Thursday, May 30, 2013

Essay on Ideal Student in Hindi



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एक इंसान चाहे कुछ भी बन जाए। कोई भी उपलब्धि पा ले और किसी भी पद पर पहुँच जाए पर रहता हमेशा वह विद्यार्थी ही है क्योंकि सीखने की प्रक्रिया तो कभी खत्म होती ही नहीं। वह तो अनवरत जारी रहती है।

आदर्श विद्यार्थी पर लिखने की बात है तो यूँ तो इस विषय पर हमें स्कूल की पाठ्य पुस्तकों, नैतिक शिक्षा की किताबों, इन्टरनेट आदि पर काफी कुछ मिल जाएगा। बचपन में भी अध्यापकों और माता- पिता से इस सन्दर्भ में कई निर्देश हमें मिलते थे। इसलिए उन सब बातों पर चर्चा नहीं करुँगी। हाँ, एक बात जो मुझे सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगती है वही यहाँ मैं कहना चाहती हूँ। 

एक विद्यार्थी के लिए बहुत जरुरी है कि वह जो भी पढ़ रहा है उसे मात्र अपने लक्ष्य की प्राप्ति का साधन ना माने। क्योंकि ज्ञान अपने आप में एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। इसलिए जो हम पढ़ते हैं उसे कोई परीक्षा पास करने या डिग्री पाने का साधन मात्र मानना एक बहुत बड़ी गलती है। आप अपनी अंग्रेजी सुधारने के लिए इंग्लिश नोवल्स पढ़ना शुरू करते हैं और सिर्फ अंग्रेजी सुधारने का लक्ष्य लेकर ही इन्हें पढ़ते हैं तो यह उचित नहीं होगा। 

बहुत जरुरी है जो भी आप पढ़ रहें हैं उसे अपने जीवन से जोड़ कर जरुर देखें। अगर कोई बात अच्छी लगती है तो उसे आत्मसात करने का प्रयास भी करें। किताबें दर्पण का काम करती है। हमें अपनी अच्छाइयों और बुराइयों से परिचित भी करवाती है। इसलिए पढ़ते-पढ़ते आपको पता चलता है कि आपमें कुछ त्यागने योग्य है तो उसे त्यागने का प्रयास जरुर कीजिये। 

मैंने कई लोगों को देखा है जिन्हें पढ़ने का बहुत शौक होता है। उन्हें बस पढ़ने को कुछ मिल जाए फिर उन्हें जरा भी बोरियत नहीं लगती। दुनिया भर की किताबें उनके कक्ष की शोभा बढाती है। लेकिन आश्चर्य होता है जब उन लोगों को अपने व्यक्तिगत जीवन में मैं बहुत रिजिड पाती हूँ। सामने वालें को उनकी वजह से चाहे कितनी भी तकलीफ हो रही हो पर अपनी किसी भी आदत में परिवर्तन उन्हें मंजूर नहीं होता। बल्कि वे गर्व से यह कहते हुए पाए जाते हैं कि हम जैसे हैं वैसे ही रहेंगे , किसी के लिए भी खुद को नहीं बदलेंगे। 

यहाँ शायद जो भी पढ़ा जा रहा है सिर्फ मनोरंजन के लिए पढ़ा जा रहा है। क्या पढ़ा जा रहा है इससे उनका कोई ताल्लुकात होता ही नहीं। 

पर मेरी नज़र में यह बहुत जरुरी है कि हम जो भी पढ़े, वह हमारे ज्ञान, चरित्र और हमारे व्यक्तित्व में निखार का कारण अवश्य बने। हर बार कुछ पढ़ने के बाद हम स्वयं को एक कदम आगे पायें। 

Monika Jain 'पंछी'