Poem on Basant Ritu in Hindi


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ऋतुओं की रानी है आई 
धानी चुनर अपने संग लायी 
जिसे ओढ़ धरती मुस्काई 
कण-कण में उमंग है छायी।

डाल-डाल नव पल्लव आया 
जैसे बचपन फिर खिल आया 
रंग बिरंगे फूलों पर 
देखो भँवरा फिर मंडराया। 

तितली भी मुस्काती है 
बहती हवा बासंती है 
नील गगन में उड़ते पंछी 
के मन को हर्षाती है।

रंग बिरंगे फूल खिलें हैं 
पीले, लाल, गुलाबी, हरे हैं 
कोयल की कूंकूं के संग 
स्वर गीतों के भी बिखरें हैं। 

Monika Jain 'पंछी' 

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