Poem on Sacrifice in Hindi


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जीवन का परम ध्येय सुख है 
हम सब पाना चाहते हैं 
पर सुख को पाने के खातिर 
हम क्या-क्या कर जाते हैं। 

भाग्य हमारे खोटे हैं
सपने जो मोटे-मोटे हैं
बाहर से हम बड़े बहुत
पर भीतर से छोटे हैं।

जब आँखों पर लालच का 
काला चश्मा लग जाता है 
लालच का ये खंजर जाने 
कितना खून बहाता है।

स्वार्थ सिद्धि से सुख मिलता 
ये कोरा भ्रम, कुछ और नहीं 
त्याग में ही है सच्चा सुख 
है सत्य यही कुछ और नहीं। 

Monika Jain 'पंछी'

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