक ऑफिस में सर खपाने की क्या जरुरत है ?
कुल मिलाकर दुखी, हारे हुए और परेशान लोगों को ठगने का एक बड़ा जाल फैलाया जा चुका है जिसकी चपैट में फँस कर कई लोग अपनी जेबे खाली करवा रहें हैं। 

Monika Jain 'पंछी'