Wednesday, March 13, 2013

Jeevan Sangharsh Poem in Hindi


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दे रहा है हर कदम पे, पंथ जीवन का चुनौती 
रास्ते ही रास्ते हैं, मंजिल कहीं ना बाट जोती
बढ़ रहें हैं कदम, बिन रुके बिन थके
राह इस संघर्ष की, पर कभी ना खत्म होती।
ना सितारों से कभी, सन्देश आशा के मिले
ना कभी उम्मीद के, दीपक अंधेरों में जले
जिन्दगी के इस चमन में, फूल कोई ना खिले
ना थमे थे, ना थमे हैं, मुश्किलों के सिलसिले।
चल रही हूँ पर पहुंचना, है नहीं निश्चित मेरा
रास्ते के अंत में बस, रास्ता ही है खड़ा
दूर तक ये सफ़र, धूल-शूल से भरा
ना कहीं भी राह में रंग फैला है हरा।
चल रही हूँ निरंतर, परिणाम से अनजान मैं
बढ़ रही हूँ निरंतर, परेशान मैं, हैरान मैं 
आवाज़ ना देती मुझे दूर तक मंजिल कोई 
पर ना जाने कौनसे विश्वास में थकती ना मैं।

Monika Jain 'पंछी'