Friday, April 12, 2013

Poem on Sympathy in Hindi


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नहीं चाहिए तुम्हारी संवेदना 
नहीं चाहिए कोई हमदर्दी 

क्या ले सकता है कोई किसी का दुःख 
और दे सकता है बदले में सुख 
नहीं 
ये महज धोखे का व्यापार है  
झूठ और कोरा भ्रम ही तो प्यार है

जिस रास्ते के अंत में हमेशा एक नया रास्ता हो 
मैं खड़ी हूँ उस रास्ते पर 
क्या चल पाओगे साथ मेरे 
ये जानते हुए कि नहीं पहुंचेंगे हम किसी मंजिल पर

डर गए ना सिर्फ बातों से ही 
और नकार दिया अपने वादों को ही 
इसलिए कहती हूँ रखो अपनी संवेदना 
ये नहीं हर सकती मेरी वेदना

Monika Jain 'पंछी'