Women's Day Poem in Hindi


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इस युग में कृष्ण का इंतजार ना करो द्रौपदी
घोर कलयुग की है ये २१ वीं सदी 
यहाँ तुम्हे अपनी रक्षा स्वयं करनी होगी 
आंसू से नहीं अंगारों से, अपनी आखें भरनी होगी। 

कृष्ण के वेश में दुशासन, घात लगायें बैठें हैं 
जिनसे आशा है तुमको, ईमान बेचकर बैठें हैं 
लज्जहीनो की ये सभा, लाज यहाँ ना बच सकती 
शस्त्र उठालो द्रौपदी! नहीं और कुछ कर सकती। 

मेहँदी से नहीं तलवारों से हाथों का शृंगार करो 
द्यूत बिछाए बैठे शकुनि, तुम बस सीधा वार करो 
अंधे, बहरे, गूंगे हैं यहाँ के राजा और प्रजा 
तुमको ही देनी होगी, अपराधी को घोर सजा।

 Monika Jain 'पंछी'


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