Sunday, March 24, 2013

Hindi Essay on Family and Role of Daughter In Law


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मैंने देखा है टीवी सीरियलों में हमेशा से सास की छवि को ही नकारात्मक बताया जाता रहा है और बहु को हर जुल्म-ओ-सितम सहने वाली, त्याग की मूर्ति के रूप में दिखाया जाता है। लेकिन आज नज़ारे बदल रहें हैं। मैंने कई ऐसे परिवारों को  देखा है जहाँ बहु खलनायिका की भूमिका अदा कर रही है। कई लड़कियां इस सोच के साथ गृह प्रवेश करती है कि उनका रिश्ता सिर्फ उनके पति से है ... और किसी भी तरह उन्हें अपने पति का अपने परिवार से जो जुड़ाव है उसे कम या खत्म करना है ताकि वह अपनी अलग आज़ाद दुनिया बसा सके जहाँ किसी की कोई दखलंदाज़ी ना हो। बेशक आज़ादी का यह ख्याल बेहद लुभावना है लेकिन यह आज़ादी आपको वो खुशियाँ कभी नहीं दे सकती जो पूरे परिवार के साथ मिल सकती है। साथ ही परेशानियों से भी परिवार ही उभार सकता है। एक कामकाजी महिला के लिए तो परिवार का सहयोग और भी ज्यादा मायने रखता है।
जो लड़कियां घर तोड़ने के बजाय, घर जोड़ने की सोच के साथ घर में आती है वे पति के साथ-साथ  परिवार के हर सदस्य से जुड़ जाती हैं और अपने साथ-साथ सबकी ज़िन्दगी खुशनुमा बना देती है। और इसके लिए आपको जुल्म-सितम सहने वाली त्याग की मूर्ति बनने की कतई जरुरत नहीं है। आपको बस रिश्तों को समझने की जरुरत है और आत्मकेंद्रित ना होकर पूरे परिवार को अपनाने की जरुरत है।
हमारी परम्पराएँ और सास बहु के प्रचलित किस्से बचपन से ही लड़की के मन में सास और ननद के प्रति कटुता भर देते हैं लेकिन सदियों से चली आ रही इस सोच को बदला जाना बहुत जरुरी है। जब लड़की पहले से ही सास ननद के रिश्तों के प्रति नकारात्मक भाव लेकर घर में आएगी तो जाहिर सी बात है उसे सास के व्यवहार की छोटी-छोटी बातें भी अखरने लगेगी। वह हर बात का गलत मतलब ही निकालेगी। लेकिन यहाँ दिमाग लगा कर सोचने की जरुरत है कि अगर आप सास से माँ जैसे व्यवहार की अपेक्षा रखती हैं तो आपको भी उनकी बेटी बनना होगा और कोई भी बेटी अपनी माँ की छोटी-मोटी  डांट को दिल पे नहीं लेती। 
हर छोटी-छोटी बात में पति को बीच में लाना रिश्तों में दरार पैदा कर देता है और परिवार के विघटन का कारण बनता है। बेहतर यह है कि ससुराल में किसी के भी किसी भी व्यवहार से शिकायत है तो उससे सीधा संवाद कायम किया जाए और सुलझाया जाएँ। 
अगर ससुराल में आप अपनापन पाना चाहती हैं तो आपको रिश्तों में भावनात्मक जुड़ाव पैदा करना होगा। इसके लिए बहुत जरुरी है आप बड़ों का आदर करें और छोटों को प्यार दें और ये बात दिमाग से बिलकुल निकाल दें कि पति को उसके परिवार से अलग करके ही आप खुश रह सकती हैं। किसी का भी प्यार पाने के लिए ये बिल्कुल भी जरुरी नहीं है कि उसे उसके दुसरे रिश्तों से अलग किया जाए। आज तक हमने बस यही सुना है : क्योंकि सास भी कभी बहु थी पर यह भी याद रखें : बहु भी कभी सास बनेगी। 


Monika Jain 'पंछी'