Wednesday, August 14, 2013

Love Ghazal in Hindi


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ख़ालिस आशिक़ी है, हम कोई पैतरा नहीं करते
क़ीमत ही नहीं दिल की वरना, पहरा नहीं करते ?

गर हुनर नहीं मुसलसल रंजो-ग़म सहने का 
नाखूनों से यूँ ज़ख्मों को कुरेदा नहीं करते। 

आशिक़ी में गुनगुनाती हैं आंखे हुस्न तुम्हारा 
हर गजल को लफ़्ज़ों में उकेरा नहीं करते।

हर मुलाक़ात लेकर आती है जुदाई का नसीब 
पर कह के 'अपना' नज़रों को फेरा नहीं करते।

नहीं मानोगे मेरी बात, इश्क़ में समझाऊँ क्या 
‘रणधीर’ मुहब्बत में कोई तेरा–मेरा नहीं करते।

By Randhir 'Bharat' Choudhary